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इस अमेरिकी कंपनी ने Pegasus से पूरी तरह बचाने का दावा किया, जानें कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी

पेगासस स्पाईवेयर काफी ज्यादा चर्चा में रहा है. अब पेगासस अटैक से बचाने का दावा एक कंपनी की ओर से किया गया है. इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो का आयोजन पिछले हफ्ते किया गया था. इसमें कई नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों ने सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में लेटेस्ट इनोवेशन को दिखाया था. लेकिन एक कंपनी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

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Zimperium
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेगासस स्पाईवेयर काफी ज्यादा चर्चा में रहा है
  • अब पेगासस अटैक से बचाने का दावा एक कंपनी की ओर से किया गया है
  • ये एक अमेरिकन-बेस्ड टेक्नोलॉजी फर्म है

पेगासस स्पाईवेयर काफी ज्यादा चर्चा में रहा है. अब पेगासस अटैक से बचाने का दावा एक कंपनी की ओर से किया गया है. इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो का आयोजन पिछले हफ्ते किया गया था.

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इसमें कई नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों ने सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में लेटेस्ट इनोवेशन को दिखाया था. इसमें सबसे ज्यादा ध्यान जिस कंपनी ने खींचा वो एक मोबाइल डिवाइस प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी कंपनी थी. 

इस कंपनी का दावा है पिछले पांच साल में जितने भी पेगासस अटैक हुए उन सभी वेरिएंट्स से ये प्रोटेक्शन दे सकता है. इस कंपनी का नाम Zimperium है. ये एक अमेरिका-बेस्ड टेक्नोलॉजी फर्म है. इसे मोबाइल फोन सिक्योरिटी में स्पेशलाइजेशन हासिल है. 

Zimperium
Zimperium

इसने हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (DOD) को मोबाइल एंडप्वाइंट प्रोटेक्शन सॉल्यूशन देने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया है. Zimperium के रिजनल सेल्स डायरेक्टर Somesh Sawhney ने इंडिया टुडे को बताया कि नए पेगासस अटैक के बार टेक्नोलॉजी में सरकार और एंटरप्राइज की रूचि बढ़ी है.

उन्होंने आगे बताया कि पेगासस का पहला वेरिएंट 2016 में डिटेक्ट किया गया था. हमारे सभी एंटरप्राइज और गवर्नमेंट कस्टमर्स सेफ है. वो नए वेरिएंट जीरो डे से भी सेफ है. 

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उन्होंने आगे बताया कि वो क्लाउड बेस्ड सॉल्यूशन नहीं देते है. इस वजह बिन किसी सिग्नेचर अपडेट्स या अगर फोन इंटरनेट से नहीं भी कनेक्ट है फिर भी वो प्रोटेक्टेड है. इस प्रोग्राम में मोबाइल थ्रेट डिफेंस इंजन है जो मशीन लर्निंग को यूज करता है. 

ये डिवाइस और नेटवर्क बिहेवियर को डिटेक्ट करके रियल टाइम में अटैक को पहचान सकता है. इसे स्पेशली मोबाइल डिवाइस के लिए बनाया गया है. ये आईओएस, एंड्रॉयड और क्रोमबुक प्लेटफॉर्म्स पर काम करता है.

इसके काम करने के तरीक को लेकर कंपनी ने बताया ऑन डिवाइस सॉल्यूशन ऑपरेटिंग सिस्टम के टॉप पर रहता है. ये थ्रेट को पहचान कर यूजर को इसके बारे में अलर्ट करता है और अटैक से बचाता है.  


 

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