अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में बड़ा कदम उठाकर कई देशों से आयातित वस्तुओं पर नए टैरिफ (डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने का ऐलान कर दिया है. इस ऐलान के साथ दुनियाभर में खलबली मच गई है.
भारत, चीन समेत दूसरे देशों से अमेरिका पहुंचने वाले सामान पर कितना टैरिफ लगेगा इसका ऐलान कर दिया गया है. यह नया टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. कई एशियाई देशों पर भी 30 फीसदी से 45 फीसदी तक का टैरिफ लगाया गया है.
अमेरिकी टैरिफ क्या-क्या इफेक्ट पड़ सकता है
यहां आज आपको बताने जा रहे हैं कि अमेरिकी टैरिफ नियमों का भारतीय मोबाइल बाजार पर क्या-क्या इफेक्ट पड़ सकता है, खासकर सप्लाई चेन में रुकावट, लागत को लेकर बदलाव देखने को मिल सकते हैं. बताते चलें कि चीन अमेरिका से इलेक्ट्रिकल और कुछ कम्युनिकेशन इक्विपमेंट को इंपोर्ट करता है. साल 2023 में चीन ने अमेरिका से 14.08 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रोनिक्स इक्विपमेंट को अमेरिका से आयात किया था.
कंपोनेंट की कीमत में इजाफा
कई भारतीय मोबाइल मैन्युफैक्चरर चीन से इंपोर्ट किए गए सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिस्प्ले पैनल जैसे कंपोनेंट्स यूज करते हैं. अमेरिका के टैरिफ की वजह से चीन के मैन्युफैक्चरिंग लागत में इजाफा हो सकता है. इसका सीधा असर भारत में मैन्युफैक्चर होने वाले कंपोनेंट की कीमत पर भी पड़ेगा.
बदल सकती है ग्लोबल सप्लाई चेन
चीन आइटम महंगे होने की वजह से कई कंपनियां नए और सस्ते ऑप्शन को खोज सकती हैं. इससे भारत, वियतनाम और ताइवान जैसे देशों को फायदा मिल सकता है.
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'मेक इन इंडिया' को होगा फायदा
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ रूल्स की वजह से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिल सकता है. यह नए निवेशकों को अट्रैक्ट कर सकता है, जिससे कंपनियां मेक इन इंडिया के तहत तैयार होने वाले कंपोनेंट को यूज करने की प्राथमिकता देंगी.
कीमत पर पड़ सकता है असर
टैरिफ की वजह से अगर किसी भी कंपनी को कंपोनेंट महंगे मिलते हैं, तो उसका सीधा असर कस्टमर्स पर भी पड़ सकता है. यहां कीमतों में इजाफा हो सकता है. यहां मोबाइल समेत कई इलेक्ट्रोनिक्स आइटम महंगे हो सकते हैं.
भारतीय कंपनियों को होगा फायदा?
अमेरिकी टैरिफ के कारण अगर चीनी कंपनियों के फोन महंगे हो जाते हैं, तो इसका फायदा Lava जैसी भारतीय कंपनियों को मिल सकता है. भारतीय कंपनियों को कीमतें कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
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भारतीय ब्रांड को एक्सपोर्ट में आएगी परेशानी
भारतीय मोबाइल कंपनियां जब अमेरिका को कुछ निर्यात करेंगे तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकी नीतियां घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दे सकती हैं या भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगा सकती हैं.