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टेक न्यूज़

क्रिप्टोकरेंसी: भारत में क्या है लीगल स्टेटस? कैसे होती है खरीदी-बिक्री? कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल?

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बुधवार को पूरी क्रिप्टो दुनिया हिल गई थी. क्योंकि, इसे मार्केट कैप में करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था और Binance और कॉइनबेस सहित कई बड़े ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म क्रैश हो गए थे, जिससे निवेशकों को निराशा हुई थी. हालांकि, बाद के घंटों में Bitcoin, Ethereum और Dogecoin जैसी कई क्रिप्टोकरेंसी में सुधार देखने को मिला था. ये हालिया गिरावट वित्तीय और भुगतान संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी सेवाएं देने से बैन करने के चीन के फैसले के बाद आई थी.

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चीन की तीन सरकारी संगठनों नेशनल इंटरनेट फाइनेंस एसोसिएशन ऑफ चाइना, चाइना बैंकिंग एसोसिएशन और पेमेंट एंड क्लियरिंग एसोसिएशन ऑफ चाइना ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की थी. संगठनों ने निवेशकों से कहा था कि अगर उन्हें क्रिप्टो-करेंसी इन्वेस्टमेंट ट्रांजैक्शन्स में कोई लॉस होता है तो उनके पास कोई प्रोटेक्शन नहीं होगा.

 

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चीन के फैसले पर बाजार की प्रतिक्रिया और उसके बाद क्रिप्टोकरेंसी में भारी गिरावट, इन डिजिटल कॉइन्स की अस्थिर प्रकृति को उजागर करती है, जिसे ट्रांजैक्शन का फ्यूचर माना जा रहा है. ये भारत में क्रिप्टो के लीगल स्टेटस और उस पर सरकार के रुख पर भी ध्यान केंद्रित करता है.

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी का लीगल स्टेटस

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के लीगल स्टेटस को लेकर बहुत कन्फ्यूजन है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने इस साल की शुरुआत में एक बिल प्रस्तावित किया था, जिसमें Bitcoin और Dogecoin सहित सभी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान था. हालांकि, बाद में इसमें और कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ. एक हालिया रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया था कि सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह से बैन करने का आइडिया ड्रॉप कर दिया है.

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क्रिप्टोकरेंसी भारत में गैरकानूनी नहीं है. लेकिन, इन्हें रेगुलेट नहीं किया जाता. यानी आप बिटकॉइन खरीद और बेच सकते हैं. यहां तक बतौर इन्वेस्टमेंट इसे रख भी सकते हैं. लेकिन, इसकी देखभाल या सुरक्षा के लिए कोई गवर्निंग बॉडी नहीं है.

 

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WazirX के फाउंडर और CEO निश्चल शेट्टी ने हमारी सहयोगी वेबसाइट इंडिया टुडे टेक से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा, 'भारत में अभी इसे लेकर बहुत कनफ्यूजन है. क्योंकि, देश में इसके लिए कोई रेगुलेशन नहीं है. जब लोग इसके बारे में सुनते हैं तो डर जाते हैं. वास्तव में इंटरनेट पर मौजूद बहुत सारे चीजें अनरेगुलेटेड हैं. इनमें Ola और Uber के नाम शामिल हैं. यहां तक की ई-कॉमर्स भी अनरेगुलेटेड है.' इन्वेस्टर्स के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि रेगुलेटेड नहीं होने से फ्रॉड और स्कैम की संभावना बढ़ जाती है.

 

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क्रिप्टो कैसे खरीदें और बेचें?

बाजार में ढेरों क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स हैं. ऐसे में देश में Bitcoin और Dogecoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी को खरीदना और बेचना काफी आसान है. देश में मौजूद पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स में WazirX, Zebpay, Coinswitch Kuber और CoinDCX GO के नाम शामिल हैं. इन्वेस्टर्स Coinbase और Binance जैसे इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स से Bitcoin, Dogecoin और Ethereum जैसी दूसरी क्रिप्टोकरेंसी भी खरीद सकते हैं.

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शेयर बाजारों के उलट, ये सभी प्लेटफॉर्म चौबीसों घंटे काम करते हैं. इसका मतलब ये है कि आप हफ्ते में किसी भी दिन और दिन के किसी भी समय पैसे का निवेश और निकासी कर सकते हैं. क्रिप्टोकरेंसी को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया भी काफी आसान है. आपको केवल इन प्लेटफॉर्म्स पर साइन अप करना होगा. इसके बाद अपना KYC प्रोसेस पूरा कर वॉलेट में मनी ट्रांसफर करना होगा. इसके बाद आप खरीदारी कर पाएंगे. इन्वेस्टर्स के पास क्रिप्टो की खरीदी-बिक्री के लिए प्री-डिसाइडेड लिमिट सेट करने का भी ऑप्शन होगा.

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क्रिप्टो को खरीदने के लिए कोई लिमिट तय नहीं है. इन्वेस्टर्स बहुत छोटे अमाउंट से भी शुरू कर सकते हैं. चुनौती ये है कि अधिकांश बैंक क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं, जिसने इससे लेनदेन की प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है.

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निश्चल इसे एक्सप्लेन करते हुए कहते हैं 'बैंक हमें सही तरीके से डिपॉजिट एक्सेप्ट करने का ऑप्शन नहीं दे रहे हैं और अगर बैंकिंग सिस्टम क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का सपोर्ट नहीं करेगा, तो वे कैसे ठीक से काम कर सकते हैं. अभी, हमें हर हफ्ते एक नए बैंक को प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट करना होगा. क्योंकि मौजूदा बैंक काम करना बंद कर देते हैं. इसका सीधा असर यूजर्स पर पड़ता है.'

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साफ तौर पर क्रिप्टो इंडस्ट्री भारत में काफी नई है. इनमें UPI ट्रांजैक्शन्स भी काम नहीं आते. ऐसे में इन्वेस्टर्स को इसमें इन्वेस्ट करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना होगा. क्रिप्टोकरेंसी की खरीदी बिक्री के लिए दूसरा ऑप्शन P2P ट्रांजैक्शन्स हैं. यानी पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन्स. इसमें आप इंट्रेस्टेड बायर/सेलर ढूंढ कर एक्सचेंज कर सकते हैं.

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क्रिप्टो के साथ आप क्या कर सकते हैं?

क्रिप्टो मार्केट ने पिछले कुछ सालों में काफी ग्रोथ पाई है. लेकिन, फैक्ट ये है कि इसके साथ आप ज्यादा कुछ कर नहीं सकते. उदाहरण के तौर पर बात करें तो आप इससे सैंडविच नहीं खरीद सकते. ऐसे में वास्तविक दुनिया में ये बहुत हद तक किसी काम का नहीं है. लेकिन, बतौर 'स्टोर ऑफ वैल्यू' ये बहुत काम आ सकता है. इसकी तुलना चांदी या सोने से की जा सकती है, जिन्हें लोग इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उनमें वैल्यू बढ़ने की संभावना देखते हैं.

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इस पर शेट्टी ने कहा, 'बिटकॉइन का मकसद बिल्कुल गोल्ड की तरह है, यानी वैल्यू स्टोर करना. वास्तव में, यह सोने की तुलना में ज्यादा एक्सेसिबल है क्योंकि इसे खरीदने के लिए आपको केवल एक मोबाइल फोन और इंटरनेट की जरूरत होती है. लेकिन सोने को बहुत आसानी से यूज किया जा सकता है, यही बात क्रिप्टो को और अधिक अस्थिर बनाता है.

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इन सबके अलावा हर क्रिप्टोकरेंसी की अपनी अलग वैल्यू है. जैसे Bitcoin को गोल्ड के सब्सटीट्यूट के तौर पर देखा जाता है. तो वहीं, कुछ Shiba Inu जैसे कॉइन हैं, जिनका कोई काम नहीं है ना इनकी कोई वैल्यू है. ये मीम कॉइन्स हैं. ऐसे में कई फैक्टर्स हैं जो किसी कॉइन का वैल्यू डिसाइड करते हैं.

 

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दुनिया में जो चीज सीमित मात्रा में उपलब्ध होती है, उसकी वैल्यू काफी ज्यादा होती है. यही बात क्रिप्टोकरेंसी पर भी लागू होती है. इसलिए Bitcoin इतना पॉपुलर है. क्योंकि, ये लिमिटेड है. दूसरी तरफ Dogecoins में कोई लिमिट नहीं है. ऐसे मे ये आगे चलकर फेल हो सकता है. साथ ही कॉइन का इस्तेमाल कैसे होगा, ये फैक्टर भी इसकी वैल्यू डिसाइड करता है. अगर इसका इस्तेमाल किसी खास पर्पज के लिए किया जाए, तो इसकी वैल्यू बढ़ सकती है.

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