टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल पर सटीक निशाना लगाने के लिए मेराज अहमज खान (Mairaj Ahmad Khan) तैयार हैं. यदि निशाना नहीं चूका तो गोल्ड इस बार भारत की झोली में ही गिरेगा. मेराज टोक्यो में सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए उतरेंगे. ओलंपिक खेल 23 जुलाई से 8 अगस्त तक होंगे.
बुलंदशहर के खुर्जा के रहने वाले मेराज शूटिंग में आने से पहले क्रिकेट मैं भी हाथ आजमा चुके हैं. उनके छोटे भाई सिराज बताते हैं कि 45 साल के मेराज ने खुर्जा के केपी मांटेसरी स्कूल से 5वीं तक की पढ़ाई की. बुलंदशहर स्थित एक कान्वेंट स्कूल से 8वीं करने के बाद उन्होंने खुर्जा से ही 10 प्लस टू (यूपी बोर्ड) किया. इसके बाद वह जामिया चले गए. मेराज के पिता दिल्ली प्रगति मैदान में होटल का बिजनेस करते थे.
मेराज को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था. फर्स्ट ईयर में ही वह जामिया क्रिकेट टीम में शामिल हो गए. उनके चाचा ने मेराज के आई कॉन्टैक्ट और एल्बो एंगल को देखते हुए उन्हें शूटिंग में आने के लिए प्रेरित किया. और यहीं से मेराज शूटिंग की ओर खिंचते चले गए. सिराज बताते हैं कि पिता, नाना और चाचा भी शूटिंग का शौक रखते थे यह भी मेराज के लिए प्लस पॉइंट था. लेकिन मेराज का जुनून निशानेबाजी में बदल गया और मेडल जीतना उनका टारगेट बना.
पिछले दो दशकों में मेराज ने वर्ल्ड कप शूटिंग से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक जीते हैं. उन्होंने नवंबर 2019 में दोहा में हुई एशियाई चैम्पियनशिन में हमवतन अंगद बाजवा को 1-2 से हराते हुए ओलंपिक में अपना स्थान पक्का किया. सितंबर 2015 में स्कीट शूटिंग में क्वालिफाई कर रियो ओलंपिक में स्थान पक्का करने वाले पहले भारतीय बने थे, जिसमें मात्र एक अंक से फाइनल में पहुंचने से चूक गए थे.
दोहा में हुई एशियाई चैम्पियनशिन में सिल्वर मेडल हासिल कर मेराज ने टोक्यो ओलंपिक का कोटा पक्का किया. इसके बाद दिल्ली में इसी साल हुए वर्ल्ड कप मुकाबले में फिर गोल्ड झटका. अपने लक्ष्य का पीछा करते हुए स्कीट शूटर मेराज बुलंदशहर और अपने घर खुर्जा से दूर ही रहते हैं. सभी दुआ कर रहे हैं कि मेराज देश का नाम रोशन करते हुए इस बार निशानेबाजी मे गोल्ड लेकर आएं.