Vinesh Phogat and Phogat Sisters: विनेश फोगाट ने मंगलवार (6 अगस्त) को महिला 50 किग्रा फ्रीस्टाइल इवेंट के सेमीफाइनल में क्यूबा की रेसलर युसनेइलिस गुजमैन (Yusneylys Guzman) को 5-0 से हराया. अब विनेश का फाइनल यानी गोल्ड मेडल मुकाबला बुधवार (7 अगस्त) को होगा. उनके पास अब गोल्ड मेडल जीतने का भी सुनहरा मौका है. कुल मिलाकर विनेश ने भारत के लिए एक मेडल तो पक्का कर लिया है.
वैसे विनेश जिस फोगाट परिवार से आती हैं, उस परिवार की 6 बेटियों में से हरेक ने भारत का नाम रोशन किया है. विनेश फोगाट के ताऊ और गुरु महावीर फोगाट की कहानी 'दंगल' फिल्म में दिखाई जा चुकी है. फोगाट को उनकी कोचिंग की वजह से भारत सरकार द्रोणाचार्य सम्मान भी दे चुकी है.
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— Babita Phogat (@BabitaPhogat) November 24, 2016
फोगाट रेसलर सिस्टर्स की बात की जाए तो इनमें गीता, बबीता, प्रियंका, रितु, विनेश और संगीता हैं. इनमें गीता, बबीता, रितु और संगीता पूर्व पहलवान और कोच महावीर सिंह फोगट की बेटियां हैं. वहीं प्रियंका और विनेश का पालन-पोषण महावीर ने किया था. विनेश ने अपने पिता राजपाल को 9 साल की उम्र में खो दिया था. महावीर फोगाट विनेश के ताऊ हैं.
महावीर फोगाट ने सभी छह बहनों को भिवानी जिले के अपने गांव बलाली में कुश्ती की बारीकियां सिखाईं. फोगाट बहनों में से तीन, गीता, बबीता और विनेश, राष्ट्रमंडल खेलों में विभिन्न भार वर्गों में स्वर्ण पदक विजेता हैं, जबकि प्रियंका ने एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है. रितु राष्ट्रीय चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता हैं और संगीता ने एज लेवल की इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीते हैं.
"Four sisters, four different personalities, one unbreakable sisterhood. 💖" pic.twitter.com/w8axIncITe
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गीता फोगाट ने सबसे पहले बनाया ये इतिहास
गीता ने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में तब इतिहास रच दिया जब उन्होंने महिलाओं की 55 किग्रा श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता. यह राष्ट्रमंडल खेलों में किसी महिला भारतीय पहलवान द्वारा जीता गया पहला स्वर्ण पदक था. छोटी बहन बबीता फोगाट ने तब 51 किग्रा में रजत पदक जीता था.
दो साल बाद गीता ने लंदन ओलंपिक 2012 में 55 किग्रा वर्ग में कैटगरी में क्वालिफाई करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं. वह राउंड ऑफ 16 में तीन बार की ओलंपिक पदक विजेता टोन्या वर्बीक से हार गईं और फिर कांस्य पदक के लिए रेपेचेज राउंड में हार गईं. हालांकि, कुछ महीने बाद, गीता फोगट ने अपना पहला विश्व चैंपियनशिप पदक 55 किग्रा कैटगरी में जीता. बबीता फोगाट ने भी 51 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता. ये 2012 की महिला विश्व चैंपियनशिप में भारत द्वारा जीते गए एकमात्र दो पदक थे.
2014 की शुरुआत में गीता फोगट के दाहिने घुटने में लिगामेंट के फटने के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और इस वजह से वह एक साल से ज्यादा समय तक खेल से बाहर रहीं. तब से उनका करियर चोटों से घिरा रहा है, जिसकी वजह से गीता फोगट नियमित रूप से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाईं.
Many Congratulations and Best Wishes 🇮🇳🧿💐#विनेश_फोगाट महिला कुश्ती में ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी।#GoForGold🥇 फ़ाइनल में जीत के लिए अनंत शुभकामनाएँ!#wrestling #VineshPhogat #Paris2024Olympic @Phogat_Vinesh pic.twitter.com/63KUK6l1RQ
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बबीता ने जीते कई मेडल्स
दूसरी और बबीता फोगाट ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में 55 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता और इसके बाद 2018 कॉमनवेल्थ में 53 किग्रा में रजत पदक जीता. वह 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई, लेकिन वह प्रोफेशनल रेसलर बनी रहीं.
गीता और बबीता की दो छोटी बहनें रितु और संगीता भी कई इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. रितु फोगाट ने 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2017 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. हालाँकि, उसके बाद से उन्होंने अपना ध्यान मिश्रित मार्शल आर्ट (MMA) पर केंद्रित कर लिया है. सबसे छोटी बहन संगीता फोगट एक पहलवान हैं, जिन्होंने कुछ स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. उनकी शादी टोक्यो 2020 के कांस्य पदक विजेता बजरंग पुनिया से हुई है.
अब विनेश फोगाट हैं फोगाट परिवार की ध्वजवाहक
विनेश फोगाट पर शुरू से ही अपने साथ फोगाट परिवार के सरनेम का दबाव बहुत ज्यादा, पर उन्होंने पेरिस ओलंपिक में इसका शानदार तरीके से इसका जवाब दिया है.विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता, विनेश इतिहास की सबसे सफल भारतीय पहलवानों में से एक हैं, लेकिन ओलंपिक खेलों में उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, पर अब वह यहां भी एक मेडल जीतने के काफी नजदीक हैं. प्रसिद्ध फोगाट बहनों में से एक विनेश ने रियो 2016 में महिलाओं की 48 किग्रा फ्रीस्टाइल श्रेणी में ओलंपिक में डेब्यू किया था, लेकिन घुटने में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें क्वार्टरफाइनल मुकाबले से हटना पड़ा था. टोक्यो 2020 में महिलाओं के 53 किग्रा क्वार्टर फाइनल में जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही विनेश को एक बार फिर क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा.
Vinesh Vinesh Vinesh
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देश की शान 👏🏽👏🏽👏🏽
फाइनल में पहुँच कर रचा इतिहास
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
True Champion 💪🙏
Olympic Silver Medal पक्का किया कल Gold Medal के लिए खेलेगी ✌️🙏🇮🇳
आज मेरे पिता का भी सपना पूरा हुआ बहुत ही भावुक करने वाले पल 😭🇮🇳🙏 @Phogat_Vinesh pic.twitter.com/Aty52c8HHv
ऐसे फोगाट सिस्टर्स बनी धाकड गर्ल्स
महावीर सिंह फोगट हरियाणा के भिवानी जिले के बलाली गांव के एक शौकिया पहलवान रहे, जो बाद में कुश्ती कोच बन गए. उनके पिता मान सिंह भी पहलवान थे. महावीर और उनकी पत्नी दया कौर के पाँच बच्चे हैं. इनमें गीता, बबीता, रितु और संगीता बेटी और सबसे छोटा बेटा दुष्यंत हैं. महावीर के भाई राजपाल की मौत के बाद उनकी बेटियों प्रियंका और विनेश का पालन-पोषण भी महावीर ने ही किया.
महावीर को अपनी बेटियों को रेसलर बनाने की कहानी तो वैसे दंगल मूवी में भी दिखाई जा चुकी है. लेकिन, इस बात की सबसे पहले प्रेरणा तब मिली, जब कर्णम मल्लेश्वरी 2000 में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. महावीर अपने कोच चंदगी राम से भी प्रभावित थे, जिन्होंने अपनी बेटियों को कुश्ती सिखाई थी. महावीर फोगाट की पत्नी दया कौर ने एक इंटरव्यू में कहा था- मैंने अपने पति से कहा कि लड़कियों को इस खेल में न धकेलें, मुझे चिंता थी कि वे कभी भी शॉर्ट्स पहनने वाले और बाल कटे हुए पहलवान के रूप में शादी कैसे करेंगी.
वहीं अपनी बेटियों को रेसलर बनाने के लिए ग्रामीणों के विरोध के बारे में, महावीर ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था- हर कोई कहता था कि मैं अपनी लड़कियों को प्रशिक्षित करके अपने गांव को बदनाम कर रहा हूं, लेकिन मैंने सोचा, अगर एक महिला देश की प्रधानमंत्री हो सकती है, तो वह पहलवान क्यों नहीं हो सकती है? चूंकि उनके गांव में कुश्ती को लेकर उचित सुविधाएं नहीं थीं, ऐसे में उनकी बेटियां लड़कों के खिलाफ कुश्ती करती थीं, बाद में महावीर ने गीता और बबीता को सोनीपत में भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र (SAI) में एडमिशन करवाया.
साक्षी ने 2016 रियो में जीता था ब्रॉन्ज
ओलंपिक की शुरुआत 1896 में हुई थी. पहले सीजन में रेसलिंग शामिल थी. मगर 1904 से कुश्ती को रेग्युलर रखा गया. मगर महिला रेसलर्स को ओलंपिक में 2004 से एंट्री मिली है. इसके बाद भारतीय पहलवान साक्षी मलिक ने 2016 रियो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. मगर अब विनेश ने फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है.