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जल्दबाजी में नहीं लूंगा संन्यासः सचिन तेंदुलकर

जहां एक ओर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के संन्यास की अटकलों से बाजार गर्म है वहीं दूसरी ओर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने की कोई जल्दी नहीं है.

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सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर

जहां एक ओर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के संन्यास की अटकलों से बाजार गर्म है वहीं दूसरी ओर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने की कोई जल्दी नहीं है.

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संन्यास के बारे में पूछे जाने पर तेंदुलकर ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि फिलहाल मुझे ऐसा कुछ करने की जरूरत है.’ एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘जल्दबाजी की क्या जरूरत है.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा एक फार्मूला रहा है, काफी आगे के बारे में मत सोचो. मैं अपने करियर में इसी तरह चला हूं.’

बीसीसीआई ने दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज का इंतजाम किया है जिससे अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि ऐसा तेंदुलकर को घरेलू सरजमीं पर उपलब्धि हासिल करने का मौका देने और उन्हें भव्य विदाई देने के लिए किया गया है.

तेंदुलकर ने 24 साल के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान विश्व क्रिकेट में सर्वाधिक 51 शतक की मदद से 53.86 की औसत से सर्वाधिक 15837 टेस्ट रन बनाए.

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इस स्टार बल्लेबाज ने पिछले साल एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी. उन्होंने 463 मैचों में 49 शतक की मदद से 44.83 की औसत के साथ सर्वाधिक 18426 रन बनाए.

खेल के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में शामिल तेंदुलकर को उनके लाखों प्रशंसकों ने ‘क्रिकेट के भगवान’ की उपमा दी लेकिन मुंबई के इस दिग्गज बल्लेबाज ने कहा कि वह सिर्फ एक क्रिकेटर हैं जो गलतियां करता है जबकि भगवान ऐसा नहीं करते.

तेंदुलकर ने कहा, ‘मैं भगवान नहीं हूं. मैं सिर्फ क्रिकेट खेलता हूं. ऊपर वाले की दुआ है, अब तक जो भी मेरे जीवन में आया उसका शुक्रिया. हम सभी गलतियां करते हैं. अगर मैं गलतियां नहीं करता तो कभी आउट ही नहीं होता. मैं सिर्फ अपना खेल खेलता हूं.’

तेंदुलकर को 1999 में मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा जब उनके पिता रमेश तेंदुलकर का अचानक निधन हो गया. यह बल्लेबाज उस समय इंग्लैंड में विश्व कप में खेल रहा था. यह दिग्गज बल्लेबाज अंतिम संस्कार के लिए स्वदेश आया और तीन दिन बाद इंग्लैंड लौटकर कीनिया के खिलाफ 140 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई.

तेंदुलकर ने कहा, ‘मुझे मेरे पिता की कमी खलती है. मैंने 1999 में अपने पिता को गंवा दिया. अब काफी समय बीत चुका है. इसके बाद काफी चीजें हो चुकी हैं और मुझे उनकी कमी खलती है.’

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