शिखर-रोहित की धमाकेदार शुरूआत
टीम इंडिया के ओपनर्स कुछ सोचकर मैदान में आए थे. विकेट पर टिकना ज़रूरी था और तेज़ रन बनाना बेहद ज़रूरी. शुरूआत हुई भी कुछ ऐसी ही. पहले तीन ओवर तक दोनों ने संभल-संभल कर ही बल्लेबाज़ी की. पारी के चौथे ओवर में हेज़लवुड की गेंद पर विकेटकीपर ब्रेड हैडिन ने शिखर धवन का कैच छोड़ दिया. शिखर उस समय 5 पर खेल रहे थे. टीम इंडिया के लिए ये एक बड़ा जीवनदान था जिसका फायदा शिखर धवन ने खूब उठाया. शिखर और रोहित ने करीब 6 की औसत से दमदार बल्लेबाज़ी की. शिखर धवन ने 10वें ओवर में दो चौके और एक छक्का जड़कर टीम इंडिया के 50 रन पूरे किए. इसके बाद रन रेट और बढ़ा, 13वें ओवर तक भारत 76 रन बना चुका था लेकिन इसी स्कोर पर शिखर धवन गलती कर गए.
मैच में लौटा ऑस्ट्रेलिया
हेज़लवुड के 13वें ओवर की पांचवीं गेंद को शिखर धवन ने एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से ड्राइव करने की कोशिश की लेकिन डीप एक्स्ट्रा कवर पर मैक्सवेल को शायद इसी शॉट के लिए खड़ा किया गया था. 41 गेंदों पर 45 रन बनाने के बाद शिखर की ये गलती टीम इंडिया को भारी पड़ गई.
2 रन बाद ही विराट कोहली को मिशेल जॉन्सन ने विदा कर दिया. जॉन्सन की बाउंसर को पुल करने की कोशिश कर रहे विराट के बल्ले का ऊपरी किनारा लेकर गेंद विकेटकीपर हेडिन के पास गई और विराट की पारी का अंत हो गया. इतने बड़े मैच में विराट जैसे बल्लेबाज़ से 13 गेंदों पर 1 रन बनाने की उम्मीद किसी ने नहीं की थी. जॉनसन के इस शानदार स्पेल का शिकार रोहित शर्मा भी हो गए. 34 रन पर जमकर खेल रहे रोहित के बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर जॉनसन की गेंद उनकी गिल्लियां ले उड़ीं. इसके बाद सुरेश रैना भी आए और सिर्फ 7 रन बनाकर जेम्स फॉकनर की गेंद पर विकेटकीपर हेडिन को कैच थमा बैठे. 108 पर 4 विकेट गंवाकर टीम इंडिया गंभीर संकट में फंस चुकी थी.
धोनी-रहाणे पर आई बड़ी ज़िम्मेदारी
कप्तान के सिर पर अब बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी और अजिंक्य रहाणे के पास एक बहुत बड़ा मौका था. रन रेट का दबाव आसमान छू रहा था और तेज़ रन बनाना बड़ी चुनौती थी. ऐसे में दोनों ने करीब 5.30 की औसत से रन बनाने शुरू किए. 13.2 ओवर में दोनों ने 70 रन की साझेदारी कर डाली. इस दौरान भारत ने 150 रन का आंकड़ा भी पार कर लिया. 37वें ओवर में 44 रन बनाने के बाद रहाणे मिचेल स्टार्क की एक गेंद पर बीट हुए लेकिन विकेटकीपर ब्रैड हेडिन ने कैच की अपील की और माइकल क्लार्क ने रिव्यू ले लिया. टीवी रीप्ले से कुछ खास पता नहीं चला लेकिन स्निकोमीटर बता रहा था कि गेंद रहाणे के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर के पास गई थी. थर्ड अंपायर ने रहाणे को आउट करार दिया. 178 पर भारत को लगा ये पांचवां झटका था.
धोनी की कोशिश नाकाम
जडेजा भी 42वें ओवर में 17 गेंदों पर 18 रन बनाकर रन आउट हो गए. मुसीबत की घड़ी में कप्तान धोनी ने एक छोर थामा हुआ था. 40 ओवर के बाद टीम इंडिया को करीब 12 के औसत से रन बनाने थे. 41वें ओवर में भारत के 200 रन पूरे हुए. धोनी बीच-बीच में बड़े शॉट भी लगाते लेकिन ये सब भारत के लिए नाकाफ़ी साबित हो रहा था. धोनी ने 55 गेंदों पर 3 चौकों और 1 छक्के की मदद से अपनी हाफ सेंचुरी भी पूरी कर ली. आखिरकार धोनी का संघर्ष 45वें ओवर में जाकर खत्म हुआ. 93 गेंदों पर 65 रन की पारी खेलने के बाद धोनी मैक्सवेल एक शानदार थ्रो पर रनआउट हो गए. स्टार्क की गेंद को उन्होंने मिडविकेट पर खेला और सिंगल लेने के लिए दौड़ पड़े लेकिन उनसे पहले गेंद विकेट तक जा पहुंची.
नहीं बचा भारत का ताज
धोनी के जाने के बाद टीम इंडिया की हार बस एक औपचारकिता मात्र ही बची थी. धोनी का विकेट 231 के स्कोर पर गिरा था और अगले 2 रनों में बाकी तीन बल्लेबाज़ भी आउट हो गए. अश्विन ने 5 रन बनाए तो मोहित शर्मा और उमेश यादव खाता तक नहीं खोल पाए. मोहम्मद शमी 1 रन बनाकर नाबाद रहे. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने भारत पर जमकर कहर बरपाया. फॉकनर ने 3 विकेट लिए तो जॉनसन और स्टार्क ने 2-2, हेज़लवुड को एक विकेट मिला. 95 रनों की हार के साथ ही भारत ने फाइनल में खेलने का मौका भी खो दिया और विश्वविजेता का ताज भी