टीम इंडिया के 'प्रिंस' युवराज सिंह ने कहा कि निजी तौर पर उन्हें वनडे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर की कमी बहुत खलेगी और साथ ही युवी ने कहा कि मास्टर ब्लास्टर उनके लिए 'बड़े भाई' जैसे हैं.
युवी ने कहा कि वह सचिन तेंदुलकर को हमेशा बड़े भाई के रूप में देखते हैं और वनडे क्रिकेट से उनके संन्यास ने उन्हें दुखी कर दिया है. युवी के मुताबिक, ‘निजी तौर यह मेरे लिए काफी दुख की बात है कि वह अब वनडे ड्रेसिंग रूम में नहीं होंगे. निश्चित तौर पर एक महान खिलाड़ी वनडे क्रिकेट को छोड़ गया. मुझे निजी तौर पर उनकी काफी कमी खलेगी.’
उन्होंने कहा, ‘उनके रिकॉर्ड के बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है. अगर हम इस बारे में बात करेंगे तो इसे पूरा होने में कम से कम एक साल लग जाएगा. वह ऐसे व्यक्ति है जिन्हें मैं बड़े भाई के रूप में देखता हूं.’
युवराज से साल 2011 के बारे में पूछा गया जब टीम इंडिया ने विश्व कप जीता और उन्हें फेफड़ों के बीच कैंसर का पता चला, तो उन्होंने कहा, ‘2011 भारतीय क्रिकेट के लिए अहम रहा क्योंकि हमने विश्व कप जीता.’
उन्होंने कहा, ‘इस साल का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता था. एक तरफ तो विश्व कप जीतने का जश्न था तो दूसरी तरफ कैंसर का पता चला. इससे उबरना मुश्किल था. मुझे गर्व है कि मैं ऐसा करने में सफल रहा.’
युवराज ने कहा कि 2013 उनके लिए महत्वपूर्ण साल होगा. उन्होंने कहा, ‘2013 रोचक साल होगा. यह साबित करेगा कि क्या मैं उस तरह प्रदर्शन कर पाऊंगा जिस तरह करता था. मुझे अपने प्रदर्शन को बेहतर करने की उम्मीद है. इस चरण से बाहर निकलने में मैंने कड़ी मेहनत की है.’
वहीं सात बार के टूर डि फ्रांस चैंपियन रहे लांस आर्मस्ट्रांग पर डोपिंग का दाग लगने के बावजूद युवी का इस अमेरिकी साइकिलिस्ट के प्रति नजरिया नहीं बदला है. आर्मस्ट्रांग पर शक्तिवर्धक दवाओं के इस्तेमाल के लिए प्रतिबंध लगा है.
कैंसर की बीमारी से संघर्ष के बाद क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने वाले युवराज ने कहा, ‘मैंने उसके बारे में सब कुछ पढ़ा है. मैं उन्हें नये साल पर संदेश भेजा कि वह हमेशा मेरे हीरो रहेंगे फिर दुनिया चाहे कुछ भी कहे.’
उन्होंने कहा, ‘कैंसर से वापसी करते हुए इतना कुछ हासिल करना उसे महान बनाता है. वह आदर्श है, आपने काल्पनिक कथाओं में सुपर हीरो देखे होंगे. वह असल जिंदगी का हीरो है.’
अमेरिकी डोपिंग रोधी संस्था ने कहा था कि आर्मस्ट्रांग व्यवस्थित डोपिंग कार्यक्रम का हिस्सा रहे जिसके बाद उनके सातों टूर डि फ्रांस खिताब छीन लिए गए और उन्होंने अपने अधिकांश प्रायोजक गंवा दिए.