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'Google-Apple हैं नई ईस्ट इंडिया कंपनी'... Shark Tank India के जज अनुपम मित्तल ने क्यों कहा ऐसा?

Shark Tank India का तीसरा सीजन टेलीकास्ट किया जा रहा है. सभी सीजन में शादी डॉट कॉम के CEO अनुपम मित्तल मौजूद रहे हैं. हाल में उन्होंने एक इंटरव्यू दिया है, जो काफी चर्चा में है. इस चर्चा की वजह अनुपम मित्तल का वो बयान है, जिसमें उन्होंने ऐपल और गूगल को ईस्ट इंडिया कंपनी बताया है. आइए जानते हैं अनुपम ने किस वजह से इन कंपनियों पर ये आरोप लगाया है.

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अनुपम मित्तल ने गूगल और ऐपल की आलोचना की है
अनुपम मित्तल ने गूगल और ऐपल की आलोचना की है

Shark Tank India एक पॉपुलर टीवी शो है, जिसमें कई स्टार्ट-अप अपनी पिच लेकर पहुंचते हैं. यहां उन्हें अपनी कंपनी के लिए कई बार निवेश तो कई बार सीख मिलती है. हालांकि, इन दिनों इस टीवी शो के जज भी काफी चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर इनकी खूब चर्चा हो रही है. 

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इस वक्त Shaadi.com के CEO और शार्क टैंक इंडिया के जज, अनुपम मित्तल ने गूगल और ऐपल जैसी दिग्गज कंपनियों की पॉलिसीज पर सवाल उठाया है. उन्होंने इन दोनों कंपनियों को तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से की है. ये बात उन्होंने बिजनेस इंसाइडर को दिए इंटरव्यू में कही है. 

क्या है अनुपम मित्तल का आरोप?

उन्होंने कहा कि Google और Apple ने पूरे ऐप इकोसिस्टम को कंट्रोल कर रखा है. उन्होंने कहा, 'किसी कंपनी के पास उनकी अनुचित प्रैक्टिस को मानने के अलावा क्या विकल्प है... अब वे कह रहे हैं कि उनके ऐप स्टोर से डाउनलोड किए गए ऐप पर अगर कोई ट्रांजेक्शन होता है, तो उन्हें 15 से 30 परसेंट टैक्स या कमीशन चाहिए.'

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मित्तल ने कहा, 'इसका यही मतलब है कि वो स्टार्ट-अप के रेवेन्यू का 50 परसेंट हिस्सा चाहते हैं. ये नई ईस्ट इंडिया कंपनी हैं और वो पूरी तरह से अहंकार के साथ काम कर रहे हैं. समस्या इन कंपनियों से पालन करवाने में है. इनकी स्ट्रैटजी लीगल प्रॉसेस को खींचना और सिस्टम को थकाना है.'

क्या चाहते हैं अनुपम?

मित्तल का आरोप है कि ये टेक कंपनियां हमारी अर्थव्यवस्था के लिए किसी गेटकीपर की तरह काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भले ही सरकार का इरादा सही है, लेकिन लीगल प्रॉसेस बहुत लंबा है. उन्होंने कहा, 'एक सरकार होने के नाते, हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी हमारी अर्थव्यवस्था के लिए गेटकीपर ना बने.'

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अनुपम मित्तल का मानना है कि इस तरह की कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने बोला, 'जो भी कानून को तोड़ता और मरोड़ता है, उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. न्यायिक आदेशों को पालन नहीं करना भी अदालत की अवमानना है और इसलिए इन्हें एक कड़ा मैसेज दिया जा सकता है.'

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