सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई टाल दी.
न्यायालय ने कहा कि उसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुकुल मुद्गल की जांच रिपोर्ट को देखा नहीं है. न्यायाधीश एके पटनायक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए अब 25 मार्च की तारीख तय की है.
सर्वोच्च न्यायालय ने मुद्गल की अध्यक्षता में बीते साल के आईपीएल कांड की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इसमें एडिशन सॉलिसिटर जनरल एन. नागेश्वर राव और असम क्रिकेट संघ (एसीए) के सदस्य निलय दत्ता शामिल हैं. निलय एक सीनियर वकील हैं.
बीसीसीआई ने अपने जवाब में अदालत से कहा कि वह फ्रेंचाइजी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नियमों के दायरे में ही कर सकता है. बोर्ड ने कहा कि इंडिया सीमेंट्स की मालिकाना हक वाली चेन्नई सुपर किंग्स के प्रींसिपल रहे गुरुनाथ मयप्पन को लेकर मुद्गल और दत्ता ने अलग-अलग राय व्यक्त की है.
मुद्गल ने अपनी रिपोर्ट में मयप्पन को आईपीएल सट्टेबाजी कांड में शामिल बताया है. मुद्गल ने साथ ही इंडिया सीमेंट्स पर बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधी इकाई के साथ नहीं चलने का भी आरोप लगाया है.
आईपीएल सट्टेबाजी मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इनमें से एक मयप्पन बीसीसीआई प्रमुख एन. श्रीनिवासन के दामाद हैं. इसके अलावा इस मामले में राजस्थान रॉयल्स के कई खिलाड़ियों के साथ-साथ राजस्थान रॉयल्स टीम के सहमालिक राज कुंद्रा भी आरोपी हैं.