भारत ने एक देसी ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित किया है, जिसका इस्तेमाल डिफेंस मिनिस्ट्री के कम्प्यूटर में किया जाएगा. Maya OS जल्द ही डिफेंस मिनिस्ट्री में विंडोज को रिप्लेस कर सकता है. जहां माइक्रोसॉफ्ट का बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहा है. वहीं मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस एक Linux ऑपरेटिंग सिस्टम का यूज करने जा रही है, जो Ubuntu पर बेस्ड होगा.
रिपोर्ट्स की मानें तो इस ऑपरेटिंग सिस्टम को सरकारी एजेंसियों ने पिछले 6 महीनों में डेवलप किया है. साइबर अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस ऑपरेटिंग सिस्टम को डेवलप किया गया है, जो इन-बिल्ट मैलवेयर प्रोटेक्शन के साथ आता है.
इंटरनेट से कनेक्टेड कम्प्यूटर्स पर मौजूद ये ऑपरेटिंग सिस्टम इन-बिल्ट मैलवेयर प्रोटेक्शन प्रोवाइड करेगा. रिपोर्ट्स की मानें तो मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने Maya OS को इंटरनेट से कनेक्टेड कम्प्यूटर्स पर इंस्टॉल करना शुरू कर दिया है. ये ऑपरेटिंग सिस्टम फ्री और ओपन सोर्स Linux डिस्ट्रिब्यूशन Ubuntu पर बेस्ड है, जिसे ब्रिटिश फर्म Canonical मेंटेन करती है.
हालांकि, Maya OS को दूसरे Linux बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम से अलग बनाया गया है. इसे काफी हद तक Windows की तरह रखने की कोशिश की गई है, जिससे ट्रांजिशन प्रॉसेस को आसान बनाया जा सके.
रिपोर्ट्स में मामले से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि 15 अगस्त से पहले डिफेंस मिनिस्ट्री के साउथ ब्लॉक स्थित सभी इंटरनेट कनेक्टेड कम्प्यूटर्स पर Maya OS को इंस्टॉल किया जाएगा.
इस ऑपरेटिंग सिस्टम को तीनों सेनाओं के भी कम्प्यूटर में इंस्टॉल किया जाएगा. हालांकि, इनके लिए सभी ने अभी तक क्लियरेंस नहीं दिया है. रिपोर्ट्स की मानें तो नेवी ने इस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ओके कर दिया है, लेकिन आर्मी और एयरफोर्स ने अभी इस पर विचार कर रही है.
Maya OS से सरकार माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को रिप्लेस कर रही है. चूंकि, रैंसमवेयर और मैलवेयर अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में इंटरनेट से कनेक्टेड कम्प्यूटर को बचाने के लिए इस ऑपरेटिंग सिस्टम में चक्रव्यू नाम का फीचर दिया गया है. ये डिवाइस में मौजूद मैलवेयर को डिटेक्ट करने और उससे डिवाइस को बचाने में सक्षम है.
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ये कोई पहला मामला नहीं है जब Maya OS जैसा कोई घरेलू ऑपरेटिंग सिस्टम डेवलप किया गया है. इससे पहले Bharat Operating System Solution (BOSS) को डेवलप किया गया था, जो Linux पर ही बेस्ड था. इस स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम को CDAC और NRCFOSS ने मिलकर विकसित किया गया था. इसे 19 फरवरी 2021 में रिलीज किया गया था.