रूस और यूक्रेन के बीच इस वक्त युद्ध के हालात बन गए हैं. रूसी सेना ने यूक्रेन में प्रवेश कर लिया है और लगातार हवाई हमले भी किए जा रहे हैं. इस लड़ाई का असर हर क्षेत्र पर पड़ रहा है, दुनिया में अचानक खलबली मची है. इस बीच खेल जगत भी इससे अछूता नहीं है, क्योंकि इसी साल मई में फुटबॉल चैम्पियंस लीग का फाइनल रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में खेला जाना है.
ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों द्वारा रूस में फाइनल होने को लेकर आपत्ति जाहिर की गई है. हालांकि, यह पहले से ही तय था कि फाइनल सेंट पीटर्सबर्ग में होना है, लेकिन रूस-यूक्रेन के बीच बने ताज़ा हालात ने लोगों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है.
ये साल 2018 के बाद पहली बार हो रहा है जब खेल से जुड़ा कोई बड़ा इवेंट रूस में होने जा रहा है, लेकिन अब हालात तेज़ी से बदल गए हैं.
क्या रूस से बाहर जा पाएगा चैम्पियंस लीग फाइनल?
ब्रिटेन की चार टीमें चैम्पियंस लीग की टॉप 16 टीमों में शामिल है, ऐसे में सबसे ज्यादा दबाव उसकी ओर से ही है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन, वहां के खेल मंत्री समेत अन्य लोगों ने बयान दिया है कि किसी भी हालत में ऐसी स्थिति में चैम्पियंस लीग का फाइनल रूस में नहीं होना चाहिए.
हालांकि, ये इतना आसान भी नहीं है क्योंकि चैम्पियंस लीग के आयोजन का जिम्मा संभालने वाली UEFA ने कहा था कि वह अभी हालात पर नज़र रखेगी. साथ ही चैम्पियंस लीग के मुख्य स्पॉन्सर्स में रूस की एक गैस एजेंसी शामिल है, ऐसे में मेन स्पॉन्सर के यहां से ही इवेंट को हटाना भी मुश्किल है.
रूस की प्रमुख गैस कंपनी Gazprom चैम्पियंस लीग के मेन स्पॉन्सर में शामिल है. गुरुवार को जब रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया, उस वक्त भी चैम्पियंस लीग से जुड़े जो मैच दिखाए जा रहे थे उनमें इस कंपनी का विज्ञापन लगातार चल रहा था. यूक्रेन में भी ये प्रसारण हो रहा था, विरोध के बाद भी इसे बंद नहीं किया गया था.
मैचों का प्रसारण करने वाले चैनल BT Sport ने भी अपने बयान में साफ कहा है कि हम कॉन्ट्रैक्ट के तहत बंधे हुए हैं, ऐसे में हम लगातार Gazprom का विज्ञापन दिखाते रहेंगे जबतक में UEFA की ओर से कोई आदेश नहीं आता है. Gazprom की ओर से चैम्पियंस लीग में सालाना 45.5 मिलियन डॉलर का निवेश किया जाता है.
चैम्पियंस लीग का फाइनल 28 मई, 2022 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में होगा. जिस मैदान में ये फाइनल होना है उसका नाम भी Gazprom पर ही है.