कोरोना संक्रमण के बाद से पूरी दुनिया सफाई को लेकर जागरुक हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं. रिपोर्ट्स में बताया है कि 2 में से 1 भारतीय को पता है कि धूल में वायरस मौजूद होता है और इसको लेकर भी गंभीरता भी दिखाता है. आगे बताया है कि सिर्फ 32 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो लिविंग रूम, बेड रूम और किचन आदि से वायरस हटाने के सफाई पर प्राथमिकता देते हैं.
दरअसल, डायसन 2023 की ग्लोबल डस्ट स्टडी में बताया है कि भारतीयों ने वायरस के प्रति ज्यादा जागरुकता दिखाई है, फिर भी वह 7 में से केवल 1 ही वायरस को खत्म करने के लिए सफाई को प्राथमिकता देते हैं.
भारत में बीते साल की तुलना में सफाई को लेकर ज्यादा जागरुकता नजर आई है. साल 2022 में केवल 31 प्रतिशत लोगों ने सफाई को प्राथमिकता दी है. इस साल यह आकड़ा 61 प्रतिशत पर पहुंच गया है.
यह स्टडी 39 देशों के 30 हजार से ज्यादा लोगों पर की गई. इस ग्लोबल स्टडी में बताया है कि भारतीयों की साफ-सफाई की आदत में काफी बदलाव आया है. करीब 50 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि धूल में वायरस होते हैं और इसको लेकर वह चिंता भी जाहिर करते हैं. रिपोर्ट में बताया है कि लिविंग रूम, बेड रूम और किचन आदि से वायरस हटाने के लिए सिर्फ 32 प्रतिशत लोग ही सफाई पर ध्यान देते हैं.
स्टडी से पता चलता है कि दुनियाभर में धूल को लेकर, आम लोगों में क्या राय है. धूल को लेकर कम लोग जागरुक हैं, इसलिए अधिकतर लोगों को यह पता नहीं है कि वे धूल के साथ क्या हटा रहे हैं. स्टडी में शामिल सिर्फ 33 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि उन्हें पता है कि धूल में पॉलेन हो सकते हैं और 32 प्रतिशत ने डस्ट माईट के मल की मौजूदगी के बारे में जानते हैं.
इस दुनिया में करीब 55 प्रतिशत परिवारों में एक व्यक्ति ऐसा भी है, जिसे एलर्जी है. इसके बाद भी कई लोग धूल में सामान्य एलर्जी बढ़ाने वाले तत्वों की मौजूदगी के बारे में कम लोग जानते हैं.