
टोक्यो पैरालंपिक्स में भारत के योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीत लिया है. वह पुरुषों के डिस्कस थ्रो 56 फाइनल में दूसरे स्थान पर रहे. सोमवार को उन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में (44.38 मीटर, सीजन बेस्ट) अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और पदक पर कब्जा कर लिया.
ब्राजील के बतिस्ता डॉस सैंटोस क्लॉडनी (45.25) ने इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल जीता. क्यूबा के डियाज अल्दाना लियोनार्डो (43.36) तीसरे स्थान पर रहे.
दिल्ली के 24 साल के योगेश के सभी छह प्रयास इस प्रकार रहे x, 42.84, x, x, 43.55, 44.38.
#IND Yogesh Kathuniya has just bagged the #Silver medal in Men's Discus Throw F56 with a splendid 44.38m throw! #Paralympics #Tokyo2020 pic.twitter.com/L31eHp9JSl
— Doordarshan Sports (@ddsportschannel) August 30, 2021
सोमवार को ही अवनि लखेरा ने भारत को शूटिंग में गोल्ड मेडल दिलाया है. स्टार पैरा एथलीट और दो बार के स्वर्ण पदक विजेता देवेंद्र झाझरिया पैरालंपिक खेलों की भाला फेंक स्पर्धा में सोमवार को रजत पदक जीता. सुंदर सिंह गुर्जर ने भी भाला फेंक में कांस्य पदक जीता.
आठ साल की उम्र में लकवाग्रस्त होने वाले योगेश ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 44.38 मीटर चक्का फेंककर दूसरा स्थान हासिल किया. विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता योगेश ने टोक्यो में अपनी स्पर्धा की शुरुआत की. उनका पहला, तीसरा और चौथा प्रयास विफल रहा, जबकि दूसरे और पांचवें प्रयास में उन्होंने क्रमश: 42.84 और 43.55 मीटर चक्का फेंका था.
रविवार को भाविनाबेन पटेल ने महिलाओं की एकल टेबल टेनिस स्पर्धा क्लास 4 में और निषाद कुमार ने पुरुषों की टी47 ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीते थे.
डिस्कस थ्रो एथलीट विनोद कुमार ने रविवार को टोक्यो पैरालंपिक में एशियाई रिकॉर्ड के साथ पुरुषों की एफ52 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, लेकिन उनके विकार के क्लासिफिकेशन पर विरोध के कारण वो जीत का जश्न नहीं मना पाए. पदक समारोह भी 30 अगस्त के शाम के सत्र तक स्थगित कर दिया गया है.
कोच के बिना अभ्यास किया था
चक्का फेंक के भारतीय एथलीट योगेश कथुनिया के लिए टोक्यो पैरालंपिक में जीते गए रजत पदक का महत्व स्वर्ण पदक जैसा है क्योंकि उन्होंने कोच के बिना अभ्यास किया था और एक साल से भी अधिक समय से कोचिंग के बिना पदक जीतने से वह बेहद खुश हैं.
उन्होंने कहा, ‘यह शानदार है. रजत पदक जीतने से मुझे पेरिस 2024 में स्वर्ण पदक जीतने के लिए अधिक प्रेरणा मिली है.’ कथुनिया ने कहा कि खेलों के लिए तैयारी करना मुश्किल था क्योंकि लॉकडाउन के कारण पिछले डेढ़ वर्ष में अधिकतर समय उन्हें अभ्यास की सुविधाएं नहीं मिल पाई थीं.
उन्होंने कहा, ‘पिछले 18 महीनों में तैयारियां करना काफी मुश्किल रहा. भारत में लॉकडाउन के कारण छह महीने प्रत्येक स्टेडियम बंद रहा.’ कथुनिया ने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2019 में 42.51 मीटर चक्का फेंककर पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई किया था.
... ऐसे शुरू हुआ था उनका सफर
जब वह दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में थे, तब कई प्रशिक्षकों ने उनकी प्रतिभा पहचानी. इसके बाद जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में सत्यपाल सिंह ने उनके कौशल को निखार. बाद में उन्हें कोच नवल सिंह ने कोचिंग दी.
कथुनिया ने 2018 में बर्लिन में पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के रूप में पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और विश्व रिकॉर्ड बनाया था.