2007 की बात है. भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप के पहले ही दौर में बाहर हो गई थी. जाहिर है, इससे क्रिकेट प्रेमी सदमे में थे. सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन इस वक्त 7 साल के थे. भारतीय टीम के बाहर होने की निराशा चारों ओर थी और इसका असर बच्चों पर भी था. इसी दौरान अर्जुन के सामने उसके एक क्लासमेट ने कहा कि भारतीय टीम की हार के लिए सचिन तेंदुलकर जिम्मेदार हैं. अर्जुन इस बात से इतने नाराज हो गए कि उस बच्चे को मुक्का दे मारा और दोबारा ऐसा न कहने की चेतावनी भी दे डाली.
जाहिर है अपनी उम्र की वजह से अर्जुन तब उम्मीदों के उस बोझ को समझने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे. सचिन ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया था, 'हमने अर्जुन से कहा था कि उसके स्कूल में अगर कोई वर्ल्ड कप से टीम के बाहर होने के बारे में कमेंट करता है तो उसे इग्नोर करना चाहिए.'
लेकिन जब उसके एक दोस्त ने उससे कहा कि तुम्हारे पिता के जीरो पर आउट होने की वजह से भारत हार गया, तो उसने आपा खो दिया. वह हमारी सलाह भूल गया और उसने अपने दोस्त को मुक्का दे मारा और उसे दोबारा ऐसा न कहने को कहा. उस समय रिपोर्टरों ने उससे भी सवाल पूछे थे.
सचिन तेंदुलकर की ऑटोबायोग्राफी 'प्लेइंग इट माय वे' हाल ही में रिलीज हुई है. रिलीज के कुछ दिनों में ही इसने बिक्री के रिकॉर्ड बनाए हैं. सचिन ने कहा, 'अर्जुन के साथ यह अन्याय है. अब उसे किसी भी 15 साल के लड़के की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए. लोगों को उसे एक इंडिविजुअल के तौर पर जज करना चाहिए और उसकी तुलना नहीं करनी चाहिए.'