इंटरनेट और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. अब सिर्फ फोन्स ही स्मार्ट नहीं रहे, बल्कि टीवी और यहां तक की कार्स भी स्मार्ट हो चुकी हैं. स्मार्ट कार हो या फिर कोई और स्मार्ट डिवाइस, ये सभी हमारी रोजमर्रा की लाइफ को आसान बनाते हैं. मगर इनके साथ एक खतरा भी आता है.
खतरा वायरस या मालवेयर के अटैक है. अभी तक तो लोगों को स्मार्टफोन हैक होने का डर था, लेकिन अब इस डर की लिस्ट लंबी होती जा रही है. इसमें कार, टीवी, वाईफाई कैमरा और ना जाने कितने ही प्रोडक्ट्स शामिल होते जा रहे हैं.
हाल में ही स्मार्ट कार से जुड़ी एक सिक्योरिटी वल्नेरेबिलिटी का पता चला है. इसकी मदद से हैकर्स स्मार्ट कार्स के बहुत से फीचर्स को कंट्रोल कर सकते हैं. आइए जानते हैं इस खामी के बारे में और ये कितनी खतरनाक हो सकती है.
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने एक सिक्योरिटी वल्नेरेबिलिटी का पता लगाया है, जो होंडा, निसान, Infiniti और Acura की गाड़ियों में देखने को मिल सकती है. इन सभी कार्स में SiriusXM की कनेक्टेड व्हीकल सर्विस का इस्तेमाल किया गया है. वल्नेरेबिलिटी के कारण हैकर्स रिमोटली इन कार्स का एक्सेस हासिल कर सकते हैं.
एक रिसर्चर Sam Curry ने ट्विटर पर इसकी जानकारी शेयर की है. रिसर्चर ने बताया कि इस दिक्कत की वजह से हैकर्स कार को अनलॉक कर सकते हैं, स्टार्ट, लोकेट और यहां तक की कार का हॉर्न भी रिमोटली बजा सकते हैं. इसके लिए हैकर्स को सिर्फ कार के VIN यानी व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर की जरूरत होगी.
SiriusXM की कनेक्टेड व्हीकल सर्विस नॉर्थ अमेरिका की 1 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों में उपलब्ध है. इस सर्विस का इस्तेमाल BMW, होंडा, हुंडई, इनफिनिटी, जगुआर, लैंड रोवर, लेक्सस, निसान और टोयोटा की कार्स में किया गया है. इस सिस्टम को सेफ्टी, सिक्योरिटी और कई कंवेंस सर्विसेस को इनेबल करने के लिए यूज किया जाता है.
कार में इसकी मदद से ऑटोमेटिक क्रैश नोटिफिकेशन, एन्हांस रोडसाइड असिस्टेंट, रिमोट डोर अनलॉक, रिमोट इंजन स्टार्ट, स्टोलेट व्हीकल रिकवरी असिस्टेंट, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और स्मार्ट होम डिवाइसेस इंटीग्रेशन की सुविधा मिलती है.
इस खामी की वजह से हैकर्स को टेलीमैटिक प्रोग्राम में घुसने का रास्ता मिल जाता है. इसकी मदद से हैकर्स विकटम की पर्सनल डिटेल्स एक्सेस कर सकते हैं. इतना ही नहीं VIN के साथ एक HTTP रिक्वेस्ट भेजकर हैकर्स कार को हैक कर सकते हैं.
भले ही इस टेक्नोलॉजी और वल्नेरेबिलिटी का खतरा भारत में इस्तेमाल होने वाली कार्स में अभी नहीं हो, लेकिन ये एक चेतवानी जरूर है. तेजी से हम कनेक्टेड कार्स और स्मार्ट कार्स की ओर बढ़ रहे हैं. इस तरह की टेक्नोलॉजी हमारे लिए बहुत सी सहूलियत लाती है, लेकिन ये खामी एक वॉर्निंग अलार्म है.
टेक्नोलॉजी पर हमारी बढ़ती निर्भरता एक खतरा हो सकती है और साइबर सिक्योरिटी के मामले में हमें अभी भी बहुत कुछ करना है. ऐसा नहीं है कि हमें टेक्नोलॉजी से दूर रहना चाहिए, लेकिन इसे यूजर करते हुए सवाधान रहने की जरूरत जरूर है. भारत समेत दुनियाभर के मार्केट में कनेक्टेड कार्स का चलन बढ़ रहा है.
लोग अब एक सामान्य कार नहीं बल्कि एक फीचर्ड कार चाहते हैं, जिसमें बड़ी टच स्क्रीन, ऐपल कार प्ले या एंड्रॉयड ऑटो जैसी सुविधाएं मिलती है. गाड़ियों में लोकेशन ट्रैकिंग और कई दूसरे फीचर्स जोड़े जा रहे हैं. इन सब के साथ कार में एआई और इंटरनेट की एंट्री हो गई है. ऐसे में कार हैकिंग को लेकर भविष्य में हमें बहुत कुछ देखने को मिल सकता है.