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शान के साथ वनडे क्रिकेट को माइकल क्लार्क ने कहा अलविदा

आईसीसी वर्ल्ड कप-2015 के फाइनल में रविवार को वनडे का अपना आखिरी मैच खेलने उतरे ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने 74 रनों की जिस शानदार पारी का प्रदर्शन किया और अपनी टीम को पांचवीं बार वर्ल्ड चैम्पियन बनाने में अहम भूमिका निभाई, यह उनके एक बेहतरीन खिलाड़ी के साथ-साथ शानदार नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है. क्लार्क ने शनिवार को ही यह घोषणा कर दी थी कि रविवार को मेलबर्न क्रिकेट मैदान (एमसीजी) पर वह अपने अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय करियर का आखिरी मैच खेलेंगे.

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Michael Clarke
Michael Clarke

आईसीसी वर्ल्ड कप-2015 के फाइनल में रविवार को वनडे का अपना आखिरी मैच खेलने उतरे ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने 74 रनों की जिस शानदार पारी का प्रदर्शन किया और अपनी टीम को पांचवीं बार वर्ल्ड चैम्पियन बनाने में अहम भूमिका निभाई, यह उनके एक बेहतरीन खिलाड़ी के साथ-साथ शानदार नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है. क्लार्क ने शनिवार को ही यह घोषणा कर दी थी कि रविवार को मेलबर्न क्रिकेट मैदान (एमसीजी) पर वह अपने अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय करियर का आखिरी मैच खेलेंगे.

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क्लार्क ने 2004 में भारत के खिलाफ पदार्पण टेस्ट मैच में ही 23 साल की उम्र में शतक लगाकर क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया. ऐसा करने वाले वह 12वें आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बने. क्लार्क ने हालांकि अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय में कदम एक साल पहले ही रख दिया था.

उस टेस्ट श्रृंखला में ऑस्ट्रेलिया ने 35 साल बाद भारत को उसी की जमीन पर टेस्ट श्रंखला में मात दी थी, निश्चित रूप से क्लार्क की इसमें अहम भूमिका रही. ऑस्ट्रेलियाई टीम के अंदर 'पप' के निकनेम से पुकारे जाने वाले क्लार्क ने इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई मैदान पर भी शतक जड़ा.

इसके बाद वह दौर भी आया जब 2005 एशेज श्रृंखला में खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा. वह हालांकि ज्यादा समय तक टेस्ट टीम से बाहर नहीं रहे और 2006-07 में ऑस्ट्रेलिया में हुए ऐशेज के लिए वापस टीम में शामिल किए गए.

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क्लार्क ने वर्ष-2007 में ऑस्ट्रेलिया को लगातार तीसरी बार वर्ल्ड चैम्पियन बनाने में भी अहम भूमिका निभाई, लेकिन ज्यादातर मौकों पर वह टेस्ट मैचों में अपनी बल्लेबाजी के लिए जाने गए. क्लार्क चार बार (2009, 2012, 2013, 2014) ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज चुने गए.

इस बीच 2010 में अपनी महिला मित्र से अनबन की खबरों से ऐसा लगा कि जल्द ही उनका करियर अधर में फंस जाएगा, इसके बावजूद वह वापसी करने और क्रिकेट पर अपना ध्यान केंद्रित करने में कामयाब रहे. उस समय व्यक्तिगत जिंदगी में वह किस हद तक परेशानियों से जूझ रहे थे, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्हें तब न्यूजीलैंड दौरा बीच में छोड़ कर स्वदेश लौटना पड़ा था.

बड़े शॉट लगाने में संकोची माने जाने वाले क्लार्क ने 2011 में टी-20 प्रारूप से संन्यास ले लिया.

वर्ल्ड कप-2011 के बाद रिकी पोंटिंग के संन्यास लेने के बाद क्लार्क वर्ल्ड की इस सर्वश्रेष्ट टीम के कप्तान नियुक्त किए गए और उन्होंने अपने नेतृत्व में इस टीम की गरिमा को और बढ़ाया. पिछला साल क्लार्क के लिए जरूर निराशाजनक रहा और ज्यादातर समय वह चोट से जूझते नजर आए. मांसपेशियों में खिंचाव की लगातार समस्या ने एक समय उनके क्रिकेट भविष्य पर भी सवाल पैदा कर दिए थे.

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बीते वर्ष अगस्त में जिम्बाब्वे में आयोजित त्रिकोणीय श्रृंखला से उन्हें चोट के कारण बाहर होना पड़ा. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में भी वह एक बार फिर चोटिल हुए. भारत के खिलाफ एडिलेड में पहले टेस्ट के दौरान उन्होंने वापसी की और एक बार फिर चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर होना पड़ा.

सिडनी के इस बल्लेबाज ने हालांकि हार नहीं मानी और वर्ल्ड कप के लिए खुद को तैयार करने में जुट गया. पाकिस्तान के इमरान खान के बाद क्लार्क ऐसे दूसरे कप्तान हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप जीतने के साथ ही संन्यास ले लिया.

माइकल क्लार्क का करियर
टेस्ट
मैच- 108, रन- 8432
वनडे
मैच- 244 मैच, रन-7907
टी-20
मैच- 34, रन-488

- इनपुट IANS

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