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Budget 2019: भारत में बनेगा AI प्रोग्राम, जानिए क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

Budget 2019: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल खुलेंगे, नेशनल प्रोग्राम बनाया जाएगा. लोगों को इससे फायदा मिलेगा. ऐसा पीयूष गोयल ने कहा है.

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Representational Image
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पिछले कुछ साल से स्मार्टफोन इंडस्ट्री की वजह भारत में जितना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टर्म का यूज हुआ है, शायद ही ऐसा पहले कभी हुआ होगा. मार्केट के लगभग हर मिड रेंज स्मार्टफोन में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले फीचर दिए जाने का दावा किया जाता है. बहरहाल अब बजट 2019 की बात करते हैं जिसमें आर्टफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र हुआ है.

केंद्रिय मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में अंतरिम बजट पढ़ते हुए कहा कि सरकार नेशनल सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खोलेगी और जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल लॉन्च किया जाएगा.  उन्होंने कहा है कि नेशनल AI पोर्टल जल्द ही डेवेलप किया जाएगा.

नया आर्टफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल नेशनल प्रोग्राम ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सपोर्ट में बनाया जाएगा.  पीयूष गोयल ने कहा है कि आर्टफिशिल इंटेलिजेंस प्रोग्राम का इस्तेमाल लोगों को AI और इससे जुड़ी तकनीक का फायदा दिलाने के लिए होगा. इसके नेशनल सेंटर्स बनाए जाएंगे जो हब के तौर पर काम करेगा. इसके 9 एरिया चुन लिए गए हैं.

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सरकार द्वारा तैयार किए गए AI पोर्टल में क्या होगा और लोगों को इसका फायदा कैसे दिलाया जाएगा फिलहाल सरकार ने बजट में ये नहीं बताया है.

लेकिन आपके लिए ये जानना जरूरी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है और आपके डे टु डे लाइफ में कैसे फायदेमंद साबित हो सकता है. हां इसके नुकसान भी हैं और दुनिया के बड़े टेक्नॉलजी दिग्गज मानते हैं कि ये दुनिया को खतरे में डाल सकती है. 

1955 में सबसे पहले जॉन मकार्थी ने इस टर्म का यूज किया था. इन्हें फादर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी कहा जाता है. मोटे तौर पर कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर साइंस का एक पार्ट है जिसके तहत इंटेलिजेंट मशीन तैयार की जाती है जो इंसानों की तरह रिएक्ट करे और इंसानों की तरह काम भी करे.

आर्टफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मशीन इंसानों की तरह प्रॉब्लम सोल्व कर सकती है. इंसानों की तरह चीजें सीख सकती है. जैसे हम और आप किसी काम के एक्सपीरिएंस को लेकर आगे और बेहतर करते हैं ठीक उसी तरह AI प्रोग्राम भी है. यहां भी मशीन इसके जरिए सीख सकती हैं.

एक बात ध्यान में रखें कि ये यह आर्टफिशियल इंटेलिजेंस का हिस्सा भर है. क्योंकि इसमें कई अलग अलग पार्ट्स भी हैं. इनमें स्पीच रिकॉग्निशन, प्लानिंग, लर्निंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसे स्किल्स हैं. स्मार्टफोन्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड असिस्टेंट दिए जाते हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण गूगल असिस्टेंट है. इसे आप जितना यूज करेंगे उतना सटीक होगा. यानी ये आपसे सीखता है. मशीन लर्निंग भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक पार्ट कहा जा सकता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदे और नुकसान . आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जितने फायदे हैं उतने नुकसान भी हैं.

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काम सटीक होंगे..

गलतियों की गुंजाइश नहीं है..

मुश्किल से मुश्किल टास्क आसानी से परफॉर्म होंगे..

डिजिटल असिस्टेंट आपकी मदद करेंगे..

मेडिकल ऐप्लिकेशन में इसे यूज करके इलाज आसान होगा.

नुकसान क्या होगा

कोई ऑरिजनल क्रिएटिलिटी नहीं होगी..

नौकरियां भी कम हो सकती हैं ..

AI से ऑटोनोमस वेपन बनाने की तैयारी है जो खतरनाक होंगे ..

लोगों की प्राइवेसी के लिए भी ये खतरनाक है ..

भले ही ये इंटेलिजेंट है, लेकिन यह मशीन है. जो आपकी सहायता कर सकती है, लेकिन इससे अच्छे बुरे या नियम कानून में फर्क नहीं पता और ये आगे चलकर बड़ा खतरा हो सकता है.

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