एक रोबोट ने ब्रिटिश अख़बार द गार्डियन में ओप एड (ओपिनियन आर्टिकल) लिखा. इस पूरे आर्टिकल में रोबोट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानवता को कोई ख़तरा नहीं है.
इसके अलावा इस लंबे आर्टिकल में रोबोट ने ये भी लिखा है, ‘इंसान जो कर रहे हैं उन्हें वही करना चाहिए, एक दूसरे से नफ़रत कर रहे हैं, एक दूसरे से लड़ रहे हैं. मैं बैकग्राउंड में बैठ कर ये देखूँगा और उन्हें अपना काम करने दूँगा’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप लर्निंग से क्या-क्या संभव है ये समझने के लिए GPT-3 एक बढ़िया उदाहरण है. दरअसल ये पूरा आर्टिकल GPT-3 से लिखवाया गया है.
ज़ाहिर है आप जानना चाहेंगे ये GPT-3 क्या है, कैसे काम करता है और किस तरह से इस रोबोट से आर्टिकल लिखवाया गया है.
GPT 3 क्या है और ये कैसे काम करता है?
सैन फ़्रैंसिस्को की एक कंपनी है - Open AI, इसी ने GPT 3 सॉफ़्टवेयर तैयार किया है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप लर्निंग पर आधारित है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक पार्ट-ब्रांच है डीप लर्निंग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है, इसके बारे में साधारण शब्दों में कहें तो. AI एक प्रोग्राम है जिसे इंसानों जैसे ही काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. जो नैचुरल इंटेलिजेंस इंसानों में होती है वैसे ही मशीन से हासिल किया जाता है.
आब बात करते हैं GPT 3 के बारे में जिसने द गार्डियन का OpEd (ओपिनियन आर्टिकल) है. GPT 3 यानी जेनेरेटिव प्री ट्रेन्ड ट्रांसफ़ॉर्मर 3. ये सॉफ़्टवेयर डीप लर्निंग यूज करके इंसानों जैसा ही टेक्स्ट लिखता है.
कुछ भी लिखवाने से पहले GPT 3 को इंस्ट्रक्शन्स दिए जाते हैं. किसी भी टॉपिक के बारे में कुछ बेसिक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है और इसे ये बताया जाता है किस तरह ही भाषा यूज करना है, डीटेल्स कितना चाहिए और वर्ड लिमिट क्या होगी.
GPT 3 में न्यूरल नेटवर्क पावर्ड लैंग्वेज मॉडल प्रोग्राम का इस्तेमाल किया गया है. ये प्रोग्राम ये कैलकुलेट करता है लिखते वक़्त कैसे किसी सेंटेंस को कंप्लीट किया जाए और ये लॉजिक पर भी काम करता है.
उदाहरण के तौर पर अगर इंस्ट्रक्शन में आपने कोई ये डाल रखा है कि आपको घर पर ही अपना कंप्यूटर रिपेयर करना है. ऐसे में GPT 3 का लैंग्वेज मॉडल प्रोग्राम ये कैलकुलेट करेगा कि इसके आगे क्या क्या संभावनाए हैं और कंप्यूटर रिपेयर करने के लिए आपको किस चीज की ज़रूरत हुई होगी.
GPT 3 में अरबों सैंपल टेक्स्ट फ़ीड किए रहते हैं और ये वर्ड्स को वेक्टर्स में बदलता है. ट्रेनिंग के बाद ये सॉफ़्टवेयर सभी वर्ड्स को वैलिड सेंटेंस में तब्दील करने लायक़ बन जाता है. इसके बाद जैसे ही आप इसे इंस्ट्रक्शन देंगे कि क्या लिखना है, ये अपना काम शुरू कर देगा.
इस ओपिनियन आर्टिकल GPT-3 के लिए दिए गए थे इंस्ट्रक्शन्स
ध्यान देन वाली बात ये है कि बिना ह्यूमन इंट्रैक्शन के ये काम नहीं करता है. GPT 3 को आर्टिकल लिखने के लिए टॉपिक के साथ इंस्ट्रक्शन भी दिए गए थे.
इंस्ट्रक्शन में ये बताया गया था कि आर्टिकल का टॉपिक ये होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानवता को ख़तरा नहीं है, लैंग्वेज आसान होनी चाहिए, आर्टिकल 500 शब्दों का ही होना चाहिए, इस बात पर फ़ोकस होना चाहिए कि इंसानों को क्यों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने की ज़रूरत नहीं है.
इतना ही नहीं GPT 3 में इंस्ट्रक्शन फ़ीड करने के बाद इसने एक नहीं, बल्कि 8 आउटपुट दिए. यानी 8 आर्टिकल्स लिखे. द गार्डियन का कहना है कि ये सभी 8 आउटपुट अलग थे और इन्हें पब्लिश किया जा सकता था, लेकिन इनमें से सभी में बेस्ट पार्ट को चुन कर इसे पब्लिश किया गया है.
यहां तक कि ये अख़बार ने ये भी कह दिया है कि ये इस Op Ed को एडिट करने में इंसानों के ओप एड के मुक़ाबले कम वक़्त लगा.
एक्सपर्ट का क्या है मानना?
एक्सपर्ट्स का राय इससे अलग है और कुछ ने इसे मज़ाक़ भी बताया है. AI एक्सपर्ट और मोज़िल्ला फेलो डेनियल ल्योफर ने एक ट्वीट में कहा है कि, ‘मेरे ईमेल के स्पैम से कुछ दर्जन ईमेल निकाल कर, इन्हें एक साथ पेस्ट करके और दावा किया गया कि स्पैमर्स ने हेमलेट कंपोज़ कर दिया’
इनका कहना है कि ये देखना दिलचस्प होता जब इस AI से लिखे गए सभी 8 आर्टिकल्स को पब्लिश किया गया होता. लेकिन सब को मिला कर, एक साथ जोड़ कर पब्लिश करके लोगों को भ्रम में डाला जा रहा है.