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83 के चैंपियंस होटल में खुद धोते थे कपड़े, वर्ल्ड चैंपियन मदनलाल ने बताई पूरी कहानी

1983 में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व क्रिकेटर मदनलाल ने आजतक से अपना तब का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि एक दौर था कि हमें मैच ही नहीं बल्कि प्रैक्टिस में भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. यहां तक की वर्ल्डकप के दौरान होटल में कपड़े भी खुद धोते थे. 

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1983 विश्वकप विजेता टीम में शामिल रहे पूर्व क्रिकेटर मदनलाल, तब कैप्टन रहे कपिलदेव
1983 विश्वकप विजेता टीम में शामिल रहे पूर्व क्रिकेटर मदनलाल, तब कैप्टन रहे कपिलदेव

मुंबई में भारतीय क्रिकेट टीम का स्वागत जोर-शोर से किया जा रहा है. फैंस का सैलाब उमड़ आया है. इस दौरान टी-20 विश्वकप के बीच से हैरान करने वाली जानकारी निकलकर सामने आई है. ये जानकारी ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) की बदइंतजामी को लेकर है. सामने आया है कि खिलाड़ियों को मैच में ठंडा खाना परोसा गया. इसी बीच 1983 की विश्वकप विजेता टीम में शामिल रहे क्रिकेटर मदनलाल ने भी चौंकाने वाली सच्चाई बताई कि, उस दौरान खिलाड़ी होटल में खुद ही कपड़े धोते थे.  

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BCCI को भी खेल से जुड़े इंतजाम में करना पड़ता था संघर्ष
जब 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम ने कपिलदेव की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता था, और खिलाड़ी जब जीत कर देश लौटे थे, तब एक अलग माहौल था. खिलाड़ियों को न सिर्फ खेल के लिए संघर्ष करना पड़ता था, बल्कि बीसीसीआई को भी खेल से जुड़े इंतजाम करने के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते थे. खिलाड़ियों को देने के लिए बीसीसीआई के पास पैसे नहीं थे. तब लता मंगेशकर से कॉन्सर्ट कराया गया और उससे जो पैसे इकट्ठे हुए, उससे खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपये दिए गए थे. 

आज विश्व भर में हो रही है 125 करोड़ के इनाम की चर्चा
एक आज का दिन है कि बीसीसीआई की ओर से खिलाड़ियों को 125 करोड़ का इनाम देने की घोषणा की गई है तो विश्व भर में इसकी चर्चा हो रही है. ये उदाहरण इस बात को समझने के लिए है कि आज भारत ने क्रिकेट में कितनी ऊंची और लंबी छलांग लगा ली है. 1983 में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व क्रिकेटर मदनलाल ने आजतक से अपना तब का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि एक दौर था कि हमें मैच ही नहीं बल्कि प्रैक्टिस में भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. यहां तक की वर्ल्डकप के दौरान होटल में कपड़े भी खुद धोते थे. 

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पूर्व क्रिकेटर मदनलाल ने शेयर किए 1983 के अनुभव
1983 में बोर्ड के पास पैसे ही नहीं थे तो वह टीम को कहां से देते. पर मुझे खुशी इस बात की है कि जो आने वाली हमारी पीढ़ी है, आने वाली हमारी टीमें हैं, अच्छी से अच्छी सुविधाएं उन्हें मिल रही हैं. हमारे साथ तो कई बार ऐसा भी होता था कि हमारे पास प्रैक्टिस के लिए इंग्लिश बॉल भी नहीं होती थी. इंडियन बॉल से प्रैक्टिस हमने की.  लॉर्ड्स और बाकी देशों में भी हम जब टूर करते थे तो इंडियन बॉल्स से प्रैक्टिस करते थे.  लेकिन समय-समय की बात है और समय तो फिर बदलता ही है न, जब आप जीतेंगे नहीं तो टाइम नहीं चेंज होगा. 

महंगी थी लॉउन्ड्री, खुद धोते थे कपड़े
1983 के बाद जो हमारे बोर्ड के अधिकारी रहे, उन्होंने क्रिकेट की मार्केटिंग की. क्रिकेट को बढ़ाया है. इसी दौरान इंडिया टुडे के स्पोर्ट्स एडिटर  विक्रांत गुप्ता ने कहा कि ये 70-80 के दशक के बात होती थी कि भारत के खिलाड़ी जब इंग्लैंड जाते थे, तब उन्हें कोल्ड मीट दिया जाता था. गर्म खाना नहीं मिलता था. तब मदनलाल ने बताया कि हमें कपड़े भी खुद धोने होते थे. लॉउन्ड्री महंगी बहुत थी.
 

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