
वाराणसी (Varanasi) की धरती का नाम एक बार फिर ओलंपिक (Olympics) के इतिहास में दर्ज होने जा रहा है, इसकी वजह बने हैं वाराणसी के हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय. शिवपुर क्षेत्र के भगतपुर गांव निवासी ललित उपाध्याय (Lalit Upadhyay Olympic) का जन्म अतिमध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था, लेकिन उनके हौसले कहीं से मध्यम नहीं रहे.
अब तक 200 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता (Hockey Tournament) खेल चुके ललित मात्र 6 वर्ष के थे तभी हॉकी खेलने का मन बना लिया था. फिर स्कूल में द्रोणाचार्य जैसे मिले कोच और माता-पिता की परवरिश से आज उनको टोक्यो ओलंपिक (Olympic Games Tokyo) तक का टिकट दिला दिया.
भारतीय हॉकी टीम में वाराणसी का ललित
ललित भारतीय हॉकी टीम में शामिल 16 खिलाड़ियों में से एक जरूर हैं, लेकिन उनकी क्षमता इतनी है कि वे कभी भी खेल का रुख बदल सकते हैं. एग्रेसिव और कड़ी मेहनत करने वाले ललित की टीम में पोजीशन मुख्य रूप से फॉरवर्ड और फिर मिडफील्ड की भी है.
वर्ल्ड कप और कॉमन वेल्थ में खेल चुके हैं ललित
शुरुआती शिक्षा के दौरान ही वाराणसी के यूपी कॉलेज में साई (SAI) की तरफ से हॉकी ट्रेनिंग सेंटर के कोच परमानंद मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने यूपी कॉलेज में अपनी कोचिंग की शुरुआत कोलकाता से ट्रांसफर होने के बाद ही ललित जैसे छोटे बच्चों को लेकर ही की थी. उसके बाद अंडर-15, अंडर-18 और साई के होने वाले हॉकी टूर्नामेंट में लगतार जीत हासिल होती गई. भोपाल में तो उनके यूपी कॉलेज के खिलाड़ियों का मैच देखने अपना काम छोड़कर लोग आया करते थे. उसके बाद ललित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. दो बार वर्ल्ड कप और एक बार कॉमन वेल्थ में भी ललित खेल चुका है.
टोक्यो में गर्मी से निपटने के लिए विशेष तैयारी
ललित के शुरूआती कोच परमानंद मिश्रा बताते हैं कि टोक्यो में काफी गर्मी है, जिससे निपटने के लिए सभी खिलाड़ियों ने भारत में कड़ी धूप में 4-4 घंटे तपकर प्रैक्टिस की है. अब सारा कुछ परफेक्शन, एक्यूरेसी और टाइमिंग पर निर्भर करता है.
पिता सतीश उपाध्याय को ललित से काफी उम्मीदें
उधर, ललित के पिता सतीश उपाध्याय को भी ललित से काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ललित के साथ संवाद नहीं कर सके, इसका उनको जरा भी अफसोस नहीं है। खुशी इस बात कि है कि पीएम मोदी खिलाड़ियों को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं और दोनों में ललित छोटा है. दोनों ही बेटे हॉकी के खिलाड़ी हैं. ललित इस समय भारत पेट्रोलियम में अधिकारी के पद पर तैनात है.
वाराणसी और देश का नाम रोशन करे: पिता सतीश उपाध्याय
सतीश उपाध्याय ने बताया कि ललित जब छोटा था तभी गांव के बच्चों को हॉकी खेलता देख उनसे प्रभावित हुआ था. उन्होंने पहली बार ही ललित को हॉकी पैसे लगाकर दिलाई थी. फिर उनके कोच और स्कूल की तरफ से ही उसकी खेल की जरूरतों को पूरा किया गया. उन्होंने बताया कि ललित के बचपन के वक्त उनकी छोटी कपड़े की दुकान थी और वह घर से साइकिल से निकल जाया करते थे. ज्यादातर ध्यान ललित की मां रीता उपाध्याय की ही बच्चों पर दिया करती थीं. उसके बाद स्कूल में कोच परमानंद मिश्रा ध्यान देते थे.
वे बताते हैं कि ललित अभी कुंवारा है और अभी सिर्फ वह अपने खेल पर ध्यान दे रहा है. शादी जब वह करना चाहेगा तभी होगी. उनकी दिली इच्छा है कि ललित बहुत अच्छा खेले और भारत के लिए गोल्ड लेकर टोक्यो से लौटे और पूरे वाराणसी और देश का नाम रोशन करे.