हर बार iPhone लॉन्च होने पर कमोबेश दूसरी हर बड़ी स्मार्टफ़ोन कंपनी किसी न किसी तरह से iPhone का मज़ाक़ बनाती हैं. लेकिन इसके बाद वो कंपनियाँ ख़ुद ही iPhone को कॉपी करने लगती हैं.
iPhone के साथ बॉक्स में चार्जिंग ऐडेप्टर नहीं मिलेगा. इसे लेकर शाओमी ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि, ‘परेशान न हों हम Mi 10t के साथ बॉक्स के बाहर कुछ नहीं छोड़ा है’
पहले iPhone का मज़ाक़, फिर उसी को कॉपी करने का ट्रेंड!
कॉपी-पेस्ट के कई उदाहरण हैं. iPhone X के साथ Apple ने सबसे पहले डिस्प्ले में नॉच देने की शुरुआत की. इससे पहले भी Essential फोन में नॉच दिया गया था, लेकिन वो भारत नहीं आया था.
iPhone X के बाद से कैमरा iPhone X का कैमरा मॉड्यूल से लेकर नॉच तक कॉपी किए जाते रहे हैं. सैमसंग और शाओमी भारत में ऐपल की राइवल कंपनियाँ हैं.
अब लगभग हर स्मार्टफ़ोन कंपनियां अपने 90% से ज़्यादा स्मार्टफोन्स में किसी न किसी तरह का नॉच दे रही हैं. शुरुआत में इन कंपनियों ऐपल का नॉच हूबहू कॉपी कर लिया.
धीरे धीरे कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स के नॉच बदलने शुरू किए और इसे पंचहोल डिस्प्ले, वॉटर ड्रॉप, टियर ड्रॉप जैसे नाम देना शुरू कर दिया और नॉच छोटे कर दिए गए.
iPhone 12 लॉन्च हो चुका है. इस सीरीज़ के लॉन्च के साथ ही ऐपल ने ऐलान किया है कि कंपनी बॉक्स में चार्जिंग ऐडेप्टर और इयरफोन्स नहीं देगी. इसके पीछे की वजह ऐपल ने कार्बन एमीशन को कम करना बताया है.
क्या फ्यूचर में ऐपल को फ़ॉलो करते हुए ये कंपनियाँ बॉक्स से ऐडेप्टर नहीं हटाएंगी?
iPhone के बॉक्स में चार्जर न मिलने की वजह चाहे जो भी हो, कस्टमर्स को ये पसंद नहीं आया है. ख़ास कर भारतीय कस्टमर्स इससे नाराज़ हैं.
नाराज़गी जायज़ भी है, क्योंकि iPhone महँगे होते हैं और बॉक्स में चार्जर और इयरफोन्स न दिया जाना फ़र्स्ट टाइम आईफ़ोन यूज़र्स को महँगी क़ीमत पर चार्जर और इयरफोन्स लेने पर मजबूर करेगा.
Samsung और Xiaomi ने iPhone के साथ चार्जिंग ऐडेप्टर और इयरफोन्स न देने को लेकर मज़ाक़ बना रहे हैं. लेकिन क्या फ्यूचर में ये कंपनियाँ फ़ोन के साथ चार्जिंग ऐडेप्टर देती रहेंगी? मुझे ऐसा नहीं लगता.
Xiaomi पहले से ही बॉक्स में इयरफोन्स नहीं देती है और iPhone का ट्रेंड फ़ॉलो करते हुए आने वाले समय में शाओमी और सैमसंग सहित दूसरी कंपनियाँ भी कॉस्ट कटिंग के लिए बॉक्स से ऐडेप्टर हटा सकती हैं.
ऐपल ने भी एंड्रॉयड काफ़ी कुछ कॉपी किया है. हाल ही में लॉन्च किया गया विजेट फ़ीचर हो या पहले कंट्रोल सेंटर में बदलाव हो. सॉफ़्टवेयर बेस्ड कई फ़ीचर्स एंड्रॉयड से लिए गए हैं.
मेरे ख़्याल से कंपनियाँ अगर एक दूसरे की कमियों को उजागर करें, मज़ाक़ भी बनाएं तो सही है. लेकिन ये तब तक सही है, जब तक वो आने वाले समय में ख़ुद ही उन्हें कॉपी न करने लगें.