अलेक्जेंडर लुकाशेंको, राजनेता
अलेक्जेंडर ग्रिगोरीविच लुकाशेंको (Alexander Grigoryevich Lukashenko) एक बेलारूसी राजनेता हैं जो 20 जुलाई 1994 से बेलारूस के राष्ट्रपति हैं (Lukashenko President of Belarus). वह सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मौजूदा यूरोपीय राष्ट्रपति हैं (Longest Serving President). उन्हें यूरोप का आखिरी तानाशाह भी कहा जाता है (Last Dictator of Europe).
एलेक्जेंडर लुकाशेंको का जन्म 31 अगस्त 1954 को हुआ था (Alexander Lukashenko Age). उनके नाना त्रोखिम इवानोविच लुकाशेंको यूक्रेन के सुमी प्रांत की रहने वाले थे. उन्हें उनकी मां ने अकेले पाला है. उनकी मां इकैटरीना त्रोफिमोवना लुकाशेंको रेलवे की एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करती थीं (Alexander Lukashenko Mother). बाद में, वो रूसी सीमा से सटे बेलारूस के एक छोटे से गांव में आकर बस गईं. एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने बेलारूस की ही एक यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में पढ़ाई की (Alexander Lukashenko Education). इसके बाद वो 1975 से 1977 तक दो साल सोवियत आर्मी में भी जुड़े रहे. सोवियत आर्मी में लुकाशेंको डिप्टी पॉलिटिकल अफसर के पद पर तैनात रहे.
लुकाशेंको का राजनीतिक सफर 1990 से शुरू हुआ. उस समय लुकाशेंको रिपब्लिक ऑफ बेलारूस की सुप्रीम काउंसिल के डिप्टी चुने गए. 1993 में उन्हें बेलारूस की संसद की एंटी-करप्शन कमेटी का अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया. 1994 में बेलारूस में पहली बार राष्ट्रपति का चुनाव हुआ. चुनाव दो राउंड में हुए. पहले राउंड में लुकाशेंको ने 45 फीसदी और दूसरे राउंड में 80 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए. लुकाशेंको शुरू से ही रूस के करीबी बने रहे. बेलारूस में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल 5 साल का है. लेकिन लुकाशेंको का पहला कार्यकाल 2 साल के लिए बढ़ाया गया था. 2001 में यहां दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव हुए, जिसमें लुकाशेंको 75 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर दूसरी बार राष्ट्रपति बने. इसके बाद 2006, 2011, 2015 और 2020 के चुनावों में भी लुकाशेंको की ही जीत हुई (Alexander Lukashenko Political Career).
2020 के राष्ट्रपति चुनाव में लुकाशेंको छठवीं बार जीते. विपक्ष ने धांधली का आरोप लगाया. अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भी इस चुनाव पर सवाल उठाए. विपक्षी उम्मीद वियतलाना सिखानौस्काया ने दावा किया कि उन्हें 60 से 70% वोट मिले हैं. 2020 में कोविड मिसमैनेजमेंट और चुनावों में धांधली के आरोपों के चलते बेलारूस में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ. करीब 7 हजार लोग गिरफ्तार कर लिए गए. पश्चिमी देशों की मीडिया ने लुकाशेंको 'यूरोप का आखिरी तानाशाह' बताया. चुनावों के बाद एक रिपोर्टर ने जब धांधली के आरोपों पर सवाल किया तो लुकाशेंको ने कहा, 'मैं तुम्हारे सवाल का जवाब दे रहा हूं. हमने चुनाव करवाया था. जब तक तुम मुझे मार नहीं देते, तब तक कोई चुनाव नहीं होगा.' लुकाशेंको को यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने बेलारूस के वैध राष्ट्रपति के रूप में मान्यता नहीं दी. हालांकि उन्हें रूस, चीन, ईरान सहित कई राज्यों से मान्यता प्राप्त है. (Alexander Lukashenko Election Corruption Charges)
लुकाशेंको ने मई 2021 में एक पैसेंजर फ्लाइट को डराकर मिन्स्क एयरपोर्ट पर उतरवाया और उस फ्लाइट में बैठे एक जर्नलिस्ट को गिरफ्तार कर लिया था. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट में बैठे बेलारूस के जर्नलिस्ट रोमन प्रोतासेविच (Roman Protasevich) को गिरफ्तार करने के लिए बेलारूस की सरकार ने फ्लाइट को सुरक्षा का खतरा होने की बात कही. बेलारूस ने अपने लड़ाकू विमान भी भेज दिए और फ्लाइट को मिन्स्क एयरपोर्ट पर उतरवाकर रोमन को गिरफ्तार कर लिया (Lukashenko Arrested a Journalist after Getting Off Plane).
लुकाशेंको 1994 से ही बेलारूस के राष्ट्रपति हैं. लुकाशेंको जब पहली बार चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने बेलारूस को गड्ढे से निकालने का वादा किया था. 2020 में लुकाशेंको छठी बार राष्ट्रपति चुने गए थे.
रूस के प्रशासन के खिलाफ विद्रोह करने वाली किराए की आर्मी के चीफ प्रिगोझिन रूस लौट आए हैं. इस बात का खुलासा बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने किया है. ये वही आर्मी है, जो पहले रूस की सेना के साथ यूक्रेन में लड़ रही थी, लेकिन कुछ समय पहले इस किराए की आर्मी ने रूस प्रशासन के खिलाफ ही बगावत का बिगुल बजा दिया था.
सैटेलाइट तस्वीरों में इस बात का खुलासा हुआ है कि बेलारूस में बड़ी संख्या में टेंट जैसे सैन्य शिविर खड़े किए गए हैं. कहा जा रहा है कि इन शिविरों का इस्तेमाल येवगेनी प्रिगोझिन के वैगनर समूह के लड़ाकों को रखने के लिए किया जा सकता है.
बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको और उनकी सरकार को पुतिन का कट्टर समर्थक माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि बेलारूस की सीमा यूक्रेन और रूस दोनों से लगती है. रूस और लुकाशेंको के बीच हुई सहमति के तहत रूस, बेलारूस की जमीन का इस्तेमाल लॉन्चपैड के रूप में करेगा.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस और बेलारूस के बीच परमाणु हथियारों की तैनाती को लेकर सहमति बन गई है. हम परमाणु हथियारों के अप्रसार समझौतों का उल्लंघन किए बिना ऐसा करेंगे. दरअसल बेलारूस की सीमा पोलैड से लगती है, जो नाटो का सदस्य देश है.
पुतिन 2019 के बाद पहली बार बेलारूस पहुंचे हैं और उन्होंने वहां राष्ट्रपति लुकाशेंको से मुलाकात की है. पुतिन के बेलारूस दौरे से यह अटकलें लगनी शुरू हो गई कि पुतिन का यह दौरा दरअसल लुकाशेंको पर दबाव डालने के लिए है कि वह रूस के साथ बेलारूस की फौजों को यूक्रेन मोर्चे पर भेजें.