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AI तो केवल ट्रेलर है... ये टेक्नोलॉजी बदल कर रख देगी दुनिया, जानकर रह जाएंगे हैरान

Artificial Intelligence या AI का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है. हाल ही में ChatGPT भी काफी सुर्खियों में रहा है. इसको कई लोग गूगल का विकल्प भी मानने लगे हैं. लेकिन, ऐसा नहीं है कि केवल AI ही आने वाली टेक्नोलॉजी है. AI से आगे जहां और भी हैं. आने वाले समय में कई और टेक्नोलॉजी को हम देखेंगे.

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AI के अलावा भी होंगे कई बदलाव
AI के अलावा भी होंगे कई बदलाव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या AI का उपयोग काफी तेजी से बढ़ रहा है. कई क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल काम को आसान बना रहा है. इसमें कोई दो मत नहीं है कि आने वाले समय में इसकी डिमांड काफी बढ़ेगी और इसके अपग्रेडेड सिस्टम को हम देखेंगे. 

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लेकिन, ये साफ है कि इसके अलावा भी कई दूसरी टेक्नोलॉजी का विकास होगा. साल 2023 में भी हम कई टेक्नोलॉजी को देखेंगे. इससे यूजर का एक्सपीरिएंस काफी बदलने वाला है. यहां पर आपको ऐसी ही कुछ टेक्नोलॉजी के बारे में बता रहे हैं जिनकी वजह से हमारी दुनिया बदलने वाली है. 

IoT और 5G से बदलेगी दुनिया

भविष्य बदलने का दम रखने की बात करें तो केवल AI नहीं कई दूसरी टेक्नोलॉजी भी अहम भूमिका निभाएगी. नया 'G' भी भविष्य बदलने का पूरा दम है. भारत में 5G लॉन्च हो चुका है. लेकिन, अभी इसका इस्तेमाल सेलेक्टेड यूजर्स ही कर पा रहे हैं. जैसे-जैसे 5G की उपलब्धता बढ़ेगी. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का चलन बढ़ेगा. 

इंटरनेट मोबाइल-कंप्यूटर से निकल कर कई डिवाइस तक पहुंच जाएगा. IoT की वजह से स्मार्ट सिटी, रोबोट से होने वाली खेती और सेल्फ-ड्राइविंग हाईवे सिस्टम का डेवपलमेंट आसानी से होगा. बिजनेस की स्थिति में ये कॉम्बो उनको अगले लेवल पर व्यापार ले जाने में मदद करेगा. रियल डेटा शेयरिंग से काफी कुछ बदल जाएगा. 

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ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस का भी बढ़ेगा दबदबा

ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस से वेयरेबल डिवाइस और टेक्नोलॉजी को बनाने में मदद मिलती है. इसका सबसे बढ़िया उदाहरण स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर है. स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर बैंड्स से अब आसानी से कई हेल्थ रिलेटेड डेटा को मापा जाता है. इसको आसानी से पहना जा सकता है और ये इनसाइट्स प्रोवाइड करवाते हैं. 

लेकिन, ये केवल यहां तक की सीमित नहीं रहेगा. शूज से लेकर कपड़े तक में ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस का इस्तेमाल होगा. टेक्नोलॉजी के साथ अच्छी बात है ये जितना एडवांस होती है उतनी छोटी होती चली जाती है. इस वजह से आने वाले समय में ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस की वजह से स्मार्ट ग्लास स्मार्ट कॉन्टैक्ट लेंस से रिप्लेस हो सकते हैं. इसके बाद स्मार्ट कॉन्टैक्ट लेंस को स्मार्ट आई इम्प्लांट रिप्लेस कर सकता है. 

ब्लॉकचेन है बड़े काम का

इस लिस्ट में पिछले साल काफी ज्यादा चर्चा में रहने वाली क्रिप्टोकरेंसी का नाम नहीं है. लेकिन, जिस टेक्नेलॉजी पर ये बेस्ड है उसको इग्नोर नहीं किया जा सकता है. हम बात कर रहे हैं ब्लॉकचेन की. डिसेंट्रलाइज्ड होने की वजह से इसे किसी एक परमानेंट लोकेशन पर स्टोर नहीं किया जाता है. 

इसके कारण रिकॉर्ड के नष्ट होने या टेंपर होने की संभावना नहीं रहती है. इस वजह से आने वाले समय में ऑर्गेनाइजेशन इसका इस्तेमाल डेटा स्टोर के लिए कर सकते हैं. इसका फायदा होगा कि डेटा को सरकार या दूसरी संस्था डिलीट नहीं कर सकती है. ये हैक भी नहीं हो सकता है. 

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इसका इस्तेमाल हॉस्पिटल और स्टोर में में हेल्थ रिकॉर्ड स्टोर करने के लिए किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल ऑनलाइन वोटिंग प्लेटफॉर्म के लिए भी किया जा सकता है. साइबर सिक्योरिटी एप्लीकेशन में भी इसको यूज किया जा सकता है. 

एक्सटेंडेड रिएलिटी (XR) के इस्तेमाल से मिलेगा खास एक्सपीरियंस

वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और मिक्स्ड रियलिटी का शॉर्ट वर्जन एक्सटेंडेड रिएलिटी या XR है. इस टेक्नोलॉजी से ज्यादा इमर्सिव डिजिटल एक्सपीरियंस यूजर्स मिलेगा. इसका इस्तेमाल ब्रांड इंगेजमेंट को बूस्ट करने के लिए किया जा सकता है. XR टेक्नोलॉजी से लोगों को दुनिया देखने का नया एक्सपीरियंस मिलेगा. 

इसका इस्तेमाल धीरे-धीरे ही सही लेकिन शुरू हो गया है. मोबाइल बेस्ड एआर ए्क्सपीरियंस Pokemon Go ऐप की लोकप्रियता से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. मेटावर्स में भी XR का इस्तेमाल वर्चुअल दुनिया को ज्यादा एक्सप्लोर करने का मौका देगा. 

3D प्रिटिंग

3D प्रिटिंग को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के तौर पर भी जाना जाता है. यानी किसी 3D ऑब्जेक्ट को डिजिटल फाइल से लेयर बाय लेयर क्रिएट करना. ये AI के मुकाबले कम लॉ-टेक लग सकता है. लेकिन, इसमें भी भविष्य बदलने का माद्दा रखता है. ये मैन्युफैक्चरिंग और दूसरी इंडस्ट्री को पूरी तरह से ट्रांसफॉर्म कर सकता है.

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