scorecardresearch
 

समापन समारोह में भारत ने मार्शल आर्ट से किया खेल भावना को सलाम

विभिन्न देशों के करीब सात हजार एथलीटों के बीच मैदानी जंग के बाद भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में तीन हजार साल से भी अधिक पुराने अपने तेजस्वी और जुनूनी मार्शल आर्ट के जरिये खेल भावना का परिचय दिया.

Advertisement
X

Advertisement

विभिन्न देशों के करीब सात हजार एथलीटों के बीच मैदानी जंग के बाद भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में तीन हजार साल से भी अधिक पुराने अपने तेजस्वी और जुनूनी मार्शल आर्ट के जरिये खेल भावना का परिचय दिया.

भारतीय खेल भावना के सम्मान में ‘अग्नि..द ग्लोरी आफ स्पोर्ट्स’ में जब तीन हजार बरस से भी अधिक पुराने देश के आठ मार्शल आर्ट प्रारूपों को पेश किया गया तो खचाखच भरे स्टेडियम में दर्शकों में नया जोश भर गया.

इस कार्यक्रम की शुरूआत शरीर का निर्माण करने वाले पंचतत्वों में से एक अग्नि के श्लोकों के साथ हुई जिसके समाप्त होने पर समापन समारोह के स्थल जवाहर नेहरू स्टेडियम के बीचों बीच अग्निवष्रा का अद्भुत नजारा पेश किया गया.

इसके बाद मार्शल आर्ट कलाकारों ने अपनी जांबाज प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया. इस दौरान दर्शकों को भारत के सबसे पुराने मार्शट आर्ट प्रारूपों में से एक कलारियापट्टू और नगा योद्धाओं के कौशल को देखने का मौका मिला जबकि अखाड़ा संस्कृति और तलवारबाजी का नजारा भी पेश किया गया. थंग्टा, गटका, सिलमबम और धान पट्टा योद्धओं ने भी अद्भुत समा बांध दिया.

Advertisement

कलारियापट्टू संभवत: भारत का सबसे पुराना मार्शल आर्ट प्रारूप है जिसकी उत्पत्ति तीन हजार वर्ष से भी पहले हुई और यह केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में खूब फला फूला जबकि सूर्यवंशियों का हिस्सा रहे नगा योद्धाओं ने देश के विभिन्न हिस्सों पर राज किया.{mospagebreak}

मार्शल आर्ट के थंग्टा, गटका, तलवारबाजी और सिलंबम प्रारूपों में हथियारों का इस्तेमाल होता है जबकि अखाड़ा में तंदरुस्ती के लिए व्यायाम को तरजीह दी जाती है तथा मलखंभ और कुश्ती इसका अहम हिस्सा है.

थंग्टा परंपरा की शुरूआत मणिपुर में हुई. मणिपुरी में थंग का अर्थ होता है तलवार जबकि टा का मतलब होता है भाला यानी तलवार और भाले का संगम. इस युद्धकला का पहला प्रमाण 17वीं शताब्दी में देखने को मिलता है जब विवाद या मतभेद होने पर योद्धा एक दूसरे से भिड़ते थे.

गटका की शुरूआत पंजाब के सिखों ने की और इसमें तलवार के अलावा लाठियों का भी इस्तेमाल होता है. सिलंबम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में काफी लोकप्रिय हुआ और इसमें लाठी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाता है जबकि महाराष्ट्र में जन्म लेने वाले धान पट्टा में तलवार, ढाल और कुलहाड़ी का इस्तेमाल करके योद्धा अपने कौशल की बानगी बेश करते हैं.

Advertisement
Advertisement