फ्रांस की राजधानी पेरिस शहर 33वें ओलंपियाड के जश्न में रात को जगमगा उठा. 2024 ओलंपिक खेलों का उद्घाटन समारोह पहली बार स्टेडियम के बाहर हुआ. सीन नदी के किनारे लाइट शो, आतिशबाज़ी और लाइव प्रदर्शन ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कलाकार सेलीन डायोन ने एफिल टॉवर के ऊपर से गीतकार एडिथ पियाफ़ को श्रद्धांजलि दी, लेकिन ओलंपिक कॉल्ड्रन (ओलंपिक की कड़ाही) ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.
इसके डिजाइन में क्या खास है?
परंपरागत रूप से ओलंपिक कॉल्ड्रन खेल के समय किसी आयोजन स्थल या आमतौर पर मुख्य स्टेडियम में या उसके आस-पास किसी प्रमुख स्थान पर जमीन पर रखी जाती है. हालांकि, पेरिस ओलंपिक कॉल्ड्रन के हॉट एयर बैलून डिजाइन का मतलब है कि भले ही इसका स्थान स्थिर हो, लेकिन ओलंपिक लौ बिल्कुल भी स्थिर नहीं है.
आयोजकों का कहना है कि दिन के दौरान कॉल्ड्रन शहर के ट्यूलरीज़ गार्डन में जमीन पर होगी, लेकिन शाम के समय इसे एक जगह पर बांध दिया जाएगा और 30 मीटर हवा में ऊपर उठाया जाएगा.
कॉल्ड्रन खुद 30 मीटर ऊंची है, जिसका मतलब है कि इसका सबसे ऊंचा बिंदु जमीन से 60 मीटर ऊपर है. इसके बेस के चारों ओर 7 मीटर व्यास का एक घेरा है. जिसका उद्देश्य भाईचारा है, जो फ्रांसीसी गणराज्य के तीन मुख्य मूल्यों में से एक है, जिसमें ओलंपिक लौ खुद रखी जाती है.
कॉल्ड्रन कैसे करती है काम?
पेरिस 2024 ओलंपिक लौ का डिजाइन पिछले खेलों से बहुत अलग है. क्योंकि इसे जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) के बजाय बिजली से चलाया जाता है. फिर सवाल है कि यह जलता कैसे है? गुब्बारे के बेस पर रिंग में 40 LED लाइट्स हैं जो 200 हाई प्रेशर वाले मिस्टिंग नोजल की ओर से वाटर वेपर के बादल को रोशन करती हैं, जिससे वास्तविक लपटों का टिमटिमाना और धुंआ जैसा प्रभाव मिलता है.
इसको बनाने वाले लेहनूर ने कहा, 'यह अनोखा कौल्ड्रॉन उस भावना से जुड़ा है जो मैं ओलंपिक और पैरालंपिक को देना चाहता था.'
बिजली और पानी की आपूर्ति जमीन से हवा में गुब्बारे की स्ट्रक्चर तक पहुंचाई जाती है, जिसे पेरिस 2024 के भागीदार EDF की ओर से संचालित किया जाता है. EDF के अध्यक्ष और सीईओ ल्यूक रेमोंट ने कहा, 'EDF के एक इनोवेशन की बदौलत, पेरिस 2024 का कोल्ड्रॉन पहली बार 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक लौ से चमकेगा.' उन्होंने कहा, यह 'इलेक्ट्रिक क्रांति' हमारी टीमों और डिजाइनर मैथ्यू लेहनूर की बदौलत संभव हुई है.