अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी
अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) यानी एएमयू (AMU) एक सार्वजनिक केंद्रीय विश्वविद्यालय है जो उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित है. इसे सर सैयद अहमद खान ने 1875 में मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के रूप में स्थापित किया था. 1920, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम के बाद मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया.
इसके तीन ऑफ-कैंपस केंद्र हैं - एएमयू मलप्पुरम कैंपस (Kerala), एएमयू मुर्शिदाबाद केंद्र (West Bengal) और किशनगंज केंद्र (Bihar). विश्वविद्यालय शिक्षा की पारंपरिक और आधुनिक शाखाओं में 300 से अधिक पाठ्यक्रम प्रदान करता है और भारत के संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत इसकी शुरुआत में घोषित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है (Aligarh Muslim University Campuses and Branches).
डॉ शेख अब्दुल्ला (Dr Sheikh Abdullah) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के महिला कॉलेज के संस्थापक हैं और उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए दबाव डाला था. साथ ही, एक मासिक महिला पत्रिका, खातून का प्रकाशन करते हुए लेख भी लिखा था. महिलाओं के लिए कॉलेज शुरू करने के लिए, उन्होंने संयुक्त प्रांत के उपराज्यपाल के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि भोपाल की बेगम सुल्तान जहां को एक प्रस्ताव भी लिखा था (Aligarh Muslim University Women College).
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का परिसर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में 467.6 हेक्टेयर में फैला हुआ है (Aligarh Muslim University Area). निकटतम रेलवे स्टेशन अलीगढ़ जंक्शन है. यह एक आवासीय विश्वविद्यालय है जिसमें अधिकांश कर्मचारी और छात्र परिसर में रहते हैं (Aligarh Muslim University Hostel).
2018 में, मुफद्दल सैफुद्दीन (Mufaddal Saifuddin) को चांसलर चुना गया और छतरी के पूर्व नवाब इब्ने सईद खान (Ibne Saeed Khan) को प्रो-चांसलर चुना गया. सैयद जिल्लुर रहमान (Syed Zillur Rahman) मानद कोषाध्यक्ष चुने गए. 17 मई 2017 को तारिक मंसूर (Tariq Mansoor) ने विश्वविद्यालय के 39वें कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण किया.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हॉस्टल में एमए के छात्र मोहम्मद शाकिर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वह रात 10 बजे तक सामान्य थे और रोज की तरह खाना भी खाया था. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया और जांच जारी है.
JNU AMU Fund: क्या आप जानते हैं भारत सरकार की ओर से सेंट्रल यूनिवर्सिटी को कितना बजट दिया जाता है और पिछले पांच साल में विश्वविद्यालयों को कितना पैसा दिया गया है...
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक प्रोफेसर को एक अन्य प्रोफेसर के खिलाफ महिलाओं और छात्राओं के नाम से झूठी शिकायतें देने के लिए निलंबित कर दिया गया है. बार- बार शिकायतें मिलने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस में कंप्लेन की तो खुफिया तरीके से जांच शुरू की गई जिसमें सारा खुलासा हुआ.
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. धमकी मेल के ज़रिए दी गई है. मेल भेजने वाले शख्स ने दो लाख रुपए की डिमांड की है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूविवर्सिटी को मेल भेजकर बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. मेल भेजने वाले ने UPI आईडी भेज कर कहा है कि अगर दो लाख रुपए नहीं भेजे गए तो वह यूनिवर्सिटी को बम से उड़ा देगा. इस धमकी के बाद यूनिवर्सिटी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर्स का पिछले 10 साल से प्रमोशन नहीं हुआ है और वे अब भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम कर रहे हैं. बार-बार प्रमोशन की गुजारिश करने बाद जब कोई हल नहीं निकला तो डॉक्टरों ने प्रशासनिक ब्लॉक में शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन किया.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में तीन बांग्लादेशी छात्रों पर सोशल मीडिया पर देश और भारतीय महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगा है. छात्र नेता अखिल कौशल ने प्रॉक्टर ऑफिस में शिकायत दर्ज कर उन्हें निलंबित कर वापस भेजने की मांग की है. एएमयू प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
संभल में हुई हिंसा के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रदर्शन किया. छात्र तख्ती और पोस्टर लेकर सड़क पर उतरे और लाइब्रेरी कैंटीन से बाबे सय्यद गेट तक मार्च निकाला. संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिन्दू पक्ष के दावे के बाद कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया था. देखें ये वीडियो.
संभल में हिंसा के बाद मस्जिद को लेकर माहौल गर्मा गया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संभल मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की. इस बीच हिंसा के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रदर्शन किया. छात्र तख्ती और पोस्टर लेकर सड़क पर उतरे. छात्रों ने लाइब्रेरी कैंटीन से बाबे सय्यद गेट तक मार्च निकाला. देखें 'आज सुबह'.
सीएम योगी ने कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आपने देखे होंगे, हरियाणा की जनता ने जवाब दिया कि हमें डबल इंजन की सरकार चाहिए. जनता को सुरक्षा का एहसास भाजपा ही दे सकती है. अलीगढ़ से ज्यादा अच्छा उदाहरण आपको क्या मिलेगा, क्योंकि जिन राजा महेंद्र प्रताप को कांग्रेस ने पूरी तरह भुला दिया था, उन राजा महेंद्र प्रताप सिंहजी के नाम पर भी हमने स्टेट यूनिवर्सिटी अलीगढ़ को दी है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जब यह संस्थान सरकार के धन से चलता है, तो पिछड़ी जातियों को यहां पर आरक्षण क्यों नहीं मिलता? यह संस्थान अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लोगों को कोई आरक्षण नहीं देता, लेकिन मुसलमानों के लिए 50% आरक्षण की व्यवस्था है.
साल 1967 में अजीज बाशा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि क्योंकि विश्वविद्यालय की स्थापना केंद्रीय कानून के तहत की गई थी, इसलिए इसे अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित नहीं कहा जा सकता था, इसलिए इस आधार पर इसे अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया गया.
भारत में एक विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना, अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ाव, स्थापना का उद्देश्य, मैनेजमेंट, छात्र समुदाय और सिलेबस आदि समेत कुछ विशेष मानदंडों के आधार पर होता है. यह दर्जा संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत दिया जाता है, जो अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा या नहीं? शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने इसका फैसला तीन जजों की बेंच पर छोड़ा है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे पर 1967 का फैसला खारिज, SC ने नए सिरे से निर्धारण के लिए बनाई 3 जजों की बेंच.
AMU को लेकर सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने 4-3 की बहुमत से फैसला सुनाया है. SC के मुताबिक, फिलहाल AMU का अल्पसंख्यक दर्जा बरकार रहेगा लेकिन ये दर्जा रहेगा या नहीं इसका फैसला 3 जजों की बेंच तय करेगी. देखें SC ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा?
भारत में एक विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना, अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ाव, स्थापना का उद्देश्य, मैनेजमेंट, छात्र समुदाय और सिलेबस आदि समेत कुछ विशेष मानदंडों के आधार पर होता है. यह दर्जा संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत दिया जाता है, जो अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है.
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अज़ीज़ बाशा केस में 1967 के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि कोई संस्था अपना अल्पसंख्यक दर्जा सिर्फ इसलिए नहीं खो सकती क्योंकि उसका गठन एक कानून के तहत हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट को इस बात की जांच करनी चाहिए कि विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की और इसके पीछे किसका 'ब्रेन' था.
सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर 1967 में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय को पलटते हुए इसे नई बेंच के पास भेजने का आदेश दिया है. सात जजों की पीठ ने यह फैसला चार-तीन के बहुमत से सुनाया. कोर्ट के इस निर्णय के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
आजतक से बात करते हुए वकील शादान फरासत ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने 1967 का अजीज बाशा जजमेंट खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया जा सकता. अब चूंकि वो फैसला ही खारिज हो गया है तो उसे बदलने के लिए जो 1981 का संशोधन आया था वो भी अमान्य हो गया है.'
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे की बहाली की मांग वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में संविधान बेंच ने फैसला सुनाया. इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की दलील थी कि इसे अल्पसंख्यक खांचे में रखना सही नहीं है. याचिकाकर्ता के वकील शादान फ़रासत ने मामले पर आए 'सुप्रीम फैसले' की बारीकियां बतलाईं. देखें वीडियो.