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वैसे तो पिछले कुछ सालों से Deepfake वीडियोज का चलन काफ़ी बढ़ा है, लेकिन एक्टर रश्मिका मंदाना के वायरल Deepfake वीडियो से देश में इस पर चर्चा शुरू हो गई है. हर कोई जानना चाहता है कि Deepfake से कैसे असली दिखने वाले नकली वीडियोज बनाए जा रहे हैं?
Hao Li को दुनिया के टॉप Deepfake एक्सपर्ट के तौर पर पहचाना जाता है. अमेरिकी कंप्यूटर साइंटिस्ट और पिनस्क्रीन के फाउंडर और सीईओ हाओ ली से हमने Deepfake के बारे में बातचीत की है. हाओ ली Furious 7 और The Hobbit सहित कई हॉलीवुड फिल्मों में विजुअल इफेक्ट के लिए फेशियल ट्रैकिंग और हेयर डिजिटाइजेशन का काम कर चुके हैं.
Deepfake क्या है और ये कैसे काम करता है हम ये भी जानेंगे और साथ ही इस आर्टिकल में हम Deep Fake के बेसिक्स के बारे में बात करेंगे. आपको ये भी बताएंगे कि Deepfake वीडियोज का पता कैसे लगाएं. आखिर ये कैसे जानें कि कौन सा वीडियो सही है और कौन सा Deepfake वाला है.
बेहद डरावना है Deepfake
यूरोपियन इंटरनेशनल पुलिस यानी Europol ने कहा था कि 2026 तक इंटरनेट पर 90% कॉन्टेंट शायद सिंथेटिक होंगे. सिंथेटिक मतलब ऐसे कॉन्टेंट जिन्हें AI से तैयार किया गया है. रश्मिका मंदाना का वायरल Deepfake वीडियो उसका ही एक उदाहरण है और इस तरह के कॉन्टेंट हर दिन आप देखते हैं, लेकिन शायद आप उसे Deepfake नहीं समझते होंगे.
इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी की आवाज़ में कई गाने चलते हैं ये भी Deepfake का एक उदाहरण है. कुछ ऐप्स आपसे दर्जनों फ़ोटोज़ लेकर फ़ेस स्वैप कर देते हैं या आपको किसी एक्टर की तरह बना दिया जाता है. इस तरह के तमाम ऐप AI पर चलते हैं और ये भी एक तरह के Deepfake ही हैं.
वैसे तो माइक्रोसॉफ़्ट से लेकर इंटेल जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने Deepfake डिटेक्शन के लिए सिस्टम तैयार किए हैं. लेकिन ये सल्यूशन कंपनी फ़्री में नहीं देती, बल्कि इनकी सब्सक्रिप्शन काफ़ी महँगे होते हैं और इन्हें कंपनियों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है. ये एक यूज़र के हिसाब से काफ़ी महँगे प्लान्स वाले हैं.
हाओ ली ने के मुताबिक़ अगर कोई शख़्स किसी दूसरे का फ़ेस अपने वीडियो में ख़ुद से रिप्लेस करना चाहता है तो इसके लिए दोनों के चेहरे का इमेज काफ़ी ज़्यादा मात्रा में चाहिए. इसके साथ अलग अलग पोज, एक्सप्रेशन्स और लाइटिंग कंडीशन की भी ज़रूरत होती है. इस तरह का डेटा कलेक्ट करके इन्हें डीप न्यूरल नेटवर्क से ट्रेन करना होता है.
Deepfake वीडियो पहचानने के तरीक़े
फेशियल एक्सप्रेशन: Deepfake के ज़्यादातर वीडियोज को फ़्रेम वाइज ध्यान से देखें. डीपफेक वीडियो में अगर कोई शख़्स दिख रहा है तो उसके गाल और फोरहेड को ध्यान से देखें.
Deepfake वीडियो में किसी ह्यूमन की पलकें नॉर्मल नहीं झपकती हैं. कई बार Deepfake वीडियो में तेजी से पलक झपकती हुई दिखती हैं.
लिप सिंक: ज़्यादातर Deepfake वीडियोज लिप सिंक से पकड़ सकते हैं. वीडियो को स्लो करके प्ले करें और होंठों का बारीकी से देखेंगे तो पाएँगे होंठ का मूववमेंट उस ऑडियो के साथ मेल नहीं खाएगा.
फेशियल हेयर: वीडियो को पॉज़ करके आप ज़ूम कर सकते हैं. ज़ूम करके ध्यान से देखें की चेहरे के फेशियल हेयर असली लग रहे हैं या नक़ली. Deepfake में नॉर्मली फेशियल हेयर को स्मूद कर दिया जाता है या मूझ या दाढ़ी नक़ली लगती है. क्योंकि Deepfake में अब भी फेशियल हेयर को लेकर ज्यादा काम नहीं किया गया है और वीडियो यहां से पकड़ में आ जाते हैं.
रिवर्स इमेज सर्च: Deepfake वीडियो से सबजेक्ट का स्क्रीनशॉट लेकर गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च कर सकते हैं. अगर इंटरनेट पर उससे मिलता जुलता कोई सबजेक्ट होगा तो वहाँ से उसकी जानकारी आपको मिल सकती है.
आँखों का मूवमेंट: आँखों के मूवमेंट को गौर से देखें और पैटर्न नोटिस करें. क्योंकि Deepfake वीडियो में जो फ़ेस दिखेगा उसकी आँखों का मूवमेंट ओरिजनल से काफ़ी अलग होगा
बैकग्राउंड और फोरग्राउंड चेक: वीडियो में जो कॉन्टेंट दिख रहा है उसके बैकग्राउंड और फोरग्राउंड को ध्यान से अनालाइज करें. सबजेक्ट और बैकग्राउंड पूरी तरह से अलग नहीं दिखेंगे और एक दूसरे मर्ज़ होते हुए दिखाई देंगे.
फ़िल्मों में भी यूज किया जाता है Deepfake
Deepfake काफ़ी समय से फ़िल्मों में यूज किया जाता रहा है. उदाहरण के तौर पर फ़ास्ट एंड फ्यूरियस ऐक्टर पॉल वॉटर की मौत के बाद उनकी फ़िल्म में पॉल वॉकर के भाई को रखा गया. लेकिन Deepfake के ज़रिए उनका चेहरा और आवाज़ बिल्कुल पॉल वॉकर की तरह कर दी गई.
इससे पहले भी और आज भी फ़िल्मों में कई जगह पर Deepfake का उपयोग होता है, ख़ास तौर पर हॉलीवुड फ़िल्मों में इसका चलन ज़्यादा है.
टेक्निकल ऐस्पेक्ट क्या हैं..
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही एक ब्रांच या पार्ट है मशीन लर्निंग. Deepfake वीडियो या फ़ोटोज़ बनाने के लिए इसका ज़्यादा यूज किया जाता है.
इसके लिए लोगों के हाव भाव, एक्सप्रेशन, बोलने का तरीक़ा और स्टाइल को ऐडोप्ट करने के लिए जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क यानी GAN का इस्तेमाल किया जाता है.
आमतौर पर जो आप Deepfake वीडियोज देखते हैं वो डीप न्यूरल नेटवर्क पर बेस्ड होता है जो AI का ही एक हिस्सा है. ये दरअसल खूब सारा डेटा में से अलग अलग पैटर्न निकाल लेता है. डेटा यानी किसी शख़्स का फ़ेस, उसकी स्पीच और हाव भाव.
Deepfake बनाने के लिए ऑटोएनकोडर नाम का न्यूरल नेटवर्क स्ट्रक्चर का यूज किया जाता है. ऑटोएनकोडर के दो हिस्से होते हैं - एनकोडर और डीकोडर.
ऑटोएकोडर - एनकोडर और डीकोडर
एनकोडर इमेज को छोटे डेटा में तोड़ देता है तब्दील कर देता है इसे आप कंप्रेस करना भी कह सकते हैं. डीकोडर का काम होता है इस तोड़े गए या कंप्रेस किए गए डेटा को फिर से ओरिजनल बनाना.
ऑटोएनकोडर कंप्रेशन और डिकंप्रेशन के अलावा नई इमेज तैयार करना, आवाज़ को फ़ेच करने से लेकर आँखों के मूवमेंट, आईब्रोज से लेकर हर तरह की छोटी से छोटी डीटेल्स तैयार कर सकता है.
अब डीप फेक तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स इसे यूज करके किसी भी शख़्स का नक़ली वीडियो, फ़ोटो और स्पीच तैयार कर सकते हैं और भ्रम फैला सकते हैं. इस तरह के ऐप्स और सॉफ़्टवेयर इन दिनों पॉपुलर भी हो रहे हैं.
अगले कुछ सालों में बढ़ेंगे ऐसे ट्रेंड
अगले कुछ सालों में Deepfake कॉन्टेंट और बढ़ेंगे. इसलिए जरूरी है कि आप जो भी देखें तुरंत उस पर भरोसा ना करें. खास तौर पर वीडियो को तो जरूर वेरिफाई करें. ऊपर हमने आपको कुछ तरीके बताए हैं जिनसे आप ये पता लगा सकते हैं कि कौन सा वीडियो असली है और कौन सा वीडियो नकली है.
खुद को कैसे बचाएं?
आपका Deepfake वीडियो ना बने इसे सुनिश्चित करने का कोई प्रॉपर सल्यूश नहीं है. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख कर इससे बचा जा सकता है और ब्लैकमेलिंग से भी बच सकते हैं. किसी की Deepfake वीडियो बनाने के लिए काफी सारे फोटोज और वीडियोज की जरूरत होती है. इसलिए अगर आपकी पब्लिक प्रेजेंस नहीं है तो कोशिश करें कि अपनी पर्सनल वीडियोज और फोटोज को इंटरनेट पर कम ही शेयर करें.
Deepfake से तभी बचा जा सकता है जब आप Deepfake को अच्छी तरह से समझते हैं. ऊपर हमने कई तरीके बताएं हैं जिससे आप Deepfake कॉन्टेंट को पकड़ सकते हैं.