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कभी ग्रेटर नोएडा को F1 ने दिलाई थीं सुर्खियां...अब 13 साल बाद क्रिकेट स्टेडियम में सुविधाओं के अभाव से हुआ शर्मसार

कभी ग्रेटर नोएडा F1 (फॉर्मूला 1) रेस की वजह से सुर्खिर्यों में आया, लेकिन उस रेस के 13 साल बाद यहीं के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में जो अव्यवस्था द‍िखी, उसकी वजह से एक ही शहर में दो खेलों के दो पक्ष सामने आए हैं.

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ग्रेटर नोएडा में अफगान‍िस्तान-न्यूजीलैंड टेस्ट रद्द, कभी इसी शहर में F1 रेस आयोज‍ित हुई थी
ग्रेटर नोएडा में अफगान‍िस्तान-न्यूजीलैंड टेस्ट रद्द, कभी इसी शहर में F1 रेस आयोज‍ित हुई थी

Greater Noida: Afghanistan-New Zealand Test abandoned: खेलों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रेटर नोएडा का नाम 2011 में मजबूती से उभरा था. तब भारत में पहली बार फॉर्मूला-1 रेस 30 अक्टूबर, 2011 को ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर कराई गई थी. लेकिन इसके 13 साल बाद जब यहां के शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मेजबानी मिली तो अव्यवस्थाओं का अंबार दिखा.   

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दरअसल, यहां अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट (9-13 सितंबर) मैच शुक्रवार को रद्द हो गया. गीली आउटफील्ड और लगातार बारिश के कारण मैच की एक भी गेंद फेंकी नहीं जा सकी. दूसरी तरफ, सुविधाओं के अभाव ने हालात और बिगाड़ दिए. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसी स्थिति महज 8वीं बार आई.

टेस्ट मैच जो एक भी गेंद फेंके बगैर रद्द

1. इंग्लैंड Vs ऑस्ट्रेलिया - मैनचेस्टर, 1890

2. इंग्लैंड Vs ऑस्ट्रेलिया - मैनचेस्टर, 1938

3. ऑस्ट्रेलिया Vs इंग्लैंड - मेलबर्न, 1970

4. न्यूजीलैंड Vs पाकिस्तान - डुनेडिन, 1989

5. वेस्टइंडीज Vs इंग्लैंड - जॉर्जटाउन, 1990

6. पाकिस्तान Vs जिम्बाब्वे - फैसलाबाद, 1998

7. न्यूजीलैंड Vsभारत - डुनेडिन, 1998

8. अफगानिस्तान VS न्यूजीलैंड - ग्रेटर नोएडा, 2024

इससे पूर्व ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला-1 रेस हुई थी. तब भारत के इस शहर का डंका दुन‍िया भर में बजा था. इसी  ट्रैक पर 22 से 24 सितंबर, 2023 तक मोटो रेस का आयोजन भी हुआ था. 

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लोकप्रियता देखें तो क्रिकेट को भारत में बड़ा दर्जा प्राप्त है. उसके एक मैच में इतनी अव्यवस्था देखने को मिलेगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी. पहले दो दिन गीली आउटफील्ड के कारण खेल नहीं हो सका, जिससे शहीद विजय सिंह पथिक खेल परिसर की मैच की मेजबानी की क्षमता पर सवाल उठे हैं . बाकी तीन दिन बारिश के कारण खेल रद्द हो गया.

शुक्रवार की सुबह पिच का मुआयना किया गया, लेकिन आउटफील्ड में उन जगहों पर पानी जमा था जो ढकी नहीं थी. इससे मैच का रद्द होना तय हो गया जिसमें टॉस तक नहीं कराया जा सका.

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एनसीआर में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हुई. इसका असर ग्रेटर नोएडा स्टेडियम भी दिखाई दिया. यहां मैच के दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव, ग्राउंड कवर की कमी, खराब ड्रेनेज, कुशल मैदानकर्मियों की कमी दिखी. वहीं सुपर सोपर पर्याप्त संख्या में नहीं होने से समस्या द‍िखी. पहले दो दिन सूरज निकलने के बावजूद खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए अंपायरों ने खेल नहीं कराने का फैसला लिया.

पहले से तैयार नहीं था ग्रेटर नोएडा का स्टेडियम...
सूत्रों की माने तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) से दो सुपर सोपर मांगे थे, जो मेरठ स्टेडियम से भेजे गए. दिन में विवाह में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक शामियाने का इस्तेमाल आउटफील्ड ढंकने के लिए किया गया और शाम को बरसाती लगाई गई. कोटला से डीडीसीए अधिकारियों ने आउटफील्ड कवर भेजे, लेकिन वह काफी नहीं थे. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पास कुशल मैदानकर्मी भी नहीं थे, जिसकी वजह से मजदूरों को काम पर लगाया गया.

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कभी बैन भी हो चुका है यह स्टेडियम
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे इस स्टेडियम ने 2016 में गुलाबी गेंद के दलीप ट्रॉफी मैच की मेजबानी की थी.हालांकि कॉरपोरेट मैचों के दौरान मैच फिक्सिंग के कारण सितंबर 2017 में बीसीसीआई ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था. तब से यहां बीसीसीआई से संबद्ध कोई भी मैच आयोजित नहीं किया गया है. स्टेडियम पहले अफगानिस्तान के लिए घरेलू मैदान के रूप में काम कर चुका है. हालांकि यह स्टेडियम उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के अंतर्गत नहीं आता है, बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को कानपुर, बेंगलुरू और ग्रेटर नोएडा के विकल्प दिए थे. एसीबी ने लॉजिस्टिक कारणों से ग्रेटर नोएडा को चुना.


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ग्रेटर नोएडा में 2013 के बाद क्यों नहीं हुई F-1 रेस? 
ग्रेटर नोएडा में इंड‍ियन ग्रां प्री की ओपन‍िंंग रेस को 'रेड बुल' रेसिंग के सेबेस्टियन वेटल ने 2011 में जीत. 2012 में भी वेटल ने पोल पोजीशन से शुरुआत की थी. उन्होंने उस साल सबसे तेज लैप और रेस लैप रिकॉर्ड भी बनाया, जो अगले दो ग्रैंड प्रिक्स के लिए कायम रहा. वहीं, 2013 में एक बार फ‍िर से रेस वेटल ने ही जीती. 2014 में यहां रेस नहीं हुई. इसे रद्द किया गया था, तब यह कहा गया था कि इस रेस का आयोजन 2015 में होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. तब फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोर्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख विक्की चंडोक ने कहा था कि 2014 में रेस नहीं होगी और अब वे 2015 पर ध्यान दे रहे हैं. 

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उस दौरान रेस आयोजक जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल (जेपीएसआई) के प्रमुख समीर गौर ने कहा था कि वे अक्टूबर की तारीख को प्राथमिकता देते, लेकिन जरूरत पड़ने पर मार्च में रेस आयोजित करने के लिए तैयार हैं. जेपीएसआई के प्रमुख समीर गौर ने तब एक बयान में कहा था, 'अक्टूबर-नवंबर की अवधि हमारे लिए मौसम के लिहाज से और भारत में त्योहारी सीजन होने के लिहाज से बेहतर है, अगर फॉर्मूला वन प्रबंधन चाहता है कि हम मार्च, 2015 में रेस आयोजित करें, तो हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है.'

लेकिन बाद में यह रिपोर्ट भी सामने आई कि वेन्यू पर कॉन्ट्रैक्ट संबंधी चीजों को निपटारा नहीं हो सका था. इस कारण फॉर्मूला-1 रेस भारत में नहीं हो पाई. 2014 में तत्कालीन फॉर्मूला-1 प्रमुख बर्नी एक्लेस्टोन ने कहा था परेशानियों से जूझ रही इंडियन ग्रां प्री के पास 2015 में वापसी के लिए समय नहीं बचा है और इसके आयोजकों को 2016 में संभावित वापसी के लिए अनुबंध संबंधी दायित्वों का निपटारा करना होगा. 

बकाया राशि बढ़कर 943 करोड़ हो गई थी

2008 में 875 एकड़ की फॉर्मूला वन ट्रैक योजना लॉन्च हुई थी. जेपी समूह को 2009 में इसका आवंटन हुआ. जेपी समूह ने आवंटित भूखंड की मूल किस्तों का समय से भुगतान नहीं किया. इससे राशि बढ़ते-बढ़ते 943 करोड़ हो गई थी.

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यमुना प्राधिकरण ने 943 करोड़ की बकाया राशि का भुगतान न करने पर 2019 में भूखंड आवंटन निरस्त कर फॉर्मूला वन ट्रैक को कब्जे में ले लिया था. 

100 करोड़ जमा कराकर कार्रवाई से बचा जेपी समूह

2021 में हाईकोर्ट के आदेश पर प्राधिकरण ने जेपी समूह ने प्रारंभिक तौर पर 100 करोड़ रुपये जमा करवाए थे. बाद में ट्रैक वापस मिला था. कंपनी पर भारी कर्ज है. इसलिए इसके बड़े प्रोजेक्ट एक तरह से रुके हुए हैं. इसीलिए शुरुआती दौर के बाद फॉर्मूला वन ग्रैंड प्री का आयोजन खटाई में पड़ चुका है.
 

अब मैच रेफरी के हाथ में क्रिकेट स्टेड‍ियम का भव‍िष्य 
अफगानिस्तान इस मैच की मेजबान था, जिसे शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिलता है. आईसीसी से 2017 में टेस्ट टीम का दर्जा मिलने के बाद यह उसका 10वां टेस्ट था. यह टेस्ट आईसीसी विश्व चैम्पियनशिप चक्र का हिस्सा नहीं है. स्टेडियम के भविष्य पर फैसला मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की रिपोर्ट आने के बाद होगा. 

ग्रेटर नोएडा स्टेडियम की समीक्षा रेफरी द्वारा की जाएगी, जैसा कि मैच के बाद किया जाता है. ऐसे में इस बात की संभावना है कि ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल) रेफरी पिच और मैदान दोनों को डिमेरिट प्वाइंट दे सकते हैं. अगर  पिच के लिए 3 और मैदान के लिए 3 अंक देता है तो नोएडा स्टेडियम को 6 अंक के साथ अनफिट घोषित कर दिया जाएगा और उसे निलंबित कर दिया जाएगा. संभावना है कि रेफरी अपनी रिपोर्ट में बुनियादी सुविधाओं का भी उल्लेख कर सकता है. 

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