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संग्रहालयों के द्वारा जाने दिल्‍ली के इतिहास के बारे में

राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान अगर आप दिल्‍ली में पर्यटन के साथ कुछ नई चीजों की जानकारी लेना चाहते हैं तो आपकों हम बताते हैं उन संग्रहालयों और उन बाजारों के बारे में जो आपकी जानकारी के साथ ही आपका मनोरंजन भी कराएंगी.

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राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान अगर आप दिल्‍ली में पर्यटन के साथ कुछ नई चीजों की जानकारी लेना चाहते हैं तो आपकों हम बताते हैं उन संग्रहालयों और उन बाजारों के बारे में जो आपकी जानकारी के साथ ही आपका मनोरंजन भी कराएंगी.
प्रमुख संग्रहालय...

क्राफ्ट म्यूजियम
क्राफ्ट म्यूजियम प्रगति मैदान में स्थित दिल्ली का प्रमुख पर्यटक स्थल है. इस संग्रहालय में भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को प्रदर्शित किया गया है. देश के विभिन्नस राज्योंष की सांस्कृतिक झलक यहां देखी जा सकती है. इस जगह देश के विभिन्न भागों से आए शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं. इस संग्रहालय में देशभर से लाए गए दुर्लभ कला और हस्त शिल्प का विस्तृदत संग्रह है. यहां आदिवासी और ग्रामीण शिल्प,कपड़ों आदि से संबंधित अलग-अलग दीर्घाएं हैं. क्राफ्ट म्यूजियम में क्राफ्ट म्यूजियम शॉप भी है. संग्रहालय और शिल्पकारों से पूजा का सामान, गहने, शॉल और किताबें खरीदी जा सकती हैं.
समय: जुलाई से सितंबर सुबह 9.30-शाम 5 बजे तक अक्टूबर से जून सुबह 9.30-शाम 6 बजे तक, सोमवार और राष्ट्रीय नोट: अवकाश के दिन बंद

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राष्ट्रीय संग्रहालय
1960 में निर्मित इस संग्रहालय में भारतीय सभ्यता के विकास से संबंधित चीजों को प्रदर्शित किया गया है. इसमें से कुछ चीजें प्रागेतिहासिक काल की हैं. यहां चोल काल के पत्थर और कांसे से बनी मूर्तियां रखी हुई हैं. यहां विश्वि के सर्वाधिक लघु चित्रों का संग्रह है. इसके अलावा घर की सजावट और गहनों का प्रदर्शित करती दीर्घाएं भी यहां हैं. इस राष्ट्रीय संग्रहालय में एक संरक्षण प्रयोगशाला है. इस प्रयोगशाला में अनेक कलाकृतियों को संभाल कर रखा जाता है और छात्रों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

भारतीय रेल संग्रहालय
दक्षिण दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित रल संग्रहालय भारतीय रेल के 140 साल के इतिहास की झलक प्रस्तुत करता है. विभिन्न प्रकार के रेल इंजनों को देखने के लिए देश भर से लाखों पर्यटक यहां आते हैं. यहां पर रेल इंजनों के अनेक मॉडल और कोच हैं जिसमें भारत की पहली रेल का मॉडल और इंजन भी शामिल हैं. इसका निर्माण ब्रिटिश वास्तुकार एम जी सेटो ने 1957 में किया था. 10 एकड़ में फैले इस संग्रहालय में एक टॉय रेल भी है जहां सैर का आनंद लिया जा सकता है. इसके अलावा यहां रेस्टोरेंट और बुक स्टॉल है. तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन भी यहां किया गया है.
समय: गर्मियों में सुबह 9.30-शाम 7 बजे तक, सर्दियों में सुबह 9.30-शाम 5 बजे तक

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डॉल म्यूगजियम
इस संग्रहालय की स्था‍पना मशहूर कार्टूनिस्टर के.शंकर पिल्लई ने की थी. यहां विभिन्न परिधानों में सजी गुडि़यां का संग्रह विश्व के सबसे बड़े संग्रहों में से एक है. यह संग्रहालय बहादुर शाह जफर मार्ग पर चिल्ड्र न बुक ट्रस्टव की बिल्डिंग में स्थित है. यह संग्रहालय दो हिस्सों में बंटा है. एक हिस्से में यूरोपियन देशों, इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, राष्ट्रमंडल देशों की गुडि़यां रखी गई हैं. दूसरे भाग में एशियाई देशों, मध्यइ पूर्व, अफ्रीका और भारत की गुडि़यां प्रदर्शित की गई हैं. वर्तमान समय में यहां 85 देशों की करीब 6500 गुडि़यों का संग्रह देखा जा सकता है.
समय: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक, सोमवार को बंद{mospagebreak}


दिल्‍ली के बाज़ार...

चांदनी चौक
दिल्ली आने वाले किसी भी व्यक्ति की यात्रा तब तक पूरी नहीं हो सकती जब तक वह चांदनी चौक न जाए. यह दिल्ली के थोक व्‍यापार का प्रमुख केंद्र है. पुराने समय में तुर्की, चीन और हॉलैंड के व्यापारी यहां व्यावपार करने आते थे. यह मुगलकाल में प्रमुख व्‍यवसायिक केंद्र था. इसका डिजाइन शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम ने बनाया था. यहां की गलियां संकरी हैं. इसलिए यहां गा‍ड़ी लेकर न आने की सलाह दी जाती है.

कनॉट प्लेस
कनॉट प्लेनस दिल्ली का प्रमुख व्‍यवसायिक केंद्र है. इसका नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था. इस मार्केट का डिजाइन डब्यू एच निकोल और टॉर रसेल ने बनाया था. यह मार्केट अपने समय की भारत की सबसे बड़ी मार्केट थी. अपनी स्थापना के 65 साल बाद भी यह दिल्ली में खरीदारी का प्रमुख केंद्र है. यहां के इनर सर्किल में लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्टोररेंट और बार हैं. यहां किताबों की दुकानें भी हैं जहां आपको भारत के बारे में जानकारी देने वाली बहुत अच्छीद किताबें मिल जाएंगी.

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जनपथ और पालिका बाजार
बंटवारे के बाद यहां आए शरणार्थियों और तिब्बंती शरणार्थियों ने यहां अपनी दुकानें बनाकर इस मार्केट को बसाया. यहां आपको सस्ते कपड़े मिल जाएंगे लेकिन इसके लिए मोल भाव करना आना चाहिए. जनपथ में सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एंपोरियम है. इसके पास ही जवाहर व्‍यापार भवन है जहां भारतीय हस्तशिल्प का सामान देखा और खरीदा जा सकता है. पालिका बाजार भूमिगत बाजार है. यहां करीब 400 दुकानें हैं जहां कम कीमत पर कपड़े और बिजली का सामान मिल जाता है लेकिन यहां भी बहुत मोल भाव करना पड़ता है.

दिल्ली हॉट
दिल्ली हॉट एम्स से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है. यहां पर आकर संपूर्ण भारत के एक साथ दर्शन हो जाते हैं. यहां पर भारत के विभिन्न प्रांतों के हस्तपशिल्प को प्रदर्शित करती दुकानें हैं. दक्षिण भारतीय व्यंजन से लेकर सुदूर उत्‍तर पूर्व के खाने के स्टॉल भी यहां मिल जाते हैं. यहां समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है. यहां आप नृत्‍य और संगीत का भी आनंद उठा सकते हैं.

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