AI का इस्तेमाल बढ़ा है. इसको लगातार अपग्रेड भी किया जा रहा है. अब एक नए डायलॉग बेस्ड AI चैटबोट का प्रोटोटाइप दिखाया गया है. ChatGPT प्रोटोटाइप ऐसा AI चैटबॉट है जो नेचुरल ह्यूमन लैंग्वेज को समझ सकता है और इंसान की तरह ही डिटेल्ड टेक्स्ट लिख सकता है. टेक्स्ट जनरेटिंग AI में GPT या जनरेटिव प्री-ट्रेन्ड ट्रांसफर्मर में लेटेस्ट इवोल्यूशन है.
किसने तैयार किया है?
लेटेस्ट चैटबोट में नए AI को OpenAI फाउंडेशन ने तैयार किया है. ये Elon Musk का इंडीपेडेंट रिसर्च बॉडी है. मस्क ने इस स्टार्टअप को दूसरे इनवेस्टर्स के साथ मिलकर साल 2015 में लॉन्च किया था. इसका मकसद एडवांस डिजिटल इंटेलीजेंस को एडवांस कर ह्यूमनिटी को फायदा पहुंचाना है. OpenAI प्लेटफॉर्म के डेटाबेस को ट्रेनिंग के लिए एक्सेस कर रहा था. इस पर ट्विटर के सीईओ ने रोक लगाकर कंपनी से दूरी बना ली.
कैसे करता है काम?
AI से ट्रेनिंग और मशीन लर्निंग के जरिए इसको इस तरह तैयार किया गया है कि ये जानकारी को उपलब्ध करवाता है. ये बातचीत इंटरफेस के दौरान सवालों के जवाब भी देता है. इस AI को इंटरनेट से लिए गए सैंपल टेक्स्ट से ट्रेन किया गया है.
कैसे किया जा सकता है इसका इस्तेमाल?
अर्ली यूजर्स ने इसको गूगल का अल्टरनेटिव बताया है. ये डिस्क्रिप्शन, कॉम्प्लेक्स सवाल के जवाब देने में कैपेबल है. इसके अलावा ये कोड भी लिख सकता है और लेआउट प्रॉब्लम को सॉल्व कर सकता है. इसकी उपयोगिता की बात करें तो ये वेबसाइट के लिए कंटेंट जनरेट कर सकता है. इसके अलावा ये कस्टमर के इन्क्वायरी का जवाब दे सकता है और रिकंमडेशन देने के साथ ऑटोमैटेड चैटबोट्स भी क्रिएट कर सकता है.
OpenAI के CEO Sam Altman ने बताया कि ये अभी केवल अर्ली डेमो है कि ये क्या कर सकता है. आने वाले समय में आप इससे एडवाइज भी ले सकते हैं. बाद में ये एक कदम और आगे बढ़ सकता है और आपके लिए ये काम कर सकता है. इसकी क्षमता को लेकर अभी काफी संभावनाएं हैं जिसको तलाशना जारी है.
क्या ChatGPT इंसान को कर देगा रिप्लेस?
ये माना जा रहा है कि कंटेंट प्रोडक्शन पर पर डिपेंड होने वाले फील्ड को ये रिप्लेस कर सकता है. यानी ये प्रोग्रामर से प्रोफेसर और जर्नलिस्ट तक के काम को हैंडल कर सकता है. इंसान की तरह लिखे टेक्स्ट की वजह से माना जा रहा है कि ये टेक्नोलॉजी जर्नलिस्ट को रिप्लेस कर सकती है.
हालांकि, अभी ये काफी शुरुआती दौर में है. इस चैटबॉट में फर्क, क्रिटिकल थिकिंग स्किल्स और एथिकल डिसीजन मेकिंग एबिलिटी की कमी है जो एक सफल जर्नलिज्म के लिए जरूरी है. कंपनी ने कहा है कि ये पूरी तरह से गलत जानकारी भी दे सकता है.
OpenAI ने कहा है कि इस दिक्कत को दूर करना कठिन है क्योंकि डेटा में कोई भी सही जानाकरी स्टोर नहीं की जा सकती है. जो इसकी ट्रेनिंग के लिए जरूरी है.