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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya), जिसे अक्ती या आखा तीज (Akti or Akha Teej) के नाम से भी जाना जाता है, एक वार्षिक हिंदू और जैन वसंत उत्सव है (Annual Hindu and Jain Spring Festival). यह वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि को पड़ता है.

यह क्षेत्रीय रूप से भारत और नेपाल में हिंदुओं, जैनियों और झारखंड आदिवासियों द्वारा एक शुभ दिन के रूप में मनाया जाता है. यह 'अनंत समृद्धि के तीसरे दिन' का प्रतीक है.

त्योहार की तारीख बदलती रहती है क्योंकि इसकी तिथि चंद्र सौर भारतीय पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती है. यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल अप्रैल या मई में पड़ता है (Akshaya Tritiya Date).

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं. इसलिए दोनों की सम्मिलित कृपा का फल अच्छा होता है. अक्षय का अर्थ होता है- जिसका क्षय न हो. अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है. 

इसी दिन से बद्रीनाथ (Badrinath) के कपाट खुलते हैं और सिर्फ इसी दिन वृन्दावन (Vrindavan) में भगवान बांके-बिहारी (Banke Bihari) जी के चरणों का दर्शन होते हैं. इस दिन मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी की जाती है, जो शुभ माना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन तमाम तरह के अन्न का दान किया जाता है (Akshaya Tritiya Rituals).

अक्षय तृतीया के दिन सुबह स्नानादि से शुद्ध होकर पीले वस्त्र पहनना चाहिए. अपने घर के मंदिर में विष्णु जी को गंगाजल से शुद्ध करके तुलसी, पीले फूलों की माला या पीले पुष्प अर्पित करना चाहिए. फिर धूप-अगरबत्ती, दीप जलाकर आसन पर बैठकर विष्णु जी से सम्बंधित पाठ पढ़ने के बाद, अंत में विष्णु जी की आरती करना चाहिए. साथ ही, इस दिन विष्णु जी के नाम से गरीबों को खिलाना या दान देना अत्यंत पुण्य-फलदायी होता है (Akshaya Tritiya Puja). 

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