सौरव गांगुली की भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के प्रेसिडेंट पद से छुट्टी होने जा रही है. पूर्व क्रिकेटर रोजर बिन्नी सौरव गांगुली की जगह लेने जा रहे हैं. रोजर बिन्नी उस भारतीय टीम के सदस्य थे जिसने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में पहली बार वनडे विश्व कप जीता था. रोजर बिन्नी जहां बीसीसीआई के नए बॉस बनने जा रहे हैं, वहीं जय शाह सचिव पद पर बने रहेंगे.
सौरव गांगुली ने अध्यक्ष पद से हटने को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. 50 साल गांगुली ने इस दौरान अपनी उपलब्धियां भी गिनाईं. गांगुली ने कहा कि उनके कार्यकाल में कई अच्छी चीजें हुई. कोरोना-काल में आईपीएल हुआ, जब पूरे देश के लिए कठिन समय था. आईपीएल के मीडिया राइट्स रिकॉर्ड दामों में बिके.
सौरव गांगुली ने कहा, ‘पिछले तीन सालों में कई अच्छी चीजें हुई हैं. कोरोना काल में आईपीएल हुआ जो पूरे देश के लिए कठिन समय था. प्रसारण अधिकार रिकॉर्ड दाम पर बिके. अंडर 19 टीम ने विश्व कप जीता. काश महिला टीम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीत पाती, वे ऑस्ट्रेलिया को हरा सकते थे. सीनियर टीम ऑस्ट्रेलिया में जीती. बतौर प्रशासक ये सुनहरे पल थे.’
टीम इंडिया को गांगुली ने दी शुभकामनाएं
गांगुली ने भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए शुभकामना देते हुए कहा ,‘यह बेहतरीन टीम है और इसमें अपार प्रतिभा है. आप उम्मीद करते हैं कि यह टीम हर समय जीते, लेकिन एक खिलाड़ी की चुनौतियां बिल्कुल अलग होती हैं. इसमें तुलना नहीं हो सकती.’
सौरव गांगुली ने बताया, ‘मैं क्रिकेटरों का प्रशासक था, इतना क्रिकेट हो रहा है कि फैसले लेने पड़ते हैं. इतना पैसा इससे जुड़ा है. महिला क्रिकेट है, घरेलू क्रिकेट है. कई बार फैसले लेने पड़ते हैं.’ गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बने रहना चाहते थे, लेकिन यह हो नहीं सका. गांगुली सबसे पहले क्रिकेट प्रशासन में बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) के सचिव बने थे. जगमोहन डालमिया के निधन के बाद वह सितंबर 2015 में कैब के अध्यक्ष बने.
सचिन-नरेंद्र मोदी का दिया उदाहरण
सफलता हासिल करने को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, 'जीवन, उपलब्धियां और तरक्की छोटे-छोटे लक्ष्य के बारे में नहीं है. आप एक दिन में सचिन तेंदुलकरल या नरेंद्र मोदी नहीं बन सकते. आपको अपना जीवन, समय, दिन, सप्ताह और महीने देने पड़ते हैं. यही सफलता की कुंजी है.'
सौरव गांगुली ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में चुनौतियां एक प्रशासक के तौर पर चुनौतियों से अधिक थी. उन्होंने कहा, ‘मैं आठ साल प्रशासन में रहा, लेकिन मुझे लगता है कि एक क्रिकेटर की चुनौतियां अधिक होती हैं. प्रशासक के पास गलतियां सुधारने का समय होता है, लेकिन टेस्ट मैच में सुबह ग्लेन मैक्ग्रा की गेंद पर आप आउट हो गए तो आपके पास सुधार का कोई मौका नहीं है.'
गांगुली का शानदार रहा क्रिकेटिंग करियर
सौरव गांगुली का शुमार भारत के सबसे सफल कप्तानों में किया जाता है. उन्होंने 49 टेस्ट और 147 वनडे मैचों में भारत की कप्तानी की. गांगुली ने टीम को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया जो देश ही नहीं, बल्कि देश के बाहर भी जीतना जानती थी. सौरव गांगुली ने अपने करियर में 113 टेस्ट मैचों में 42.17 की औसत से 7212 रन बनाए, जिनमें 16 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं. वहीं, 311 वनडे मैचों में उन्होंने 41.02 की औसत से 11363 रन बनाए. जिनमें 22 शतक और 72 अर्धशतक शामिल थे.