Google को एक बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी कोर्ट ने माना है कि Google ने ऑनलाइन सर्च में अपनी मोनोपोली बनाने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल किया गया है. अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज अमित पी मेहता ने ये फैसला सुनाया है. ये फैसला टेक्नोलॉजी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.
दरअसल, टेक्नोलॉजी सेक्टर में हमें कई ऐसे कंपनियां नजर आती है, जिनकी बादशाहत को कोई चुनौती नहीं दे पाता है. गूगल ऐसी ही कंपनी है, जिसका सर्च इंजन मार्केट पर कब्जा है. दुनियाभर में दूसरे सर्च इंजन भी हैं, लेकिन गूगल का तोड़ अभी तक किसी के पास नहीं है.
286 पेज के अपने फैसले में जज मेहता ने कहा है कि गूगल ने सर्च बिजनेस में अपनी मोनोपोली का गलत फायदा उठाया है. जज ने कहा है कि गूगल ने अपने डिस्ट्रिब्यूशन एग्रीमेंट में कंपटीशन को मार्केट में आने से ब्लॉक किया है.
यह भी पढ़ें: खत्म होंगे Google के अच्छे दिन! ChatGPT के बाद OpenAI ने लॉन्च किया SearchGPT
इसके अलावा Google ने 26 अरब डॉलर का भुगतान अपने सर्च इंजन को स्मार्टफोन और वेब ब्राउजर पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाने के लिए किया है. इसकी वजह से मार्केट में दूसरे कंपटीशन को पकड़ नहीं मिल पाई. इसके लेकर अमेरिका में जस्टिस डिपार्टमेंट और राज्यों ने गूगल के खिलाफ मुकदमा किया था.
गूगल पर आरोप लगा था कि कंपनी ने Samsung और Apple जैसी कंपनियों को अरबों डॉलर दिए, जिससे उसका दबदबा बना रहे. जज मेहता ने कहा है कि फोन्स और ब्राउजर पर गूगल की मोनोपोली की वजह से कंपनी ने ऑनलाइन एडवर्टाइजमेंट की कीमत बिना परिणाम के बारे में सोचे बढ़ाई है.
यह भी पढ़ें: कौन सा फ्लाईओवर लेना है, Google Maps बताएगा इस सवाल का जवाब!
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल Merrick Garland ने इस फैसले को अमेरिकी लोगों की ऐतिहासिक जीत बताया है. उन्होंने कहा है कि कोई भी कंपनी कानून से ऊपर नहीं होती है. फेडरल एंटीट्रस्ट रेगुलेटर्स ने दूसरी बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ भी मुकदमा किया है, जिसमें Meta प्लेटफॉर्म, ऐमेजॉन और ऐपल शामिल हैं.
गूगल इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना में है. कंपनी का कहना है कि उनकी सफलता बेहतर प्रोडक्ट देने की वजह से है, जो कंज्यूमर्स को पसंद आता है. गूगल के वकीलों का कहना है कि कंपनी को दूसरे प्लेटफॉर्म्स से काफी चुनौती मिलती हैं और उसका मार्केट शेयर यूजर्स के लिए वैल्यूएबल सर्विस तैयार करने की वजह से है.