1984 के सिख दंगे (1984 Sikh Riots), जिन्हें 1984 सिख विरोधी दंगे या सिख नरसंहार के नाम से भी जाना जाता है, भारत में एक दर्दनाक और काले अध्याय के रूप में दर्ज हैं. ये दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की 31 अक्टूबर 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद भड़के थे.
इंदिरा गांधी ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया था. इस ऑपरेशन का उद्देश्य सिख नेता जनरैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों को वहां से हटाना था, जो स्वर्ण मंदिर में मौजूद थे. इस सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और स्वर्ण मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे सिख समुदाय में गहरा आक्रोश था.
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, पूरे देश, खासकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और बिहार में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी. बड़े पैमाने पर सिखों की दुकानें, घर और गुरुद्वारे जला दिए गए, सिख पुरुषों को मार डाला गया और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया. यह हिंसा कई दिनों तक जारी रही और लगभग 3,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश दिल्ली में थे.
वर्षों तक सिख समुदाय न्याय के लिए संघर्ष करता रहा. कुछ जांच आयोग और समितियां गठित की गईं, लेकिन न्याय प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं. हाल के वर्षों में कुछ अभियुक्तों को सजा दी गई.
1984 के सिख दंगे भारतीय इतिहास में नफरत और सांप्रदायिक हिंसा के प्रतीक बन गए हैं और आज भी पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की मांग जारी है.
1984 के सिख विरोधी दंगों ने अनगिनत परिवारों की ज़िंदगी को तहस-नहस कर दिया था. पप्पी कौर और लक्ष्मी कौर उस दंगों की पीड़ितों में से हैं, जिन्होंने अपना लगभग पूरा परिवार ही खो दिया. इस मामले में आरोपी सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जिसके बाद मामला फिर से चर्चा में बना हुआ है.
1984 दंगा मामले के दोषी सज्जन कुमार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी है. सज्जन कुमार, कांग्रेस पार्टी के सांसद रह चुके हैं. कोर्ट के इस फैसले पर दंगा पीड़ित परिवारों ने क्या रिएक्शन दिए? क्या वो फैसले से संतुष्ट हैं? पंजाब आजतक में देखिए.
1984 के सिख दंगों में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दिल्ली की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाया गया था. 41 साल बाद मिले इस इंसाफ पर सवाल उठ रहे हैं. सज्जन कुमार अब 80 वर्ष के हैं और उनके पास अपील का विकल्प है. न्याय की धीमी गति पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है.
1984 anti-Sikh riots: 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े केस में आज कोर्ट ने फैसला सुनाया. दिल्ली के सरस्वती विहार हिंसा मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को राउज ऐवेन्यू कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई. यह सज्जन कुमार की दूसरी उम्रकैद है, पहले वे दिल्ली कैंट मामले में सजा काट रहे हैं. देखें इस पर पीड़ित पक्ष के वकील क्या बोले?
1984 के सिख विरोधी दंगों में एक महत्वपूर्ण निर्णय आया है. दिल्ली के सरस्वती विहार हिंसा मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह सज्जन कुमार की दूसरी उम्रकैद है; इससे पहले वे दिल्ली कैंट मामले में उम्रकैद काट रहे हैं.
कांग्रेस पार्टी के पूर्व नेता सज्जन कुमार को सिख दंगे से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. यह केस 1984 सिख दंगों में बाप-बेटे को जिंदा जलाने से जुड़ा हुआ है.
Anti Sikh Riot: 1984 के दंगों से जुड़े एक और मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले से कुछ पीड़ित परिवार खुश हैं तो कई पीड़ित परिवारों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि सज्जन कुमार को फांसी की सजा सुनाई जानी चाहिए थी.
सज्जन कुमार के खिलाफ सिख दंगों से जुड़े तीन केस चल रहे हैं, जिसमें से एक में उन्हें बरी किया जा चुका है और दूसरे में आज उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. साल 2018 में 5 सिखों की हत्या से जुड़े एक मामले में सज्जन कुमार को हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. पूर्व सांसद फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं.
सिख दंगों से जुड़े मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. दिल्ली पुलिस और पीड़ितों ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की कैटेगरी में मानते हुए सज्जन कुमार के खिलाफ फांसी की सजा मांगी थी. हालांकि, कोर्ट ने सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई.
1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को एक और मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. यह मामला दिल्ली के सरस्वती विहार का है, जहां 1 नवंबर 1984 को दो सिख नागरिकों - जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी. सज्जन कुमार पहले से ही एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.
1984 सिख दंगा केस से जुड़े एक और मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है. हालांकि, कोर्ट की तरफ से अभी कुमार को सजा नहीं सुनाई गई है. वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद 84 दंगा पीड़ित बेहद खुश हैं. देखें पंजाब
दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराया है. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में एक सिख पिता-पुत्र की हत्या के मामले में कुमार दोषी पाए गए हैं. उन पर दंगा भड़काने और सिखों को जिंदा जलाने के लिए भीड़ को उकसाने के आरोप थे VIDEO