भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. हालांकि एमएस धोनी आईपीएल खेलते रहेंगे. धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान साबित हुए. धोनी के फैसलों ने ही उन्हें सबसे सफल कप्तान बनाया. कैप्टन कूल के फैसले लेने की क्षमता ही उनकी सफलता का कारण बनी.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी. उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर संन्यास की घोषणा की. अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एमएस धोनी ने लिखा है, 'आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद. आज शाम 7.29 बजे के बाद से मुझे रिटायर समझा जाए.'
एमएस धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास का ऐलान कर चुके थे. हालांकि वनडे और टी-20 में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने हुए थे. लेकिन अब 39 वर्षीय धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को दिन में ही धोनी ने संन्यास की चिट्ठी लिख दी थी. धोनी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान भी रह चुके हैं.
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रांची के एक साधारण परिवार से आकर क्रिकेट की दुनिया में छा जाने वाले धोनी का क्रिकेट करियर 2004 में टीम इंडिया के लिए चयनित होने तक काफी चुनौतियों से भरा रहा है. भारतीय क्रिकेट में चयन के बाद धोनी ने कप्तान बनने और फिर सफलतम कप्तान तक का सफऱ पूरा किया. कई मौकों पर धोनी ने सबको चौंकाने वाले फैसले लिए और उनके इन फैसलों ने साबित किया कि वह क्यों दूसरे कप्तानों से अलग रहे.
T20 वर्ल्ड कप 2007 का फाइनल मुकाबला
धोनी की कप्तानी में 2007 में एक युवा टीम टी-20 वर्ल्ड कप मैच खेलने गई थी. भारतीय टीम सबको चौंकाते हुए फाइनल मैच खेल रही थी. मुकाबला पाकिस्तान से था. मैच भारत की ओर जाता हुआ दिख रहा था. लेकिन मिस्बाह उल हक ने पारी के 17वें ओवर में तीन छक्के मारकर पाकिस्तान को मुकाबले में वापस ला दिया.
अब आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन बनाने थे और एक विकेट बचा था. भारत के मेन बॉलर्स के ओवर खत्म हो चुके थे. हरभजन और जोगिंदर शर्मा का एक-एक ओवर बचा था. धोनी ने यहां बड़ा फैसला लेते हुए हरभजन की जगह जोगिंदर को गेंद थमाई. जोगिंदर पहली बार टीम इंडिया के लिए सीरीज खेल रहे थे. सब को लगा कि धोनी ने गलती कर दी. जोगिंदर ने पहली गेंद वाइड फेंकी. उसके बाद एक डॉट गेंद फेंकी. अगली गेंद पर मिस्बाह ने छक्का जड़ दिया. लगा मैच भारत के हाथ से निकल जाएगा. लेकिन इसके बाद अगली गेंद पर मिस्बाह ने जो शॉट मारा वह शॉर्ट फाइन लेग पर खड़े श्रीसंत के हाथों में गया और भारत जीत गया. धोनी का यह फैसला यादगार बन गया.
2008 में आस्ट्रेलिया की CB सीरीज
साल 2007 में टी20 विश्वकप से पहले युवराज सिंह और एमएस धोनी में से एक को कप्तान चुनना था. द्रविड़ ने तब चीफ सलेक्टर दिलीप वेंगसरकर को धोनी का नाम सुझाया था. 2008 में धोनी को पूर्ण रूप से भारतीय टीम की कप्तानी मिल गई. तब उन्होंने एक ऐसी टीम बनाई जिसमें द्रविड़ और गांगुली ही नहीं थे. ये फैसला बहुत बड़ा और मुश्किल था. लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद ज़रूरी भी था.
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द्रविड़ और गांगुली, टीम इंडिया के पूर्व कप्तान थे और दोनों ने वनडे क्रिकेट में 23,000 से ज़्यादा रन बनाए थे. लेकिन धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ से पहले ये अहम फैसला लिया. इस फैसले पर तब के बीसीसीआई सेक्रेटरी निरंजन शाह ने कहा था, ''चीफ सिलेक्टर और टीम मैनेजमेंट एक युवा फील्डिंग टीम को दौरे पर भेजना चाहती है. टीम में खिलाड़ियों का चयन उनकी फील्डिंग के आधार पर हुआ है.'' धोनी और सेलेक्टर्स के इस फैसले ने भारत को ऑस्ट्रेलिया में सीबी सीरीज़ जिता दी. जिसके बाद धोनी के आलोचक भी धोनी के फैन हो गए.
वर्ल्डकप फाइनल 2011
विश्वकप 2011का सबसे बड़ा हीरो युवराज सिंह को माना गया. गेंद और बल्ले से युवी ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचा दिया. श्रीलंका के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े मैदान पर भारत के सामने 275 रनों का विशाल लक्ष्य था. श्रीलंका ने पहले वीरेंद्र सहवाग और सचिन को जल्दी आउट कर दिया. इसके बाद गंभीर, विराट के साथ पारी को आगे बढ़ा रहे थे. फिर विराट आउट हुए तो नंबर पांच पर युवराज को उतरना था. लेकिन वानखेड़े के पवेलियन से सीढ़ियां उतरते हुए धोनी बाहर आए.
एमएस धोनी ने ड्रेसिंग रूम में कोच से कहा कि वो बल्लेबाज़ी के लिए जाएंगे. उन्होंने युवी को रुकने के लिए बोला और खुद खेलने उतर गए. धोनी का ये मूव उस वक्त बहुत से लोग नहीं समझ पाए. लेकिन उन्होंने 79 गेंदों में 91 रन ठोके और अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को 28 साल बाद विश्वकप जिता दिया.
चैंम्पियंस ट्रॉफी 2013
रोहित शर्मा 2007 से भारतीय टीम के लिए खेल रहे थे. लेकिन रोहित को सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की वजह से ओपनिंग स्लॉट नहीं मिल पा रहा था. 2011 में रोहित को एक बार पारी शुरू करने का मौका मिला, लेकिन वो उतना खास प्रदर्शन नहीं कर सके. 2012 के खराब साल के बाद चैम्पियंस ट्रॉफी 2013 के लिए धोनी ने सहवाग और गंभीर से आगे देखना शुरू किया. इस बार उन्होंने बतौर ओपनर रोहित शर्मा को प्रमोट करने का फैसला किया.
महेंद्र सिंह धोनी ने अब 2013 में रोहित और शिखर के रूप में टीम इंडिया के लिए एक नई ओपनिंग जोड़ी खोज ली. चैम्पियंस ट्रॉफी 2013 में इन दोनों ने पारी की शुरुआत की. दोनों ही बल्लेबाज़ों ने उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टीम की नई ओपनिंग जोड़ी बन गए. ये दोनों ही बल्लेबाज़ उस टूर्नामेंट में टॉप-4 रन बनाने वालों में शामिल रहे.
चैम्पियन ट्रॉफी फाइनल 2013
इससे पहले धोनी 2007 और 2011 में विश्वकप जीत चुके थे. इस बार चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए इंग्लैंड पहुंचे थे. भारत ने ग्रुप के तीनों मैचों से पार पाते हुए सेमीफाइनल का सफर तय किया. इसके बाद श्रीलंका को हराया और टीम फाइनल में पहुंच गई. फाइनल में मेजबान इंग्लैंड से भारत की टक्कर थी.
50 ओवर के इस मैच में बारिश ने खेल बिगाड़ दिया. मैच सिर्फ 20 ओवर का खेला गया. भारत इंग्लैंड के सामने 20 ओवर में 130 रनों का लक्ष्य ही रख पाया. जवाब में इंग्लैंड की टीम भी लड़खड़ाई गई, लेकिन इओन मॉर्गन और रवि बोपारा जम गए. इंग्लैंड को जीत के लिए 18 गेंदों में 28 रन बनाने थे, जबकि छह विकेट बाकी थे. ईशांत शर्मा को छोड़ बाकी सभी गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाज़ी की थी. अश्विन और जडेजा का एक-एक ओवर बचा था. ईशांत पहले ही तीन ओवरों में 27 रन लुटा चुके थे. लेकिन कप्तान धोनी ने गेंद ईशांत को सौंप दी. यह देखकर सभी फैंस, कमेंटेटर हैरान रह गए. सबके मन में यही सवाल था आखिर धोनी ने ये क्या किया.
ईशांत 18वां ओवर फेंक रहे थे. पहली गेंद डॉट. दूसरी गेंद पर मोर्गन ने जोरदार छक्का मार दिया. फिर ईशांत ने एक के बाद एक दो वाइड गेंदें फेंक दीं और अब इंग्लैंड को जीतने के लिए 16 गेंदों में 20 रनों की ज़रूरत थी. फिर आया टर्निंग प्वॉइंट. ईशांत की गेंद पर मोर्गन ने अश्विन को कैच दे दिया. अगली ही गेंद पर रवि बोपारा भी अश्विन को फिर से कैच थमा दिए. इंग्लैंड के दोनों जमे हुए बल्लेबाज वापस पवेलियन लौट गए. कप्तान धोनी का ट्रम्प कार्ड एक बार फिर से चल गया और टीम इंडिया ने इस मैच को 5 रनों से जीत लिया.