वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है. यह भारत के लिए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के ट्रैक एंड फील्ड कैटेगरी में पहला गोल्ड है. नीरज इस कैटेगरी में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. इससे पहले अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. जबकि नीरज ने 2022 चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था. हंगरी के बुडापेस्ट में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंम्पियनशिप में नीरज ने 88 मीटर से ज्यादा भाला फेंककर गोल्ड अपने नाम किया. ओलंपिक गोल्ड से लेकर वर्ल्ड चैंपियनशिप के गोल्ड तक, नीरज के पास अब सब कुछ है. दुआएं और मेहनत हिंदुस्तान के इस हीरो को कामयाबी के ऐसे शिखर पर पहुंचा चुकी हैं, जहां अब तक कोई भारतीय नहीं पहुंचा है.
अपनी इस कामयाबी पर नीरज चोपड़ा ने आजतक/इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा कि भले ही मैंने सभी प्रमुख प्रतियोगिताएं जीत ली हों, लेकिन मैं हमेशा अपने थ्रो को बेहतर कर सकता हूं ताकि वह हमेशा प्रेरक शक्ति बनी रहे. मैं इस गोल्ड से बहुत खुश हूं क्योंकि वर्ल्ड चैंपियनशिप में कॉम्पिटिशन के लेवल के कारण मैं इसे जीतना चाहता था. वर्ल्ड चैंपियनशिप में कॉम्पिटिशन ओलंपिक से भी बेहतर है. मुझे स्टेडियम में बड़ी संख्या में इंडियन फैन्स और जय हिंद के नारे लगाते लोगों को देखकर अच्छा लगा. मैं भी उनके साथ चिल्ला रहा था तो उससे मेरा गला खराब हो गया है.
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भारतीय एथलेटिक्स बढ़ रहा है और किशोर जेना और मनु को टॉप छह में देखकर अच्छा लगा. हम यहां से और बेहतर ही होंगे और उम्मीद है कि अगले ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन और भी बेहतर होगा. 90 मीटर का मार्क मेरे दिमाग में है लेकिन अब मुझे एहसास हुआ है कि जीतना ज्यादा महत्वपूर्ण है. पिछले दो साल से मैं इसके बारे में बहुत सोच रहा था. लेकिन अब मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचता, क्योंकि मुझे पता है कि यह एक दिन होगा, उम्मीद है कि जल्द ही होगा.
अरशद नदीम के साथ प्रतिद्वंद्विता पर कही ये बात
भारत-पाक प्रतिद्वंद्विता पर नीरज ने कहा कि लोगों ने अब मेरे और अरशद नदीम के बीच प्रतिद्वंद्विता पैदा करना शुरू कर दी है, लेकिन हम इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं. मैं कॉम्पिटिशन के दौरान अपने फोन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन आज मैंने इंटरनेट पर एक चीज देखी कि यह भारत बनाम पाकिस्तान है. इसलिए बाहर के लोग इसे प्रतिद्वंद्विता के रूप में बनाकर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन मैदान पर कई यूरोपीय थ्रोअर हैं, जिन्हें हराना बहुत मुश्किल है. मैं जानता हूं कि एशियाई खेलों से पहले लोग फिर से यह दबाव बनाने की कोशिश करेंगे लेकिन मैं इससे भी ठीक हूं.
उन्होंने कहा कि अरशद नदीम के साथ अच्छा तालमेल है, उनके लिए खुश हूं. फाइनल के बाद हमारी बातचीत हुई. वह खुश थे कि भारत और पाकिस्तान आगे बढ़ रहे हैं. यूरोपीय लोगों ने सर्किट पर इतना अच्छा दबदबा बना लिया है तो अच्छा है कि अब भारत और पाकिस्तान टॉप पर हैं.
पहले प्रयास में चूंकने पर बोले- मुझे विश्वास था बेहतर थ्रो कर सकता हूं
अपने पहले प्रयास में अंक चूकने पर उन्होंने कहा कि अपना ध्यान केंद्रित रखना और विश्वास रखना महत्वपूर्ण है. दूसरे थ्रो के बाद भी मैं खुद को आगे बढ़ा रहा था, मुझे विश्वास था कि मैं बेहतर थ्रो कर सकता हूं. मैं आखिरी थ्रो पर भी अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए हमेशा प्रेरित रहता हूं. मैंने यह सीखा है क्योंकि एशियाई एथलेटिक्स के दौरान भुवनेश्वर में मैं शुरुआत में बहुत अच्छा थ्रो नहीं कर रहा था, इसलिए मुझे विश्वास था और मैंने अपने आखिरी कुछ थ्रो में कॉम्पिटिशन को जीत लिया. मैं खुद को हर समय स्वस्थ रखने का इरादा रखता हूं और यही एक कारण है कि मैं अधिकांश टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हूं. इनमें से कुछ यूरोपीय थ्रोअर जानते हैं कि बड़े आयोजनों से पहले कैसे टॉप पर पहुंचना है, इसलिए मुझे हमेशा स्वस्थ रहना होगा और अपनी ट्रेनिंग जारी रखनी होगी.
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'मेरे लिए जान जेलेजनी सबसे बेहतर खिलाड़ी'
नीरज चोपड़ा ने कहा कि मैं ये नहीं कहूंगा कि मैं सबसे बेहतर हूं. सुधार की गुंजाइश है. मेरे लिए जान जेलेजनी सबसे बेहतर हैं. भारत में अपार संभावनाएं हैं, अब लोग काफी रुचि भी ले रहे हैं. मेरे दोस्त स्टेडियम में थे, उनकी आंखों में आंसू थे, मैंने सोचा कि मैं भावुक हो जाऊंगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मैं भावनाओं को नियंत्रित करना जानता हूं. यह बहुत गर्व का पल था. उम्मीद है, भविष्य में मेरे ऐसे कई प्रदर्शन (अच्छे थ्रो) होंगे और हम सभी एक साथ (मजाक में) रोएंगे.
बता दें कि जैवलिन थ्रो वर्ल्ड रिकॉर्ड की बात होने पर चेक गणराज्य के एथलीटों का नाम शीर्ष पर नज़र आता है. तीन बार के वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक चैंपियन, चेक गणराज्य के दिग्गज एथलीट जान जेलेजनी ने जर्मनी में एक एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान 1996 में 98.48 मीटर का थ्रो करके पुरुषों के भाला फेंक का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया था.
'फिर से गोल्ड जीतने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा'
उन्होंने कहा कि जैवलिन फेंकने वालों के पास फिनिशिंग लाइन नहीं होती. इसलिए यह हमेशा एक प्रेरणा कारक बना रहेगा. भले ही मैंने सभी प्रमुख प्रतियोगिताएं जीत ली हों, लेकिन मैं हमेशा अपने थ्रो को बेहतर कर सकता हूं ताकि वह हमेशा प्रेरक शक्ति बनी रहे. मुझे नहीं लगता कि हमें इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि हमने सभी मेडल जीते हैं, ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने बार-बार ऐसा किया है. मैं खुद को आगे बढ़ाऊंगा और कड़ी मेहनत करूंगा ताकि मैं इसे दोहरा सकूं और भारत को गौरवान्वित कर सकूं. यदि अधिक भारतीय एथलीट पोडियम पर मेरे साथ शामिल होंगे तो यह बहुत अच्छा होगा.