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Artificial intelligence (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) यानी AI का इस्तेमाल आज दुनियाभर की तमाम टेक्नोलॉजी में होता है. वैसे तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपने आप में खुद एक टेक्नोलॉजी है. इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन के कैमरा से लेकर मशीन लर्निंग तक में हो रहा है. हमारे चारों तरह AI किसी ना किसी रूप में मौजूद हैं.
ये लोगों की रोजमर्रा की लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुके हैं. जिस तेजी से आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का विकास हो रहा है, कई एक्सपर्ट्स इसे लेकर दुविधा में हैं. क्या आपने टर्मिनेटर मूवीज देखी हैं?
1990 के दशक में आई इस मूवी सीरीज में AI की उसी दुविधा को दिखाया गया है, जिसका लोगों को आज डर सता रहा है. क्या हो अगर किसी सुबह आप उठे और AI ने दुनिया पर कब्जा कर लिया हो? इस तरह के कयास अनयास नहीं लगाए जा रहे हैं. ऐसा सोचने वाले टेक्नोलॉजी सेक्टर के एक्सपर्ट्स हैं.
ऑक्सफोर्ड यूनिटवर्सिटी और Google DeepMind के रिसर्चर्स का एक पेपर पिछले महीने AI Magazine में पब्लिश हुआ है. इस पेपर में AI रिस्क पर चर्चा की गई है. रिसर्चर्स ने बताया है कि किस तरह से AI मानवता के लिए एक बड़ा रिस्क बन सकते हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में Generative Adversarial Networks का इस्तेमाल होता है. ये सिस्टम दो क्राइटेरिया पर काम करता है. पहला इनपुट डेटा के आधार पर एक पिक्चर तैयार करता है जबकि दूसरा पार्ट परफॉर्मेंस को ग्रेड करता है.
रिसर्चर्स का कयास है कि एडवांस AI बेईमानी करना सीख जाएगा. बेहतर रिवार्ड पाने के लालच में AI इंसानों को धोखा दे सकता है और इस क्रम में वह इंसानियत को नुकसान भी पहुंचा सकता है.
ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी के Michael K. Cohen ने एक इंटरव्यू में बताया, 'असंख्य रिसोर्स वाली दुनिया में कब क्या हो यह अनिश्चित है. वहीं सीमित रिसोर्स वाली दुनिया में कंपटीशन होना निश्चित है.'
उन्होंने बताया, 'और अगर आप किसी ऐसे के साथ कंपटीशन में हैं, जो आपको हर कदम चालाकी से मात दे सकता है, तो आप जीत की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.'
आसान भाषा में समझे तो मान लेते हैं कि किसी दिन AI को हमारे लिए खाद्य पदार्थ उगाने की जिम्मेदारी दे दी जाती है. संभव है कि वह ऐसा नहीं करने का कोई तरीका खोज लेगा और अपना रिवॉर्ड भी हासिल कर लेगा.
Cohen ने अपने तर्क में यही कहा है कि हमें इतना एडवांस AI विकसित नहीं करना चाहिए, जो हमें ही मात दे सके. हॉलीवुड की मूवी में भी ऐसा ही दिखा गया है. हमारा भविष्य हमारे वर्तमान की कल्पनाओं का रूप होता है.
आज स्मार्टफोन या दूसरी कई टेक्नोलॉजी जिन्हें हम इस्तेमाल कर रहे हैं, उन सभी की कभी ना कभी कल्पना की गई थी. ऐसे में किसी दिन हमारा मुकाबला अपने क्रिएट किए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हुआ, तो शायद अंतिम परिणाम हमारे पक्ष में ना हो.