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दिग्गज फुटबॉलर माराडोना का दिल का दौरा पड़ने से निधन, 60 की उम्र में ली अंतिम सांस

डिएगो माराडोना को सर्वकालिक महान फुटबॉलर कहा जाता है. उन्होंने साल 1976 में फुटबॉल की दुनिया में कदम रखा. इसके एक दशक बाद उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने 1986 का विश्व कप जीता. माराडोना ने खिलाड़ी से लेकर कोच तक का सफर तय किया.

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दिग्गज फुटबॉलर माराडोना का दिल का दौरा पड़ने से निधन (फाइल फोटो- AP)
दिग्गज फुटबॉलर माराडोना का दिल का दौरा पड़ने से निधन (फाइल फोटो- AP)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डिएगो माराडोना का 60 साल की उम्र में निधन
  • दिल का दौरा पड़ने से हुआ दिग्गज फुटबॉलर का निधन
  • माराडोना लंबे समय से बीमार चल रहे थे

अर्जेंटीना के अपने जमाने के दिग्गज फुटबॉलर डिएगो माराडोना का बुधवार को निधन हो गया. अर्जेंटीना की मीडिया के मुताबिक, माराडोना का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ. उन्होंने 60 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. माराडोना लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

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दो सप्ताह पहले ही उन्हें ब्रेन में क्लॉट की वजह से सर्जरी करवानी पड़ी थी. माराडोना के निधन पर प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने ट्वीट किया कि मेरे हीरो नहीं रहे. मैंने आपके लिए फुटबॉल देखा. वहीं, ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले ने कहा कि उम्मीद है कि हम आसमान में साथ फुटबॉल खेलेंगे. 

डिएगो माराडोना को सर्वकालिक महान फुटबॉलर कहा जाता है. अर्जेंटीना को 1986 फुटबॉल वर्ल्ड कप जितवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. माराडोना ने साल 1976 में फुटबॉल की दुनिया में कदम रखा. इसके एक दशक बाद उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने 1986 का विश्व कप जीता. इस दौरान उन्होंने खेल के इतिहास के दो यादगार गोल भी किए. 

ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर पेले के साथ माराडोना

इस बेहतरीन खिलाड़ी के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके देश अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में 9 फीट ऊंची उनकी प्रतिमा लगी है. साल 2018 में डिएगो माराडोना के 58वें जन्मदिन का जश्न मनाते हुए उनकी पहली कांसे की प्रतिमा का अनावरण किया गया था.

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इस प्रतिमा में इंग्लैंड के खिलाफ उनके गोल को दर्शाया गया है, जो 20वीं शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना गया था.यह प्रतिमा ब्यूनस आयर्स में अर्जेंटिनोस जूनियर्स क्लब स्टेडियम के समीप है. माराडोना ने 1976 में यहीं से पदार्पण किया था.

कौन भूल सकता है 'हैंड ऑफ गॉड'

1986 के विश्व कप की उस घटना को कौन भूल सकता है जब डिएगो माराडोना ने हाथ की मदद से गोल किया था. बाद में उन्होंने इसे ‘हैंड ऑफ गॉड’ यानी ईश्वर का हाथ करार दिया था. माराडोना ने ये गोल इंग्लैड के खिलाफ मैच में किया था. माराडोना 1986 में मैक्सिको में खेले गए विश्व कप में अर्जेंटीना के कप्तान थे.

माराडोना की प्रतिमा

उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना की इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 से जीत के बाद कहा था, ‘यह ईश्वर का हाथ यानी ‘हैंड ऑफ गॉड’ था.’ उस विश्व कप में माराडोना के दम पर अर्जेंटीना दूसरी बार चैम्पियन बना था. फाइनल में अर्जेंटीना ने वेस्ट जर्मनी को 3-2 से शिकस्त देकर दूसरी बार इस ट्रॉफी पर कब्जा किया था. उनका यह कथन खेल जगत की सबसे चर्चित टिप्पणियों में शामिल है. 

ऐसा रहा करियर

माराडोन का फुटबॉल करियर शानदार रहा. खिलाड़ी से लेकर कोच तक का सफर उन्होंने तय किया. माराडोना साल 1977 से 1994 तक अर्जेंटीना की टीम के सदस्य रहे. इस दौरान उन्होंने 91 मैच खेले और 34 गोल दागे. मारोडना ने साल 1997 में पेशेवर फुटबॉल को 37 साल की उम्र में अलविदा कह दिया था. 

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इस दिग्गज खिलाड़ी ने फुटबॉल के 4 वर्ल्ड कप खेले. साल 1982 में उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड कप खेला. इसके अलावा माराडोना ने 1986, 1990 और 1994 का वर्ल्ड कप भी खेला. वो 2008 से 2010 तक अर्जेंटीना की टीम के कोच भी रहे. 2010 विश्व कप के बाद मारोडना ने यह पद छोड़ दिया था, जब अर्जेंटीना को क्वार्टरफाइनल में जर्मनी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा उन्होंने कई अन्य टीमों को भी कोचिंग दी.  

माराडोना को FIFA प्लेयर ऑफ दी सेंचुरी पुरस्कार के लिए इंटरनेट वोटिंग में पहला स्थान भई मिला था और उन्होंने पेले के साथ पुरस्कार में साझेदारी की थी.

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