वर्चुअल दुनिया का मेटावर्स अब रोजमर्रा की लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुका है. लोग मेटावर्स में घर, दुकान, जमीन ना जाने क्या क्या खरीद बेच रहे हैं. Interpol ने भी गुरुवार को मेटावर्स में एंट्री कर ली है. गुरुवार को इंटरपोल ने दुनियाभर की लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियों के लिए स्पेशल डिजाइन मेटावर्स लॉन्च किया है.
इसकी जानकारी ग्लोबल पुलिस बॉडी ने दिल्ली में हुई 90वीं जनरल असेंबली में दी है. इंटरपोल मेटावर्स में रजिस्टर यूजर्स फ्रांस के Lyon में मौजूद इंटरपोल जनरल सेक्रेटेरिएट हेडक्वार्टर का वर्चुअल टूर कर सकते हैं.
इसके लिए उन्हें किसी ज्योग्राफिकल या फिजिकल बाउंडरी का सामना नहीं करना होगा. यहां तक यूजर्स इस मेटावर्स में दूसरे ऑफिसर्स से इंटरैक्ट भी कर सकते हैं. यूजर्स अपने अवतार के जरिए दूसरे ऑफिसर्स से इंटरैक्ट कर सकते हैं.
साथ ही इसमें यूजर्स को फॉरेंसिक जांच और दूसरी पुलिसिंग क्षमताओं की ट्रेनिंग कोर्स का मौका मिलेगा. इंटरपोल की मानें तो मेटावर्स में कई यूजर्स की ग्रोथ हुई है और ये टेक्नोलॉजी आगे भी विकसित होती रहेगी.
इसकी वजह से क्राइम की लिस्ट भी बढ़ेगी. इसमें डेटा चोरी, बच्चों के खिलाफ अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय फ्रॉड्स, रैंसमवेयर, फिशिंग और दूसरे अपराध शामिल होंगे.
लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियों के लिए इनमें से कई चुनौतियां मौजूदा वक्त में हैं. कई ऐसे क्राइम हैं, जो रियल वर्ल्ड में तो अपराध की श्रेणी में आते हैं, लेकिन ऑनलाइन वर्ल्ड में इन्हें अपराध नहीं माना जाता है.
इंटरपोल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, मदन ओबेरॉय ने बताया, 'इन रिस्क्स को पहचान कर हम स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर इस पर काम कर सकते हैं. जिससे जरूरी कानूनी फ्रेमवर्क तैयार हो सके और भविष्य के क्रिमिनल मार्केट को तैयार होने से पहले खत्म किया जा सके.' उन्होंने बताया कि सिर्फ अभी हुई चर्चाओं के आधार पर हम प्रभावी रिस्पॉन्स तैयार कर सकते हैं.