रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध कोई बड़ा रूप ले सकता है? इस पर लगातार चर्चा हो रही है. एक तरफ जहां इस जंग में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा मंडरा रहा है. वहीं दोनों देशों के बीच रियल वर्ल्ड के साथ साइबर वर्ल्ड में भी लड़ाई चल रही है. NATO अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि NATO के किसी भी सदस्य पर Cyber Attack को हथियार से हमला माना जाएगा और ऐसी स्थिति में आर्टिकल 5 का इस्तेमाल किया जा सकता है.
बता दें कि NATO के आर्टिकल 5 का मतलब है कि अगर किसी NATO देश पर हमला होता है, तो सभी सदस्य इसे खुद पर हमला मानेंगे और इसका जवाब साथ मिलकर देंगे.
NATO यानी North Atlantic Treaty Organization ने साफ कर दिया है कि किसी बड़े साइबर हमले के बाद यह आर्टिकल प्रभावी हो सकता है, लेकिन ऐसा होने की संभावना बहुत कम है. Reuters के मुताबिक, NATO आधिकारी ने बताया, 'गठबंधन किसी संदिग्ध साइबर एक्टिविटी के प्रभाव को भी कुछ परिस्थितियों में आर्म्ड अटैक मान सकता है.'
उन्होंने बताया कि हम इसका अनुमान नहीं लगा रहे कि कोई साइबर अटैक कितना गंभीर होगा, जिसके बाद जवाब दिया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि इसके जवाब में डिप्लोमैटिक और आर्थिक प्रतिबंध या कोई ठोस साइबर कदम उठाया जा सकता है. यह अटैक की प्रकृति पर निर्भर करेगा.
ब्रिटेन और अमेरिका यूक्रेन पर साइबर अटैक को लेकर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं. इस तरह के साइबर हमलों का अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकता है. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स भी इस बात को लेकर चिंतित हैं. उनका मानना है कि रूस ऐसे गैंग्स के साथ टीम बना सकता है, जो संदिग्ध सॉफ्टवेयर रिलीज करते हैं.
बता दें कि रूस और यूक्रेन युद्ध में साइबर अटैक भी लगातार हो रहे हैं. रूस ही नहीं बल्कि यूक्रेन भी लगातार साइबर हमले कर रहा है. यूक्रेन ने रूस पर इस तरह की कार्रवाई के लिए IT Army भी बनाई है. यूक्रेन के उप-प्रधानमंत्री ने Twitter पर इसकी जानकारी शेयर की थी. वहीं रूस पर आरोप है कि वह Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल यूक्रेन के मिलिट्री अधिकारियों और राजनेताओं के अकाउंट हैक करने के लिए कर रहा है.