हमें कुछ भी सर्च करना होता है, तो हम फट से गूगल पर पहुंच जाते हैं. फ्री में किसी भी जानकारी को सर्च करते हैं और फिर अपने काम में लग जाते हैं. गूगल सर्च ही नहीं बल्कि Gmail, YouTube समेत ना जाने कितनी ही सर्विसेस को हम फ्री में यूज करते हैं. सवाल ये है कि अगर गूगल की इन सर्विसेस को करोड़ों लोग फ्री में यूज करते हैं, तो कंपनी की कमाई कहां से होती है.
इसके लिए हमें गूगल का बिजनेस मॉडल समझना होगा. कंपनी एक दो तरीकों से नहीं बल्कि कई तरह से पैसे कमाती है. गूगल की शुरुआत 1998 में Larry Page और Sergey Brin ने की थी.
गूगल का अधिकार Alphabet Inc के पास है. कंपनी ने 2004 में अपनी IPO लाया था, जिसका भाव 85 डॉलर था. आइए जानते हैं कंपनी कैसे कमाई करती है. चूंकि गूगल एक सर्च इंजन है, इसलिए इसका ज्यादातर रेवेन्यू विज्ञापन से आता है.
यूजर्स के लिए इसका सर्च प्लेटफॉर्म फ्री है, लेकिन बहुत सी सर्विसेस पेड हैं. करोड़ों लोग रोजाना इस प्लेटफॉर्म पर बहुत कुछ सर्च करते हैं. कंपनी उनके सर्च रिजल्ट से जुड़े ऐड्स उन्हें दिखाती है और पैसे कमाती है. इसके अलावा कंपनी क्लाउड सर्विसेस, हार्डवेयर और प्रीमियम कंटेंट के जरिए भी पैसे कमाती है.
कंपनी अपने रेवेन्यू का 80 परसेंट हिस्सा Google Ads के जरिए कमाती है. साल 2021 में कंपनी ने 209 अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू ऐड्स से हासिल किया था. गूगल ऐड्स आपको किसी वेबसाइट से लेकर YouTube Videos तक नजर आते हैं.
कंपनी पिछले कुछ वक्त से अपनी क्लाउड सर्विसेस को प्रमोट कर रही है. भले ही कंपनी फ्री क्लाउड सर्विसेस ऑफर करती है, लेकिन ये सर्विस सीमित है. एक निश्चित सीमा के बाद यूजर्स को प्रति जीबी स्टोरेज के लिए पैसे खर्च करने होते हैं. साल 2021 में Google Cloud के जरिए कंपनी ने 19 अरब डॉलर की कमाई की थी.
वैसे तो गूगल इस बिजनेस में बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं था. मगर कंपनी ने पिछले कुछ वक्त में खुद को एक्टिव किया है. अब आपको गूगल के स्मार्टफोन, वॉच, ईयरबड्स और दूसरे प्रोडक्ट्स मार्केट में मिलेंगे. साल 2021 में कंपनी ने हार्डवेयर से 19.6 अरब डॉलर की कमाई की थी.
अगर आप एक एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर हैं, तो आप Google Playstore से वाकिफ़ होंगे. वैसे तो ज्यादातर लोग इस सर्विस को फ्री में यूज करते हैं, लेकिन गूगल कुछ खास सर्विसेस के लिए चार्ज करता है. कंपनी प्ले पास के लिए मंथली और ईयरली एक्सेस देती है, जिसके लिए यूजर्स पैसे खर्च करने होते हैं. किसी ऐप डेवलपर को इस प्लेटफॉर्म पर ऐप अपलोड करने के लिए भी फीस देनी होती है.
यूट्यूब और यूट्यूब म्यूजिक का फ्री एक्सेस तो कंपनी सभी को देती है. मगर इसके फुल एक्सेस के लिए आपको एक निश्चित चार्ज देना होता है. कंपनी अपनी फुल सर्विस का एक्सेस प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के साथ देती है. कंपनी ने लगभग 60 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू प्रीमियम सब्सक्रिप्शन से कमाया था.