विनेश फोगाट
21 वर्ष, कुश्ती
महिला फ्रीस्टाइल, 48 किलो वर्ग
कैसे क्वालीफाइ कियाः 7 मई, 2016 को इस्तांबुल में विश्व ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता
उपलब्धियां: कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक, एशियाई खेलों में कांस्य पदक
सिर्फ मेडल की भूख है," छोटे कद की चैंपियन कड़े प्रशिक्षण और वर्जिश में घंटों बिताने के बावजूद आज फिर नाश्ते से परहेज करती हैं.
हरियाणा की मशहूर फोगाट बहनों में सबसे छोटी और सबसे होनहार 21 वर्षीया विनेश फोगाट का सारा ध्यान ''सोने के पदक" पर टिका है और वे रियो के लिए भारतीय कुश्ती टीम की सबसे बड़ी उम्मीद हैं. उनकी आंखों में हमेशा स्वर्ण पदक जीतने का ख्वाब तैरता रहता है, और यह उन्हें खूब मेहनत करने के लिए प्रेरित भी करता है. आत्मविश्वास से भरपूर वे जोश से लबरेज होकर कहती हैं, ''पदक लाऊंगी, नहीं तो भारत वापस नहीं लौटूंगी." कुश्ती के मशहूर उस्ताद महावीर फोगाट, जिनकी जिंदगी से प्रेरित होकर दंगल फिल्म बन रही है और जिसमें आमिर खान उनका किरदार परदे पर उतार रहे हैं, की भतीजी की रगों में कुश्ती रची-बसी है और कुश्ती ही उनके लिए सब कुछ है. विनेश को याद नहीं कि उन्होंने कुश्ती से अलग कभी कुछ किया हो. मस्ती के लिए कुश्ती करने से लेकर कुश्ती चैंपियन बनने के पूर्वनिर्धारित भविष्य की राह पर वे स्वाभाविक रूप से बढ़ती चली गई थीं.
वे कहती हैं, ''मैं सिर्फ चार, शायद पांच साल की थी जब ताऊजी ने मुझे मेरे भाई-बहनों और चचेरे भाइयों के साथ कुश्ती अखाड़े में उतार दिया था." इनमें छह बहनें—गीता, बबीता, प्रियंका, रितु, विनेश और संगीता और 15 चचेरे भाई शामिल थे.
हरियाणा के कठोर पितृसत्तात्मक, जाट-बहुल भिवानी जिले में फोगाट उदार विचारधारा के लोग हैं जो अपनी औरतों और विनेश जैसी युवा लड़कियों को खास तौर पर पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान खेल आजमाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. वे अपनी बेटियों को किन्हीं मायनों में बेटों से कम नहीं मानते और समान परवरिश करते हैं.
विनेश फोगाट कहती हैं, ''मैंने गांव के दंगलों में लड़कियों से ज्यादा लड़कों से मुकाबला किया है." वे बताती हैं कि कैसे उन्हें अखाड़े की मिट्टी, धूल-पसीने, चोट, कड़े प्रशिक्षण और दुखते शरीर से प्यार हो गया था. वही मेहनत रंग लाई और आज वे इस खेल की सरताज बन चुकी हैं और देश के जाने-माने पहलवानों में अपनी जगह बना चुकी हैं.
लेकिन अभी कुछ समय पहले तक उनका मन आशंकित रहता था. अप्रैल में मंगोलिया के उलानबातर में वल्र्ड क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में उन्हें 400 ग्राम वजन अधिक होने की वजह से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. ऐसा लगा कि उनका ओलंपिक का सपना परवान चढऩे से पहले ही चकनाचूर हो जाएगा, लेकिन सौभाग्य से उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था. उन्होंने फिर दिन-रात एक कर दिया और जीतोड़ मेहनत की. एक महीने बाद वे इस्तांबुल में अगले विश्व क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में उतरीं और स्वर्ण पदक प्राप्त किया, साथ ही रियो के लिए ओलंपिक कोटा भी हासिल किया.
भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआइ) के प्रशिक्षण केंद्र पर ब्राजील के रियो जाने वाले पहलवानों के बीच विनेश अपने 48 किलो वर्ग मुकाबले के लिए जबरदस्त तैयारी में व्यस्त हैं. हरियाणवी पहलवानों के पारंपरिक दूध-मक्खन-तेल वाले पोषक आहार की ओर इशारा करके शरारती मुस्कान से विनेश कहती हैं, ''मुझे ज्यादा घी नहीं खाना." विनेश दोपहर को बहुत हल्का भोजन लेती हैंरू छाछ और दाल की एक छोटी कटोरी के साथ एक चपाती. वे कहती हैं, ''इन दिनों मेरा मेटाबॉलिज्म कुछ ठीक नहीं. पानी पीने से भी वजन बढ़ रहा है." लेकिन इन बातों से ओलंपिक पर सधा उनका निशाना नहीं डगमगाता और वे अञ्जयास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती हैं.
विनेश फोगाट को इस बात का पूरा विश्वास है कि वे पदक जरूर जीतेंगी. उनका सारा ध्यान चमचमाते स्वर्ण पदक पर टिका है. उनका मानना है कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान अंतिम दौर की कुश्ती अब तक का सबसे कड़ा मुकाबला रही, जिसमें उन्हें कड़े मुकाबले से गुजरना पड़ा था. उस मौके को याद करते हुए उनके चेहरे पर हल्का-सा तनाव आ जाता है ''मैं बहुत दबाव में थी." हालांकि तुरंत ही गले पर सजे स्वर्ण पदक की याद उनके चेहरे पर वही आत्मविश्वास भरी मुस्कान बिखेर देती है.
वे यह सब कैसे कर लेती हैं? अनुशासित आहार और कड़े प्रशिक्षण के बाद मुकाबले के लिए उतरते समय वे हमेशा भगवान को याद करती हैंरू ''कुश्ती के मुकाबले के लिए मुझे हमेशा भजन से शक्ति मिलती है. मौन प्रार्थना मुझे शांत और मजबूत रहने में मदद करती है." कुश्ती की महारथी आजकल अपनी बात खत्म करते समय हमेशा यही कहती हैं, ''मेरे लिए दुआ कीजिए. दुआ में भगवान बसता है."