आज तक की एक्सक्लूसिव खबर के मुताबिक भारत-पाक क्रिकेट सीरीज आगामी दिसंबर में होनी तय है. आज तक के पास मौजूद भारत-पाक सीरीज को लेकर हुए समझौते की कॉपी के मुताबिक भारत को ये सीरीज खेलनी ही पड़ेगी.
बीसीसीआई और पीसीबी के बीच हुआ था समझौता
समझौते से साफ है कि भारत ने आईसीसी में पाकिस्तान का समर्थन हासिल करने के लिए उसके साथ एक निर्धारित संख्या में सीरीज खेलने पर हामी भरी थी. इस समझौते से पता चलता है कि किस तरह बीसीसीआई ने आईसीसी में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पीसीबी को धमकी दी थी कि अगर वो बीसीसीआई का समर्थन नहीं करेगी तो भारत-पाक के बीच द्विपक्षीय सीरीज नहीं हो पाएगी. अब बीसीसीआई को नजम सेठी और संजय पटेल के हस्ताक्षरों वाले इस समझौते का पालन करना ही होगा.
समझौते से लाचार हैं शशांक मनोहर
सूत्र बताते हैं कि बोर्ड अध्यक्ष शशांक मनोहर के पास अब इस सीरीज को होने देने के अलावा कोई उपाय नहीं है. दरअसल शशांक मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष होने के साथ ही आईसीसी के चेयरमैन भी हैं और यह समझौता आईसीसी की FTP का भी पार्ट है. इस समझौते से आईसीसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं कि किस तरह आईसीसी में वोटों के लिए वादों और धमकियों का सहारा लिया है.
इस खुलासे से यह भी साफ होता है कि किस तरह आईसीसी के सदस्य देशों के अस्वीकार के बावजूद बीसीसीआई ने आईसीसी में अपना एकाधिकार जमाया था. इस खुलासे के बाद इस बात पर मुहर लगती दिख रही है कि बीसीसीआई को पाकिस्तान से न्यूट्रल वेन्यू पर क्रिकेट खेलना ही पड़ेगा. सूत्रों की मानें तो शशांक मनोहर न्यूट्रल वेन्यू के रूप में सट्टेबाजी का इतिहास रखने वाले यूएई की जगह बांग्लादेश या श्रीलंका का नाम सुझाना चाहते हैं.