Shark Tank India में अक्सर आपने कई ऐसे प्रोडक्ट और स्टार्टअप देखें होंगे, जो कई लोगों को हैरान कर देते हैं. सोमवार को टेलिकास्ट हुए Shark Tank India में एक ऐसे ही स्टार्टअप ने कई लोगों को खुश कर दिया. दरअसल, Shark Tank India में एक Kibo नाम का स्टार्टअप आया है, जो विजुअली इंपेयर्ड (नेत्रहीन) को भी आसानी से पढ़ने में मदद करता है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
दरअसल, Shark Tank India में अक्षिता और बोनी ने प्रजेंटेशन शुरू करते हुए Kibo के बारे में बताया. ये दोनों Trestle Labs Kibo के को-फाउंडर हैं. उन्होंने बताया कि उनका यह सॉफ्टवेयर एक पेटेंट AI पावर टेक्नोलॉजी पर काम करता है. इसकी मदद से विजुअली इंपेयर्ड लोग भी आसानी से पढ़ सकेंगे, जिनको आसानी से ब्रेल लिपि वाली किताबें या ऑडियो बुक्स नहीं मिल पाती है. को-फाउंडर ने बताया, यह पार्लियामेंट की लाइब्रेरी में भी मौजूद है.
Shark Tank India में Kibo के को-फाउंडर ने एक स्टूडेंट का उदाहरण देते हुए बताया, दीपाली मराठी में BA कर रही थीं और अचानक एक सप्ताह के अंदर उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी. ऐसे में उन्हें अपनी पढ़ाई में परेशानी आने लगी क्योंकि वह अब देखकर पढ़ नहीं सकती थीं. इसके बाद Kibo उनकी जिंदगी में रोशनी लेकर आया और उनके लिए किताबों को ऑडियो फॉर्मेट में कंवर्ट करके सुनाया.
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अक्षिता ने बताया कि भारत में दीपाली जैसे करीब 2 करोड़ लोग विजुअली इंपेयर्ड लोग हैं और उनकी उम्र 50 साल से कम है. हम इस जानकारी को कंफर्म नहीं करते हैं. अक्षिता ने बताया कि बहुत से विजुअली इंपेयर्ड होने की वजह से पढ़ नहीं पाते हैं क्योंकि उन्हें आसानी से ऑडियो बुक या ब्रेल लिपी वाली बुक्स नहीं मिल पाती हैं.
अक्षिता और बॉनी ने बताया कि इस समस्या को देखते हुए उन्होंने Kibo को तैयार किया. यह AI पेटेंट टेक्नोलॉजी पर काम करता है. साथ ही उन्होंने इसका लाइव डेमो भी पेश किया. इसे इंस्टीट्यूट और इंडिविजुअल यूजर्स के लिए तैयार किया गया है. उन्होंने आगे बताया कि इसे संसद की लाइब्रेरी में भी लगाया है.
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शार्क टैंक इंडिया शो के दौरान उन्होंने बताया गया कि उनका सॉफ्टवेयर एक डिवाइस की मदद से किसी भी किताब को स्कैन करके, आसानी से ऑडियो फॉर्मेट में कंवर्ट किया जा सकता है और सुना जा सकता है. Kibo के इस काम की लगभग सभी Shark ने तारीफ की, हालांकि उनके कुछ सावल भी रहे. शार्क ने बताया कि इसमें OCR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है.
इसके बाद अक्षिता ने अपनी आस्क बताई और 1 पर्सेंट इक्विटी पर 60 लाख रुपये की मांग की. इसके बाद आखिर में उन्हें पियूष बंसल और रॉनी स्क्रूवाला ने मिलकर 60 लाख रुपये 6 पर्सेंट इक्विटी पर दिए.