scorecardresearch
 

गरीबी से जूझ रही है ये महिला खिलाड़ी, सरकार से है मदद का इंतजार

स्वप्ना बेहद गरीब परिवार से आती हैं. उनकी मां के पास इतने पैसे तक नहीं को वो अपनी बेटी को पोषक खुराक दे सकें. जितनी कि एक खिलाड़ी को जरुरत होती है. बावजूद इसके उन्हें अपनी बेटी पर भरोसा है कि वो एक दिन दुनिया में देश का नाम रोशन करेंगी.

Advertisement
X
स्वप्ना बर्मन
स्वप्ना बर्मन

Advertisement

गरीबी से भारतीय खेलों का नाता बेहद पुराना है. भुवनेश्वर में हाल ही में खत्म हुई एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की हेप्टाथलीट स्वप्ना बर्मन बेहद ही खराब हालात से जूझकर आगे बड़ी. उनके पिता पंचानन रिक्शा चालक हैं. वो लकवा के कारण वो लंबे समय से बिस्तर में हैं और मां मजदूरी करके पैसा कामाती है.

पोषक खुराक खाने तक के पैसे नहीं

स्वप्ना बेहद गरीब परिवार से आती हैं. उनकी मां के पास इतने पैसे तक नहीं को वो अपनी बेटी को पोषक खुराक दे सकें. जितनी कि एक खिलाड़ी को जरुरत होती है. बावजूद इसके उन्हें अपनी बेटी पर भरोसा है कि वो एक दिन दुनिया में देश का नाम रोशन करेंगी. चाय के बागान में मजदूरी करने वाली मां बासाना अपनी बेटी स्वप्ना की प्रैक्टिस और पढ़ाई का पूरा ख्याल रखती है. वह रोज साइकिल से अपनी बेटी को प्रैक्टिस के लिए लेकर जाती है.

Advertisement

हेप्टाथलन में जीता गोल्ड मेडल

एशियाई एथलेटिक्स चैंपियशिप में महिलाए की हेप्टाथलन में स्वप्ना ने पहला हासिल किया. उन्होंने 5942 के अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीता. जापान कीमेंग हेमिफिल को दूसरा और भारत की ही पूर्णिमा हेम्बरम ने तीसरा स्थान मिला.

नौकरी मिलने से सुधरेंगे हालात

गोल्ड मेडल जीतने के बाद स्वप्ना और उनके परिवार को उम्मीद है कि अब जल्द ही उन्हें नौकरी मिलेगी और घर के हालात ठीक हो जाएंगे. मां को मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी और पिता का इलाज भी अच्छे से हो सकेगा.

 

 

Advertisement
Advertisement