एथलीट अब अपने हिसाब से डिजाइन कराए गए जूते नहीं पहन पाएंगे. क्योंकि वर्ल्ड एथलेटिक्स ने जूतों और स्पाइक्स के तलवे की ऊंचाई निर्धारित कर दी है. जिसकी वजह से एथलीट अब मोटे और स्पंजी सोल वाले जूतों का इस्तेमाल ओलंपिक, वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में नहीं कर पाएंगे.
एथलीट्स को अपने हिसाब से डिजाइन कराए गए जूतों से थोड़ा लाभ मिल जाता था. इसे रोकने के लिए वर्ल्ड एथेलटिक्स ने जूतों और स्पाइक्स के तलवे की ऊंचाई को निर्धारित कर दिया है.
दुनिया के कुछ चुनिंदा ब्रांड निर्धारित मानकों के हिसाब से जूते तैयार कर रहे हैं. लेकिन इसमें भारतीय ब्रांड नहीं है. एक दिसंबर से होने वाली इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में निर्धारित ऊंचाई वाले सोल के जूते पहनकर ही एथलीट दौड़ सकेंगे.
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियशिप में इस नियम को लागू करेगा. लेकिन घरेलू स्तर की चैम्पियनशिप में एथलीट किसी भी ब्रांड का जूता पहनकर दौड़ सकता है. लेकिन सोल की ऊंचाई मानक के अनुसार ही होनी चाहिए.
हाई जंप, लांग जंप और 800 मीटर के ऊपर दौड़ के लिए सोल की ऊंचाई अधिकतम 13 मिलीमीटर है. वहीं स्पाइक्स के सोल की ऊंचाई 9 मिलीमीटर तय की गई है. इसी तरह रोड रेस और क्रॉसकंट्री के जूतों के तलवों की ऊंचाई भी करीब 13 मिलीमीटर तय की गई है.
वर्ल्ड एथलेटिक्स ने नौ विदेशी कंपनियों के जूतों व स्पाइक्स को मंजूरी दी है. इसके अलावा कोई अन्य कंपनी इन निर्धारित मानकों के हिसाब से जूते बनाती है तो उसे चार महा पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स के पास जांच के लिए जूते भेजने होंगे. कोई एथलीट इन ब्रांडों के अलावा जूता इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे एक जोड़ी जूता छह माह पहले एप्रवूल के लिए भेजना होगा.