WhatsApp Chat Leak जैसे टर्म आपने कई बारे सुने होंगे. खासकर खबरों में यह टर्म कई बार पढ़ने को मिल जाता है. सवाल आता है कि वॉट्सऐप चैट्स लीक कैसे होती हैं. क्योंकि ऐप तो दावा करता है कि वॉट्सऐप चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं. वॉट्सऐप ने कई साल पहले अपने प्लेटफॉर्म पर चैट एन्किप्शन का फीचर जोड़ दिया था.
इसके बाद भी लोगों की चैट्स लीक कैसे हो जाती हैं. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का मतलब है कि वॉट्सऐप चैट्स को सिर्फ सेंडर या रीडर ही पढ़ सकता है. बीच में तीसरा कोई भी शख्स इस डेटा को एक्सेस नहीं कर सकेगा.
यहां तक की वॉट्सऐप या फेसबुक भी यूजर्स के मैसेज को पढ़ नहीं सकते हैं. अगर सब कुछ ऐसा ही है, तो फिर चैट्स लीक कैसे होती हैं. आइए जानते हैं WhatsApp Chat कैसे लीक होती हैं.
किसी भी वॉट्सऐप चैट के लीक होने की कुछ ही संभावनाएं हैं. सबसे पहली तो ये है कि कोई आपका फोन एक्सेस कर ले और चैट्स वहां से लीक कर दे. इसकी संभावना काफी ज्यादा होती है. मान लेते हैं कोई आपका फोन हासिल कर लेता है और उनके अनलॉक भी कर ले.
इसके बाद आपकी चैट्स की स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें किसी और से साथ शेयर किया जा सकता है. मान लेते हैं कि आप किसी अपराधिक मामले में फंस गए हों और आपका फोन पुलिस के हाथ लग जाता है.
ऐसे में आपका फोन अनलॉक करने के लिए पुलिस फॉरेंसिक टीम की मदद ले सकती है. इसके अलावा आपकी चैट्स वॉट्सऐप पर तो एन्क्रिप्टेड होती हैं, लेकिन चैट बैकअप गूगल ड्राइव या iCloud पर एन्क्रिप्टेड नहीं हुआ करती थी. हालांकि कुछ समय पहले कंपनी ने बैकअप में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन देना शुरू कर दिया है.
इसलिए अब तक ज्यादातर वॉट्सऐप चैट लीक के मामले क्लाउड से ही आते थे. अभी भी जो पुराने बैकअप क्लाउड पर रखें हैं वहां से चैट्स लीक होने की संभावना है.
पुलिस वहां से भी आपका डेटा हासिल कर सकती है. इसके अलावा सरकारी एजेंसियां गूगल और ऐपल जैसी कंपनियों को कोर्ट ऑर्डर के साथ अपरोच कर सकती हैं. ये कुछ संभावनाएं हैं, जब आपका डेटा लीक हो सकता है.
कुछ मामलों में कोई आपके वॉट्सऐप वेब वर्जन को एक्सेस करके भी चैट लीक कर सकता है. क्योंकि अब वॉट्सऐप वेब के लिए हमेशा आपके फोन में डेटा का होना जरूरी नहीं है. प्लेटफॉर्म पर मल्टी डिवाइस सपोर्ट मिलने लगा है.
एक सवाल ये भी है कि क्या वॉट्सऐप आपका डेटा सरकार के साथ शेयर करता है? वैसे तो ऐसा होता नहीं है. इस मुद्दे को लेकर सरकार और वॉट्सऐप कोर्ट भी पहुंच चुके हैं.
खासकर ग्रुप में तेजी से शेयर किए जाने वाले मैसेज को लेकर. वॉट्सऐप और सरकार के लिए फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों को रोकना एक चुनौती है. क्योंकि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से फर्स्ट सेंडर का पता लगाना नामुमकिन हो जाता है.