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IND vs ENG Test Series, OPINION|इंग्लैंड के 'बैजबॉल' ने इंडिया में टेस्ट क्रिकेट की वाट लगा दी, 25 दिन का खेल 19 द‍िनों में सिमटा

IND VS ENG Test Series: जिस 5 मैचों की सीरीज के लिए खेल के 25 दिन निर्धारित थे, वह महज 19 दिनों में खत्म हो गया. 10 इनिंग्स में 5 बार ऐसा हुआ जब इंग्लिश बल्लेबाज 60 ओवर भी नहीं खेल सके. वहीं भारतीय बल्लेबाज हर टेस्ट मैच के एक इनिंग्स में 100 ओवरों से अधिक खेलने में कामयाब रहे.

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भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और इंग्लैंड कप्तान बेन स्टोक्स.
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और इंग्लैंड कप्तान बेन स्टोक्स.

'वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा'... साहिर लुधियानवी की लिखी इस नज़्म को अगर हकीकत में उतारने का मौका मिलता तो भारत दौरे पर आई इंग्लिश टीम कम से कम चौथे टेस्ट मैच के बाद इस पर जरूर गौर करने की सोचती.  लेकिन क्रिकेट में फिलहाल न तो कोई ऐसा नियम है और न ही इस तरह का कोई विकल्प. इसलिए इस आर्टिकल में आगे जो भी बातें होंगी, उसे आकड़ों के सहारे कहने की कोशिश रहेगी.    

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इंडिया और इंग्लैंड के बीच शनिवार (9 मार्च) को खत्म हुई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज को अगर कोई एक लाइन में समेटने को कहे तो कई क्रिकेट प्रेमियों की नजर में करीब डेढ़ महीने से अधिक चला इंग्लिश टीम का हालिया खत्म हुआ भारत दौरा 'बेस्ट से शुरू होकर, वेस्ट ऑफ टाइम' तक के सफर तक को तय करने के काफी करीब बैठ सकता है. जितने हाई नोट पर भारत vs इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज की शुरुआत हुई थी, खत्म होते-होते यह तो उबाऊ और ऊपर से थकाऊ भी होती चली गई. कारण रहा इंग्लैंड की लगातार बिखरती हुई बल्लेबाजी और कई मौकों पर साधारण गेंदबाजी. 

भारतीय टीम मैच दर मैच सीरीज में वापसी करती रही और बैजबॉल के हौवे के साथ आई इंग्लिश टीम बदलते हुए स्टेडियम्स और आगे बढ़ती टेस्ट सीरीज के साथ लगातार नीचे फिसलती रही. लगभग पूरी सीरीज के दौरान इंग्लैड की बल्लेबाजी का स्तर गिरता रहा और कमाल की बात तो यह रही कि जिस बैजबॉल वाली स्ट्रेटजी के साथ मेहमान टीम फिसड्डी होती चली गई, उसी फॉमूले पर कोच ब्रैंडन मैक्कुलम और कप्तान बेन स्टोक्स उतनी ही शिद्दत से दांव लगाते चले गए.   

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25 दिनों का खेल, महज 19 दिनों में हुआ खत्म   

सीरीज आगे बढ़ती रही. टीम इंडिया की जीत और भारतीय फैन होने के नाते उत्साह तो बढ़ता गया, लेकिन एक क्रिकेट फैन के नजरिए से अगर देखा जाए तो कुछ निराशा भी हाथ लगती चली गई. जिस 5 मैचों की सीरीज के लिए खेल के 25 दिन निर्धारित थे, वह महज 19 दिनों में खत्म हो गया. 

ind Vs ENG

सीरीज के पांचों टेस्ट मैच अगर पूरे–पूरे दिन अंत तक खेले जाते तो इसमें कुल 2,250 ओवरों की गेंदबाजी होती. लेकिन इस सीरीज के पांचों मैचों को मिलाकर केवल 1465.2 ओवरों की ही गेंदबाजी हो सकी. फेंके गए 1565.2 ओवरों में से भारतीय बल्लेबाजों ने कुल 898.1 ओवर बल्लेबाजी की, तो वहीं इंग्लिश टीम के बल्लेबाज कुल जमा 667.1 ओवर ही बल्लेबाजी कर सके. ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि पांच मैचों की इस सीरीज में जो अधिकतम 2,250 ओवरों की गेंदबाजी होनी थी, उस टारगेट से दोनों देशों के बीच हुई यह सीरीज 684.4 ओवर फेंके बगैर ही खत्म हो गई.

4 मैच, चौथे दिन और एक मैच तो तीसरे ही दिन हुआ खत्म 

सीरीज के पहले चार मैच तो चौथे दिन तक गए. जबकि अंतिम मैच तो तीसरे ही दिन खत्म हो गया. सीरीज का दूसरा और तीसरा टेस्ट मैच तो चौथे दिन के अंतिम सेशन में जाकर खत्म हुआ. जबकि चौथा टेस्ट मैच चौथे दिन टी से पहले ही खत्म हो गया. वहीं, पांचवां और अंतिम टेस्ट मैच तीसरे ही दिन टी से पहले अपने मुकाम पर पहुंच गया. हालांकि यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन अंतिम सेशन के खत्म होने के बाद इंग्लिश टीम को 30 मिनट का अतिरिक्त समय भी मिला, क्योंकि भारतीय टीम के 9 विकेट गिर चुके थे. वर्ना यह मैच अपने पांचवें दिन में जरूर प्रवेश करती.    

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सीरीज आगे बढ़ती गई, मैच छोटे होते गए 

अगर कोई टेस्ट मैच बिना किसी रुकावट के पांचों दिन पूरा-पूरा खेला जाए, तो इसमें प्रतिदिन 90 ओवरों के हिसाब से अधिकतम कुल 450 ओवर फेंके जाएंगे. लेकिन भारत और इंग्लैंड के बीच हुई टेस्ट सीरीज का आलम यह रहा कि यहां 450 ओवर तो छोड़िए, किसी गेम में 360 ओवर भी नहीं डाले जा सके. सीरीज का सबसे लंबा मैच 25 से 28 जनवरी तक हैदराबाद में खेला गया पहला टेस्ट रहा. इसमें कुल 357 ओवरों की गेंदबाजी हुई. वहीं, इस सीरीज का सबसे छोटा मैच (5वां और अंतिम) 7 से 9 मार्च तक धर्मशाला में खेला गया. इसमें केवल 230 ओवरों की गेंदबाजी हुई. 

IND vs ENG Test Series

कुल 357 ओवर फेंक कर खत्म हुए पहले टेस्ट मैच के मुकाबले सीरीज के बाकी मैचों को अगर ओवर के लिहाज से देखें, तो बचे 4 मैच पहले टेस्ट के मुकाबले और छोटे होते गए. विशाखापत्तनम में 2 से 5 फरवरी तक खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में केवल 315.4 ओवरों की गेंदबाजी हुई. दोनों टीमों के बीच तीसरा मुकाबला राजकोट में खेला गया. पहले टेस्ट के मुकाबले हालत खस्ता ही रही. तीसरे गेम में कुल 339.4 ओवर फेंके गए. 

अगर सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले की बात करें तो चौथा टेस्ट मैच ओवर के लिहाज से तीसरे टेस्ट के बराबर ही रहा. जबकि पांचवां और अंतिम टेस्ट पहले के चार मैचों के मुकाबले काफी छोटा रहा. रांची में खेला गया चौथा टेस्ट मैच (23 से 26 फरवरी) 323 ओवर में समाप्त हो हुआ. तो वहीं 7 से 9 मार्च तक धर्मशाला में खेला गया सीरीज का पांचवां और अंतिम टेस्ट मैच 230 ओवरों तक ही जा सका. 

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एक तरफा होता गया मैच, घटता चला गया उत्साह 

सीरीज स्टार्ट होने से पहले इंग्लैंड टीम के बैजबॉल की चर्चा हर तरफ हो रही थी. इंग्लैंड के बल्लेबाज ओली पोप की पहले टेस्ट मैच की दूसरी इनिंग्स में 196 रनों की शानदार पारी और फिर टॉम हार्टली की धारदार गेंदबाजी (दूसरी इनिंग्स में 7 विकेट) ने इंग्लिश टीम को सीरीज में बढ़त जरूर दिला दी. लेकिन बेन स्टोक की टीम इसे कायम रखना तो दूर, उल्टे मैच-दर-मैच उनकी हालत और खराब होती चली गई. कोई भी ऐसा मैच नहीं रहा जिसमें, एक-दो बल्लेबाजों को अगर छोड़ दें तो, इंग्लैंड की बाकी बची टीम कम से कम कोशिश करती भी दिखी. भारतीय गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के आगे पूरी की पूरी इंग्लिश टीम पूरी सीरीज में बेबस नजर आई. इस बात की गवाही आंकड़े भी बखूबी देते हैं. 

IND vs ENG Test Series

इंग्लैंड टीम को पांचों टेस्ट के दोनों इनिंग्स में बल्लेबाजी करने का मौका मिला. कुल 10 इनिंग्स में 5 बार ऐसा हुआ जब इंग्लिश बल्लेबाज 60 ओवर भी बल्लेबाजी नहीं कर सके. इसके अलावा 3 इनिंग्स ऐसे रहे जब इंग्लैंड की पूरी टीम 75 ओवर फेंके जाने से पहले ही पवेलियन लौट गई. जबकि महज दो पारियां ऐसी रहीं जब इंग्लिश बल्लेबाज 100 से अधिक ओवरों तक भारतीय गेंदबाजों के आगे टिक रहे. 

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वहीं अगर टीम इंडिया की बात करें तो भारतीय बल्लेबाज हर टेस्ट मैच के एक इनिंग्स में 100 ओवरों से अधिक खेलने में कामयाब रहे. जबकि कुछ मौके ऐसे रहे जब भारत ने या तो लक्ष्य हासिल कर लिया या फिर अपनी पारी धोषित कर दी. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इंग्लैंड की लचर बल्लेबाजी और भारतीय विकेट पर भी बैजबॉल की जिद ने वैसे क्रिकेट फैंस को अपसेट किया जिन्होंने दोनों देशों के बीच एक टक्कर भरी टेस्ट श्रृंखला की उम्मीद लगा रखी थी.  

टीम इंडिया मजबूत होती गई, इंग्लैंड का स्तर गिरता रहा 

बेन स्टोक्स के नेतृत्व वाली इंग्लिश टीम जब 21 जनवरी को हैदराबाद पहुंची तो क्रिकेट फैंस दोनों टीमों के बीच एक जबरदस्त और टक्कर भरी टेस्ट सीरीज की आस लगाए बैठे थे. इंग्लैंड की टीम ने श्रृंखला की शुरुआत जीत से की. भारत को पहले ही टेस्ट मैच में 28 रनों से हार का सामना करना पड़ा. बैजबॉल को लेकर जो बबल बना हुआ था, वह अंग्रेजों की इस जीत के बाद और बड़ा हो गया. 

लेकिन इसके बाद जो हुआ वह इतिहास बन गया. रोहित शर्मा की टीम ने न सिर्फ पांच मैचों की सीरीज को 4-1 से अपने नाम किया, बल्कि टेस्ट सीरीज में वह कारनामा कर दिखाया जो क्रिकेट इतिहास के पन्नों में 112 साल पहले दर्ज हुआ था. दसअसल, टीम इंडिया ने सीरीज में पहला मैच हारने के बाद वापसी की और बाकी के बचे चार टेस्ट मैचों को अपने नाम किया. टेस्ट इतिहास में ऐसा 112 साल बाद हुआ. 

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इसके बाद हर बीतते गेम के साथ जैसे-जैसे टीम इंडिया सीरीज में वापसी कर अपना बर्चस्व बढ़ाती चली गई, वैसे-वैसे इंग्लैंड की टीम का स्तर नीचे गिरता चला गया. पांच मैचों की सीरीज का अंतिम मैच, जो धर्मशाला में खेला गया, उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था कि मानो इंग्लिश टीम पैकअप के मूड में है. वह गेम को जल्द से जल्द खत्म कर अपने वतन वापस लौटना चाहती है.

थोड़ी लंबी लगी पांच मैचों की यह टेस्ट सीरीज  

25 जनवरी को हैदराबाद में शुरू होकर यह टेस्ट सीरीज 9 मार्च को धर्मशाला में खत्म हुई. 5 मैच को खत्म होने में लगभग 19 दिनों का समय लगा. जिन मैचों को 25 दिनों तक चलना था, वह महज 19 दिनों में समाप्त हो गया. फिर भी पांच मैचों की यह टेस्ट सीरीज काफी लंबी नजर आई. चाहे आप इसे इंग्लैंड की खराब बल्लेबाजी के चश्मे से देखें या फिर भारतीय गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के पहलू से, अंत तक आते-आते टेस्ट सीरीज काफी लंबा और थोड़ा उबाऊ तो लगने ही लगा था. एक तो 5 दिनों वाला मैच चौथे दिन ही समाप्त हो रहा था, तो वहीं दूसरी ओर कुछ गेम्स के बीच लंबा गैप था. 

इतनी लंबी सीरीज प्लान करते वक्त शायद खिलाड़ियों की थकान और उनके मानसिक थकान का अंदाजा दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड को भी रहा होगा. तभी कुछ मैचों के बीच काफी ज्यादा लंबा गैप रखा गया था. जहां एक ओर दूसरे और तीसरे टेस्ट मैच के बीच आठ दिनों का गैप था तो वहीं चौथे और पांचवें टेस्ट मैच के बीच तकरीबन नौ दिनों का अंतर रखा गया था.. इंग्लैंड के इस भारत दौरे का नतीजा जो भी रहा हो, लेकिन हाशिये पर खड़े क्रिकेट के इस फॉर्मेट के लिए पांच मैचों की यह सीरीज कुछ खास नहीं कर सकी.

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