
भारत की पुरुष हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने से चूक गई. मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली इस टीम के पास 41 साल बाद ओलंपिक में इतिहास रचने का मौका था. टीम इंडिया के पास गोल्ड मेडल की रेस में बने रहने का चांस था, लेकिन सेमीफाइनल में बेल्जियम के खिलाफ 2-5 की हार ने इस सपने को तोड़ दिया.
टीम इंडिया को ये हार बहुत वर्षों तक चुभेगी. वह मैच के 49वें मिनट तक वर्ल्ड चैम्पियन बेल्जियम को कड़ी टक्कर दे रही थी, लेकिन आखिरी के 11 मिनट ही टीम इंडिया पर भारी पड़े और यहीं से एक सपने का अंत हो गया.
तीसरे क्वार्टर के बाद स्कोर था बराबर
खेल के तीसरे क्वार्टर तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं. दोनों टीमों में से फाइनल में कौन पहुंचता, ये तय होना था चौथे क्वार्टर में. बेल्जियम की टीम इस क्वार्टर के शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेली, जैसे उसने बाकी के तीन क्वार्टर में खेला था.
उसे 48-49वें मिनट के दौरान बैक-टू-बैक तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले.अलेक्सांद्र हेंड्रिक्स जैसा दिग्गज ड्रैग फ्लिकर ऐसे मौके पर कहां चूकने वाला था. दो पेनल्टी कॉर्नर में नाकाम रहने के बाद उन्होंने तीसरे पेनल्टी कॉर्नर में गोल कर बेल्जियम को बढ़त दिला दी. इसके बाद से टीम इंडिया मुकाबले में पिछड़ती गई.
फिर 53वें मिनट में हेंड्रिक्स ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत को दो गोल से पीछे कर दिया. अब भारत को मैच में बराबरी करने के लिए सात मिनट के अंदर दो गोल करने थे, लेकिन बेल्जियम की डिफेंस को भारतीय खिलाड़ी भेद नहीं पाए. उल्टे, खेल के आखिरी मिनट में जॉन डोहमेन ने गोल कर बेल्जियम को 5-2 से निर्णायक बढ़त दिला दी.
'मौके का फायदा उठाना चाहिए था'
इस हार के बाद टीम इंडिया के कोच ग्राहम रीड ने कहा, 'हमने मैच जीतने के मौके बनाए. ऑस्ट्रेलिया के साथ बेल्जियम दुनिया की सबसे अच्छी टीम है और इन टीमों के खिलाफ आपको मौके का फायदा उठाना होगा. दुर्भाग्य से हमने नहीं किया.'
बता दें इस ओलंपिक में टीम इंडिया को सिर्फ दो मैचों में हार मिली है. उसे ग्रुप स्टेज में वर्ल्ड नंबर 1 ऑस्ट्रेलिया से 1-7 से शिकस्त मिली थी और अब सेमीफाइनल में वर्ल्ड चैम्पियन बेल्जियम से 2-5 से हार मिली है.